बेमौसम चुपके से आई बाढ़ में सैकड़ों गांवों की खुशियां डूब गईं, पीड़ित बोले- नहीं मिला संभलने का मौका

घाघरा में पानी बढ़ेगा, लेकिन पूरा सैलाब आ जाएगा इसका ग्रामीणों को अंदाजा ही नहीं था, इसलिए जब उत्तराखंड से छोड़े गए पानी से नदियों से उफनाया पानी लोगों के घरों में घुसा तो वो सिर्फ किसी तरह अपनी जान बचा पाए।

Virendra SinghVirendra Singh   23 Oct 2021 2:07 PM GMT

बाराबंकी के रोहित सिंह रात में जब अपने घर में सोए थे तो उन्हें इस बात का बिल्कुल अनुमान नहीं था कि सुबह जब उनकी आंख खुलेगी तो कई फीट पानी उनके घरों में घुसा होगा। दिन चढ़ने के साथ पानी इतना चढ़ा की उन्हें परिवार के साथ घर छोड़ना पड़ा, जरुरी सामान लेकर सुरक्षित जगह खोजनी पड़ी।

रोहित का घर बाराबंकी जिले की सिरौली गौसरपुर तहसील के सरैया सुरजनपुर गांव में है। सुरजनपुर की तरह बाराबंकी की तीन तहसीलों के करीब 70 गांव इन दिनों पानी पानी हैं। हजारों की आबादी को अपना घर छोड़कर बांधों, दूरदराज के स्कूलों और दूसरों के घरों में रहना पड़ रहा है। 17-19 अक्टूबर के बीच यूपी में हुई अतिवृष्टि हुई थी। 14 से 20 अक्टूबर के बीच यूपी में सामान्य की 6.4 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 58.4 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य से 814 फीसदी ज्यादा है। इसके अलावा उत्तराखंड के बैराजों से छोड़े गए करीब 7 लाख क्यूसेक पानी के चलते उत्तर प्रदेश में आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में सैलाब आ गया है। यूपी के सिंचाई मंत्री कह चुके हैं शारदा और घाघरा में इतना पानी 90 साल बाद छोड़ा गया है।

उत्तराखंड के बैराजों से छोड़े गए करीब 7 लाख क्यूसेक पानी के चलते उत्तर प्रदेश में आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में सैलाब आ गया है।

नाव पर सिलेंडर लेकर बाढ़ से बाहर निकल रहे रोहित सिंह गांव कनेक्शन को बताते हैं, "इस बार की बाढ़ तो अचानक आई है। रात में सब लोग सो रहे थे सुबह देखा घरों में पानी घुस रहा है, चारों तरफ पानी ही पानी है।

रोहित के मुताबिक इस तरह सैलाब आने से लोगों का भारी नुकसान हुआ है। वो कहते हैं, "खेतों में धान कटा पड़ा था, वह सब घाघरा नदी के बहाव में बह गया है। घरों में जो अनाज रखा था वह भी पानी में बर्बाद हो गया है। सबसे बड़ी दिक्कत तो कि यूं तो चारों तरफ पानी ही पानी है, लेकिन पीने के लिए पानी के लिए बहुत दूर से लाना पड़ता है।"

उत्तराखंड के बनबसा बैराज से पहले दिन 18 अक्टूबर को करीब 5 लाख 44 हजार पानी पहली बार में छोड़ा गया था। जिसके बाद लखीमपुर, पीलीभीत, सीतापुर और बाराबंकी समेत कई जिलों में अलर्ट किया गया। शारदा, घाघरा नदी के किनारे बसे लोगों को दूर ले जाने की कवायद शुरू हुई। सैकड़ों गांवों के लोगों ने घर छोड़े भी लेकिन बहुत सारे लोगों तक न सूचना पहुंचा न उन्हें अनुमान था कि इतनी बाढ़ आएगी। क्योंकि बारिश होने पर नदी में पानी बढ़ने के वो आदी हो चुके हैं। लेकिन इस जिस तेजी से पानी गांवों में घुसा लोग हैरान हैं।


बाराबंकी के हेमतापुर इलाके में घाघरा हर मानसून सीजन में नुकसान करती है लेकिन, उस वक्त ज्यादातर ग्रामीण इसके लिए तैयार होते हैं, लेकिन बार नदी ने उन्हें चौंका दिया।

मदरहा ग्राम पंचायत के तकिया पुरवा में रहने वाली खालू निशा (60 वर्ष) और उनके आसपास सभी छप्पर और पक्के मकानों में कई मीटर पानी है। उनका घर नदी की उप धारा से करीब 500 मीटर दूर था। शुक्रवार को पानी इतना ज्यादा हो गया था कि वो अपना थोड़ा बहुत सामान नाव पर लेकर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बंधे पर आ गईं। वो कहती हैं, "पूरे जीवन में ई तनकी (ऐसी) बाढ़ नहीं आई रहे।"

