ये है गाँव का मार्शल आर्ट स्कूल : जहां से निकले हैं कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी

ये है रायबरेली जिले के लालगंज का मार्शल आर्ट संघ जहां पर छोटे बच्चों से लेकर पुलिसकर्मी तक मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने आते हैं।

एक छोटा सा कस्बा लालगंज जहां पर न तो कोई स्टेडियम है और न ही कोई और सुविधा, लेकिन यहां के मार्शल आर्ट स्कूल से ट्रेनिंग लेकर कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं।

ये है रायबरेली जिले के लालगंज का मार्शल आर्ट संघ जहां पर छोटे बच्चों से लेकर पुलिसकर्मी तक मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने आते हैं। इस संस्था की शुरुआत करने वाले अतिकुर्र रहमान बताते हैं, "जब मैंने इस संस्था की शुरूआत की थी तब सिर्फ तीन बच्चे सीखने आते थे, इन्हीं तीन बच्चों को एक साल तक प्रशिक्षण दिया फिर धीरे-धीरे लोगों का जुड़ना शुरू हुआ।"

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इस संस्था में मार्शल आर्ट की चार विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिनमें ताइक्वाण्डों, किक बॉक्सिंग, वुशू, बॉक्सिंग जैसे आत्म रक्षा वाले खेल शामिल है। इस चारों खेलों में यहां कई दर्जन खिलाड़ियों ने नेशनल प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर पदक जीते है। यहां के सात खिलाड़ियों को अलग-अलग सरकारी विभागों में खेल कोटे से नौकरी मिली अब वह खिलाड़ी अपने विभागों की तरफ से खेल रहे है। इस संस्था के आठ खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय की तरफ से पुरस्कार भी मिला।

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अपनी संस्था की बदौलत अतिकुर्र रहमान ने आज तक जिले भर में 5,000 से ज़्यादा युवाओं को इस कला की ट्रेनिंग दे चुके हैं। वो बताते हैं, ''आजकल शहरों में ही नहीं बल्कि गाँवों में भी लड़कियों निडर होने की ज़रूरत है। इसके लिए यह बेहद ज़रूरी है कि लड़कियां जूडो-कराटे व मार्शलआर्ट सीखें। हमारी संस्था की छोटी सी टीम पूरे जिले भर के स्कूलों में घूमती है और लड़कियों को आत्मरक्षा के प्रति जागरुक करती है।''

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अतिकुर्र रहमान रिज़वी की इस संस्था की मदद से अब लालगंज व चिकमंडी जैसे स्थानीय क्षेत्रों में 200 से ज़्यादा लड़किया मार्शलआर्ट सीख रही हैं। जिला मार्शल आर्ट एसोसिएशन में मार्शल आर्ट सीख चुकी डिंपी और सलमा को प्रदेश सरकार ने रानी लक्ष्मी बाई वीरता सम्मान से नवाज़ा भी है।

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