ज्ञानी चाचा और भतीजा के इस भाग में देखिए कैसे करें पॉली हाउस में खेती 

ज्ञानी चाचा और भतीजा के इस भाग में देखिए कैसे करें पॉली हाउस में खेती ज्ञानी चाचा और भतीजा भाग- तीन

पिछले कुछ वर्षों में नई तकनीक के इस्तेमाल कर किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, ज्ञानी चाचा के तीसरे भाग में ज्ञानी चाचा और भतीजे पॉली हाउस में होने वाली खेती के बारे में पता रहे हैं।

पॉली हाउस में किसान फूलों की खेती के साथ ही टमाटर, शिमला, मिर्च खीरे जैसी कई सब्जियों की खेती कर सकते हैं। इसके लिए उद्यान विभाग किसानों को सब्सिडी भी देता है।

पॉली हाउस में खेती उन फसलों की जाती है, जो कम तापमान में उगती हैं, पॉली हाउस पूरी तरह से ढ़का होता है, इसे तापमान को स्थिर रखने के लिए पंखे भी लगाए जाते हैं। सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक से जलवायु को नियंत्रित कर दूसरे मौसम में भी खेती की जा सकती है। ड्रिप पद्धति से सिंचाई कर तापमान व आर्दता को नियंत्रित किया जाता है।

ग्रीन हाउस बहुत अधिक गर्मी या सर्दी से फसलों की रक्षा करते हैं, धूल और बर्फ के तूफानों से पौधों की ढाल बनते हैं और कीटों को बाहर रखने में मदद करते हैं। प्रकाश और तापमान नियंत्रण की वजह से ग्रीनहाउस कृषि के अयोग्य भूमि को कृषि योग्य भूमि में बदल देता है जिससे औसत पर्यावरणों में खाद्य उत्पादन की हालत में सुधार होता है।

अगर किसान पॉली हाउस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो उद्यान विभाग में आवेदन कर इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान को जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में आवेदन जमा करना होता है।

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जिला उद्यान अधिकारी, लखनऊ डीके वर्मा बताते हैं, "एक हजार वर्ग मीटर में पॉलीहाउस बनाने में करीब 11 लाख की लागत आती है और पौधरोपड़ में करीब छह लाख की लागत से दस हजार पौधे लग जाते हैं। दोनो में सरकार द्वारा 50 फीसदी अनुदान दिया जाता है एक बार पौधे लगाने के बाद ये पौधे तीन से पांच साल तक फूल देते हैं। औसत एक पौधे से 40 फूल मिलते हैं, एक फूल की कीमत सात से 12 रुपए के बीच में है। इस तरह अगर औसत देखा जाए तो साढ़े आठ लाख खर्च करके पहले साल को छोड़कर हर साल 25 से 28 लाख तक कि कमाई हो जाती है और पौध व पॉलीहाउस छोड़कर करीब दो लाख वार्षिक खर्च देख रेख में आता है।"

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