बाढ़ में घर में रखा सामान तो गया है कि खेतों में जो फसल लगी थी वो भी पूरी तरह बर्बाद हो गई। ज्यादातर ग्रामीण अब खाली हाथ हैं। रामनगर तहसील के सुंदर नगर गांव का ज्यादातर हिस्सा जलमग्न है। 25 साल की शांति देवी देवी अपने बुजुर्ग और बीमार पिता को लिए बंधे पर एक तिरपाल के सहारे रह रही हैं। चारपाई पर लेटे ससुर को परिवार के लोग दिलासा दे रहे हैं कि जल्द उनका इलाज होगा और वो ठीक हो जाएंगे।

"किसी तरह जान बचाकर बंधे पर रह रही हूं। 4 दिन से पिताजी की तबीयत बहुत खराब है। सांस लेने में दिक्कत हो रही है ना कुछ खा रहे हैं ना कुछ पी रहे हैं। बंधे पर डॉक्टर साहब आए थे 2 गोलियां दी थी वही खिलाई हैं। डॉक्टर साहब ने कहां है इन्हें शहर ले जाकर दिखाइए कैसे ले जाएं जब दो रुपया नहीं है।" इतना कहते हुए शांति देवी की आंखों में आंसू छलक आते हैं।


सुंदर नगर घाघरा नदी और उससे कुछ दूरी पर बाहरी इलाकों को बाढ़ से बचने के लिए बनाए गए बांध के बीच बसा है। शांति को इस विभीषिका से खुद भी निपटना है, अपने बच्चों, 55 वर्षीय मां रानी और 60 वर्षीय पिता बच्चू लाल को भी बचाना है।

शांति देवी कहती हैं, "हमारा एक भाई दिल्ली में मजदूरी करता है उसे संदेशा भिजवाया है वह घर आ रहा है जब घर आएगा तब पिताजी का शायद इलाज शुरू हो सकें।"

बाराबंकी की तीन तहसील सिरौलीगौसपुर ,रामसनेहीघाट और रामनगर बाढ़ की चपेट में है और इन तीनों तहसीलों के लगभग 120 गांव जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन के मुताबिक 27000 आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। 4000 परिवारों को गांव से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर बनाया गया है। सरयू (घाघरा) नदी की क्षमता 4.5 लाख क्यूसेक तक है, लेकिन उत्तराखंड के बनबसा बांध से कुल 700000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी ने विकराल रूप धारण किया है।

22 अक्टूबर को जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद प्रदेश के जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कहा कि सरकार हर तरह से बाढ़ पीड़ितों की मदद करेगी। उन्होंने ये भी कहा कि 90 साल बाद ऐसा हुआ है जब घाघरा में इतना पानी छोड़ा गया है।

राहत और बचाव कार्य जारी हैं लेकिन कई गांवों में ग्रामीणों ने मदद न पहुंचाने का आरोप लगाया है।

यूपी के अवध क्षेत्र में बाढ़ के हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलों के प्रभारी मंत्रियों के अलावा सीनियर मंत्रियों को प्रभावित इलाकों के दौरा और राहत और बचाव कार्य पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने पीलीभीत और सीतापुर का दौरा कर बाढ़ पीड़ितों से उनका दर्द जाना है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को लखनऊ में एक समीक्षा बैठक में कहा था कि उनकी सरकार हर तरह से पीड़ितों की मदद और पुनर्वास करेगी।

बाराबंकी के जिलाधिकारी डॉ. आदर्श सिंह और सीडीओ एकता सिंह लगातार प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं। राहत और बचाव कार्य जारी हैं लेकिन कई गांवों में ग्रामीणों ने मदद न पहुंचाने का आरोप लगाया है।

सुंदर नगर की नाजिया बानो के मुताबिक उनके घर में पानी भर गया है, दूसरे के दरवाजे पर रह रही हैं। उनके मुताबिक उन्हें अभी तक सरकारी की तरफ से कोई राहत नहीं मिली है। साइन तकिया के जब्बन (40 वर्ष) भी कहते हैं, "उनका गांव नदी के किनारे हैं वहां कभी कोई अधिकारी नहीं जाता है।" कई ग्रामीणों ने इलाके में मिट्टी का तेल (केरोसिन) नहीं बांटे जाने का आरोप लगाया।

बाढ़ प्रभावित ज्यादातर गांवों के लिए इसलिए भी परेशान हैं क्योंकि उन्हें फसल से जो उम्मीद थी वो टूट गई है। रामनगर तहसील के ही लालपुरवा गांव के रहने वाले रमेश (40 वर्ष) की धान की फसल बर्बाद हो गई है। इससे पहले जून के महीने में जल्दी बाढ़ आने से उनकी मेंथा की फसल डूब गई थी।

रमेश कहते हैं, "आने वाले समय में हमें नहीं लगता है कि हम कोई और फसल उगा पाएंगे, क्योंकि इतना पानी भरा है की गेहूं, सरसों जैसी फसलें होने के समय तब तक हमारे खेतों में जलभराव ही बना रहेगा। खेती के अलावा हम लोगों के पास कोई और आय का जरिया नहीं है।"

यूपी सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में पहले आई बाढ़ से हुए किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए शुक्रवार को 77 करोड़ 88 लाख 96 हजार 748 रुपए की राशि जारी की है। इससे बाराबंकी समेत 35 जिलों के 235122 किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। मौजूदा बाढ़ और बारिश के आंकलन के निर्देश जारी किए गए हैं।

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