दो महीने सूखा और फिर भारी बारिश; बर्बाद हो गईं कई फसलें

जुलाई और अगस्त के महीनों में सूखे जैसे हालात और सितंबर के महीने में भारी बारिश ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में किसानों को संकट में डाल दिया है, क्योंकि उनकी सब्जियों और दलहन की खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।

Sumit YadavSumit Yadav   30 Sep 2022 12:35 PM GMT

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। बउआ सोनकर ने उन्नाव जिले के बलऊ खेड़ा गाँव में अपने बटाई पर लिए खेत को देखा। उस डेढ़ बीघा जमीन पर 36 साल के सोनकर ने कुछ पैसे कमाने की उम्मीद में फूलगोभी और बैगन की फसल लगाई थी। लेकिन, अब उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था।

सबसे पहले, यह जुलाई और अगस्त के महीन में सूखे जैसी स्थिति थी जिसने उनकी सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई। फिर, सितंबर के महीने में, बहुत भारी बारिश हुई जिसने कमाई की उम्मीद पर पानी फेर दिया।

"मैंने एक बीघा फूलगोभी लगाई थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश ने उन्हें नुकसान पहुंचाया है। अगर कुछ और दिनों तक इसी तरह बारिश होती रही, तो सब कुछ खत्म हो जाएगा, "सोनकर ने अफसोस जताया।

सोनकर के पास न सिर्फ अपनी खराब हुई फसल बची है बल्कि उन्हें कर्ज भी चुकाना है। सोनकर ने बताया, "गोभी की खेती करने के लिए पत्नी कुसुमा देवी के स्वयं सहायता समूह से बीस हजार रुपये उधार लिए थे, लेकिन बारिश के कारण फसल को देखकर लग रहा है कि अब वह पैसे भी हम नही चुका सकेंगे।"


सोनकर के गाँव से पंद्रह किलोमीटर दूर बेहटा नथई सिंह गाँव है। 62 वर्षीय किसान रामेश्वरी देवी अपनी मूंग की फसल उदासी से देख रही हैं। खेत में मूंग तोड़ रही राजेश्वरी देवी कहती हैं, "बारिश से मूंग पेड़ में ही सड़ गयी है, बारह बिस्वा में मूंग बोई थी अगर मौसम साथ देता तो एक कुंतल मूंग पैदा होने की उम्मीद थी लेकिन बारिश के कारण इतने बड़े खेत में दो-चार किलो हो जाए तो बहुत है।"

मौसम के एक अजीबोगरीब बदलाव में, उत्तर प्रदेश, जो सितंबर के मध्य तक सूखे की स्थिति में था, इस साल 1 जून से 14 सितंबर के बीच शून्य से 46 प्रतिशत कम बारिश के साथ, अब बहुत भारी वर्षा के प्रभाव से जूझ रहा है। कुछ जिलों में बाढ़ भी।

बउआ सोनकर और रामेश्वरी देवी जैसे किसान, जो सूखे की स्थिति में अपनी फसलों को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे थे, अब भारी बारिश के कारण अपनी खड़ी फसलें खो रहे हैं।

पिछले एक सप्ताह में, 22 सितंबर से 28 सितंबर के बीच, उत्तर प्रदेश में 193 प्रतिशत की अत्यधिक भारी वर्षा हुई है (मानचित्र देखें: 22-28 सितंबर, 2022 के बीच राज्यवार वर्षा)! हालांकि, राज्य में अभी भी शून्य से 28 फीसदी कम बारिश हुई है।

मानचित्र: 22-28 सितंबर, 2022 के बीच राज्यवार वर्षा (स्रोत: भारत मौसम विज्ञान विभाग)

एक बीघा खेत फूलगोभी के अलावा सोनकर ने आधा बीघा जमीन में बैंगन बोया था। बउवा ने आगे बताया, "बारिश के चलते बैगन में भी नुकसान हुआ है, आधा बीघा बैगन काट कर फेकना पड़ रहा है,बउवा की माने तो बारिश की वजह से बैगन में कीड़ा बहुत ज्यादा लग रहा था, जिसके लिए हर हफ्ता 1600 -1700 की दवा का छिड़काव करना पड़ रहा था।" उन्होंने आगे कहा, "अब तक बैगन में तेरह हजार से अधिक की लागत लग चुकी थी लेकिन मुनाफा नही मिल रहा था इसलिए हार कर पेड़ काट डाले।"

