बैंक अफसरों की लापरवाही इस बुजुर्ग पर भारी, रुपये होने के बावजूद उधार लेकर चल रहा परिवार

बैंक अफसरों की लापरवाही इस बुजुर्ग पर भारी, रुपये होने के बावजूद उधार लेकर चल रहा परिवारग्राफिक क्रिएशन: कार्तिक उपाध्याय।

रिपोर्ट: बसंत कुमार

लखनऊ। "रुपये होने के बावजूद उधार मांग कर परिवार चला रहा हूँ। घर में खाने को नहीं है। बुधवार को जैसे-तैसे काम चला। आज सुबह ही बैंक चला गया था। लम्बी लाइन को पार कर जब काउंटर पर पहुंचा तो बैंक से सिर्फ एक हज़ार रुपए मिले। बैंक एक हज़ार रुपए से ज़्यादा नहीं दे रहा है। मेरे परिवार में 13 सदस्य हैं। सब कुछ खरीद कर खाना है। एक हज़ार रुपए से कब तक खर्च चलेगा।" यह कहना है राजधानी लखनऊ से सटे उत्तर धौला गाँव के रहने वाले संत कुमार चौहान का।

किसी तरह कर्ज मिला और....

संत कुमार चौहान रोते हुए कहते हैं कि सरकार ने 500 और 1000 रुपए के नोट बैन कर दिये हैं, तब से काफ़ी तकलीफें उठानी पड़ रही हैं। चावल और आटा के अलावा सब कुछ रोजाना खरीदना ही होता है, लेकिन जब से टीवी पर खबर आई है, उसके बाद से दुकानदारों ने 500 और हज़ार के नोट लेने बंद कर दिए। बुधवार को आसपास के दुकानदारों से कर्ज लेकर काम चलाया।

कैसे चलाएं गुजारा, आप बताइये...

संत कुमार चौहान बताते हैं कि मेरे पास 38,000 रुपए थे। आज तिवारीगंज स्थित कॉरपोरेशन बैंक गया तो पैसे जमा भी नहीं हुए और एक हजार के बदले सिर्फ 500 रुपए के दो नये नोट मिले। बैंक अधिकारियों ने कहा कि आप लाख रुपए जमा करेंगे तब भी आपको हज़ार रूपये से ज़्यादा नहीं दे सकते हैं। हम सरकार के इस फैसले से बेहद दुखी है। अब हम कैसे गुजारा चलाएं, आप बताइये...

वहीं, बैंक अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं कि सबको चार-चार हज़ार रुपए दे देंगे तो सभी लोगों को शायद हम ना दे पाएं इसीलिए हम अभी सबको एक-एक हज़ार रुपए दे रहे हैं।

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