Video देखिए, कैसे लाख की खेती किसानों को बना सकती है लखपति, पढ़िए पूरी जानकारी

Video देखिए, कैसे लाख की खेती किसानों को बना सकती है लखपति, पढ़िए पूरी जानकारीइलाहाबाद के बायोवेद संस्थान में किसानों दिया जाता है प्रशिक्षण

इलाहाबाद। अगर परंपरागत खेती के साथ ही किसान और मुनाफा कमाना चाहते हैं तो उन किसानों के लिए लाख की खेती फायदेमंद साबित हो सकती है, लाख की खेती के साथ ही किसान उसको प्रोसेस करके उससे उत्पाद बनाकर दोगुना मुनाफा कमा सकता है।

इलाहाबाद जिले के कौड़िहार ब्लॉक के श्रींगवेरपुर में स्थित बायोवेद कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान से प्रशिक्षण लेकर उत्तर प्रदेश ही नहीं दूसरे प्रदेशों के भी कई किसान लाख की खेती कर रहे हैं। इलाहाबाद के साथ ही मिर्जापुर, चित्रकूट, बुंदेलखंड के किसान लाख की खेती कर रहे हैं। किसान इसकी खेती कर प्रतिवर्ष एक हेक्टेयर में छह से नौ लाख रुपए तक का मुनाफा कमा सकता है।

लाख की खेती के बारे में बायोवेद कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान के प्रबंध निदेशक डॉ. हिमांशू द्विवेदी बताते हैं, "फ्लेमेंजिया सेमिलाटा नाम के पौधों पर लाख की खेती की जा सकती है, इसके अलावा कुसुम, पलाश, बेर, बबूल, जंगल जलेबी, पीपल, गूलर, सिरिस, पाकड़ पर उगाकर किसान लाख उगा सकते हैं, लेकिन अगर किसान चाहता है कि आज लगाएं और कल मुनाफा पाएं तो किसान फ्लेमेंजिया के पौधे लगा सकते हैं, ये पौधे तीन-चार महीने में तैयार हो जाते हैं। लाख की खेती से न्यूनतम एक पेड़ से ढाई से तीन हज़ार रुपए प्रतिमाह की कमाई होती है।"

फ्लेमेंजिया की लकड़ी से निकालते हैं लाख

साल 2006 में हुई थी लाख की खेती शुरूआत
डॉ. हिमांशू द्विवेदी बताते हैं, "साल 2006 में लाख की खेती शुरूआत की गई थी, हमारे निदेशक डॉ. बीके द्विवेदी एक बार रांची गए थे, वहां पर लाख रिसर्च इंस्टीट्यूट है, जहां पर लाख पर काम हो रहा था, सबसे बड़ी बात ये है कि जैसे हम कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं, उतना ही पेड़ ग्रहण करता है। जैसे कि हम किसी किसान से कहेंगे की आप पेड़ मत काटो तो वो कहेगा कि क्यों न काटे। ऐसे में अगर वही पेड़ से आमदनी होने लगे तो कोई क्यों पेड़ काटेगा तो इसलिए लाख की खेती में पर्यावरण भी सुरक्षित और आमदनी भी अलग से।

लाख की खेती शुरू करने के लिए एक ब्रूड लैक होता है, जिसे फ्लेमेंजिया की शाखा में बांध देते हैं, जिसे 15 दिन बाद हम उस लकड़ी को हटा लेते हैं, वो काम करना शुरू हो जाता है।

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साल में दो बार मिलता है उत्पाद
ये दो सीजन में होता है पहला जून-जुलाई और दूसरा फरवरी से अप्रैल के बीच में पौधों पर लाख की वृद्धि होती है। देश में सबसे ज्यादा लाख का उत्पादन होता है, लेकिन वैल्यू एडिशन के बिना सभी का एक्सपोर्ट हो जा्ता है, भारत में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में लाख की खपत होती है।

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लाख से बनते हैं चालीस तरह के प्रोडक्ट
उत्तर प्रदेश में 40 इंडस्ट्रीज में लाख का प्रयोग होता है, जैसे कि कॉस्मेटिक जैसे नेल पेंट में जो शाइनिंग आती है वो भी लाख ही है, जैसे पटाखा उद्योग में पटाखों में जो अलग-अलग रंग निकलते हैं वो भी लाख ही होता है। इस तरह लाख का प्रयोग कई उद्योग में होता है।

सीतापुर में लाख से प्रोडक्ट बनाती महिलाएं।

लाखों किसानों ने लिया प्रशिक्षण
यही नहीं यहां पर प्रशिक्षण लेकर कई किसानों लाख की खेती भी शुरू कर दी है, अभी तक यहां से एक लाख से भी अधिक लोग लाख की खेती का प्रशिक्षण ले चुके हैं। किसान कहता है कि हमें तुरंत पैसा चाहिए जैसे किसान कहता है कि हम लाख कि खेती नहीं करेंगे हमें लाख के प्रोडक्ट बनाना है तो हम ट्रेनिंग भी देते हैं और उनसे उनका प्रोडक्ट खरीदते हैं। इससे किसान को भी फायदा है कि उन्हें किसी और को नहीं बेचना पड़ता हम ही उनसे लाख के प्रोडक्ट खरीदे लेते हैं।

ऐसे भट्ठी में अलग करते हैं लाख

लाख की खेती साथ लगा सकते हैं दूसरी फसलें
लाख की खेती करने वाले किसान सूखे एवं आर्थिक मंदी की स्थिति में भी लाभ कमाते हैं। लाख की खेती के साथ ही अन्य फसल भी उगाई जा सकती हैं। लाख कीट पेड़ों पर उगाए जाते हैं। इसे जंगलों के अलावा खेत के मेड़ पर लगे पौधों पर लगाया जा सकता है। लाख की खेती किसानों के लिए बहुत लाभप्रद साबित हो रही है। इसे पारम्परिक खेती के साथ भी किया जा सकता है। लाख की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा किसानों को देने का काम कर रही है।

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