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झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की जयंती पर नीलेश मिसरा की आवाज़ में सुनिए सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता

खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी... ये कविता जिस वीरांगना लक्ष्मी बाई पर लिखी गई उनका जन्म 19 नवंबर 1828 को हुआ था.. अंग्रेजों से लड़ते हुए झांसी की रानी 18 जून 1858 को शहीद हो गई थीं..

लक्ष्मी बाई झाँसी राज्य की रानी और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगना थीं। उन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में अंग्रेज़ साम्राज्य की सेना से संग्राम किया और रणक्षेत्र में वीरगति प्राप्त की, लेकिन जीते जी अंग्रेजों को अपनी झाँसी पर कब्जा नहीं करने दिया। झांसी की रानी का किला आज भी उत्तर प्रदेश के बुदेलखंड के झांसी में उनकी वीरता की याद दिलाता है। हर साल कई देशों को लाखों पर्यटक झांसी का किला देखने, झांसी की रानी की वीरता के निशान देखने यहां पहुंचते हैं।

झांसी की रानी की जयंती के मौके पर आप पोयट्री प्रोजेक्ट में नीलेश मिसरा की आवाज़ में सुनिए रानी लक्ष्मीबाई पर लिखी सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 'झाँसी की रानी'...




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