वीडियो: क्यों समाज में कलंक है किन्नर, क्या उन्हें सम्मान नहीं मिलना

किन्नरों को भारत में कानूनी तौर पर तीसरे लिंग का दर्जा मिला हुआ है विवाह या बच्चे के जन्म पर इनकी मौजूदगी को शुभ माना जाता है। लेकिन इन मौकों के अलावा किन्नर समाज से बहिष्कृत, लगभग शापित सा जीवन जीते हैं, और अक्सर मजाक का विषय बनते हैं।

हमारा देश अनेक पंरपराओं वाला देश हैं। यहां के वेद-पुराण अपने आप में एक सत्य हैं। जिन पर आधारित कई मान्यताएं, कहानियां, तथ्य आदि सभी सत्य लगते हैं। हमारा समाज स्त्री-पुरूष दो भागों में बटां है, लेकिन एक तीसरा भाग भी है जिसे अक्सर हम नजरअंदाज करते हैं। जिन्हें किन्नर, हिजड़ा, छक्का, समलैंगिक, ट्रांसजेंडर कई नाम दे दिये गये हैं। किन्नरों को भारत में कानूनी तौर पर तीसरे लिंग का दर्जा मिला हुआ है विवाह या बच्चे के जन्म पर इनकी मौजूदगी को शुभ माना जाता है। लेकिन इन मौकों के अलावा किन्नर समाज से बहिष्कृत, लगभग शापित सा जीवन जीते हैं, और अक्सर मजाक का विषय बनते हैं।





प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 19 जुलाई 2016 को ट्रांसजेंडर पर्सन (प्रोटेक्शन ऑफ राइटस) बिल को मंजूरी दे दी।

इस बिल के जरिए एक व्यवस्था लागू करने की है, जिसमें किन्नरों को भी सामाजिक जीवन, शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में आजादी से जीने का अधिकार मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट ने किन्नरों के हक में फैसला सुनाया। किन्नरों को तीसरे लिंग यानी थर्ड जेंडर का दर्जा दिया गया।

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