सितंबर की बारिश ने सब्जियों और दालों दोनों के खेतों में कहर बरपाया है जो लगभग फसल के लिए तैयार थे। फसलें अब खेतों में सड़ रही हैं।

किसान अपने बढ़ते नुकसान और बढ़ते कर्ज को गिन रहे हैं। रामेश्वरी आगे बताती हैं, "जुताई बुवाई दवा में चार से पांच हजार रुपये खर्च हुए हैं, याद करते हुए रामेश्वरी कहती है कि सितंबर माह में इतनी बारिश दस बारह साल पहले हुई थी, रामेश्वरी मूंग की फलियों को रगड़ कर दिखाते हुए कहती हैं कि आप खुद देख लो पूरी मूंग सड़ गयी है।

सिकंदरपुर प्रखंड के अजरायल खेड़ा गांव के छोटे लाल भारतीय का भी यही हाल है। 67 वर्षीय किसान ने 16 बिस्आ मूंग बोई थी दो हजार रुपये का खर्च सिर्फ जुताई में आया था उसके बाद निराई गुड़ाई और दवा खाद में 3 हजार रुपए का खर्च आया। छोटे लाल के अनुसार बाद में हो रही बारिश से नुकसान हुआ है।


छोटेलाल आगे बताते हैं पहले बारिश नही हुई जिससे उड़द मूंग मक्का ठीक से जगे नहीं थे जो जगे भी थी थे वह सूख गए थे, किसी तरह जो तैयार हुई थी वह अब बारिश में सड़ गयी। धान में इस बारिश से फायदा हुआ है।

लोहचा गाँव के ओम प्रकाश सोनकर को उम्मीद थी कि उन्होंने 12 बिस्वा जमीन पर लगाए गए फूलगोभी से कम से कम 50,000 रुपये कमाए होंगे। "इस बारिश से गोभी में बहुत नुकसान हुआ है, जिस खेत में उम्मीद थी कि पचास से साठ हजार रुपये की गोभी निकलेगी उसमें आज लागत निकल आए तो मेरा भाग्य होगा, "उन्होंने गाँव कनेक्शन को बताया।

ओम प्रकाश सोनकर ने कहा कि 10 ग्राम बीज के लिए फूलगोभी के बीज 700 रुपये महंगे थे। इसके अलावा, हर आठवें दिन पौधों को 600 रुपये मूल्य के कीटनाशकों की जरूरत होती है। "मैंने अकेले बीजों पर 5,000 रुपये खर्च किए, "उन्होंने कहा।

जून और जुलाई में गर्मी, फिर सितंबर में इतनी बारिश हुई कि बची हुई फूलगोभी की जड़ें सड़ गईं, ओमप्रकाश ने समझाया।


"मैंने अपनी फूलगोभी की फसल पर लगभग पंद्रह हजार रुपये खर्च किए हैं। मेरे द्वारा खरीदे गए बीजों के लिए अभी भी मेरे पास पैसे हैं। अगर बारिश बंद हो जाती है और मैं कुछ फूलगोभी को बचाने में कामयाब हो जाता हूं, तो मैं अपने कुछ पैसे चुका सकता हूं। नहीं तो मुझे दिहाड़ी मजदूरी की तलाश करनी होगी और अपना कर्ज चुकाना होगा।"

कृषि विज्ञान केंद्र धोरा के कृषि वैज्ञानिक धीरज तिवारी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

तिवारी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "मौसम का परिवर्तन लगातार किसानों के लिए चुनौती बन रहा है, इस बार जून/जुलाई में बारिश न होने से किसानों ने निजी संसाधनों से सिचाई कर खरीफ की बुवाई की थी जिससे उनकी लागत बढ़ गई थी, और फसल भी अपेक्षाकृत कमजोर थी लेकिन सितंबर माह की जोरदार बारिश ने किसानों की दलहनी और तिलहनी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया और जो फसलें कटने के लिए तैयार थी वह खेतों में ही सड़ गयी या फिर पूरी पैदावार नही मिल सकी।"

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