मुंडका आग हादसा: प्रदर्शनकारियों ने सीएम केजरीवाल के आवास तक निकाला मार्च, जबकि अभी भी अपनों की तलाश में भटक रहे हैं परिजन

फैक्ट्रियों में आग की दुर्घटनाओं से निपटने में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों के एक वर्ग ने 20 मई को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फैक्ट्रियों में लगातार आग लगने की घटनाएं दर्शाती हैं कि श्रम कानूनों और औद्योगिक सुरक्षा नियमों का घोर उल्लंघन है। इस बीच, 29 लापता वर्कर्स के परिजन अपने प्रियजनों की तलाश में भटक रहे हैं।

Rohit KumarRohit Kumar   21 May 2022 7:19 AM GMT

मुंडका, नई दिल्ली। देश की राजधानी के मुंडका इलाके में इलेक्ट्रॉनिक सामानों की चार मंजिला फैक्ट्री में आग लगने के एक हफ्ते बाद, जिसमें कम से कम 27 श्रमिकों की मौत हो गई, दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने 20 मई को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास तक एक विरोध मार्च निकाला।

भाकपा-माले के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने विरोध मार्च का एक वीडियो साझा किया और कहा कि यह मार्च श्रम और औद्योगिक सुरक्षा नियमों के घोर उल्लंघन के खिलाफ है।

मजदूरों का विरोध मार्च सीएम केजरीवाल के उन लोगों से मिलने के दो दिन बाद आया है, जिन्होंने जलती हुई फैक्ट्री के अंदर फंसे लोगों को बचाने में मदद की थी।

मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात के बाद कहा, "ऐसे नायक साबित करते हैं कि कैसे दिल्लीवासी सभी उतार-चढ़ाव के दौरान एक परिवार के रूप में एक साथ खड़े होते हैं। हम सभी को एकजुट रहना होगा और हमेशा एक-दूसरे की मदद करनी होगी और मिलकर काम करना होगा।"

इस बीच भाकपा-माले ने केंद्र और राज्य की सरकारों पर मजदूरों की पीड़ा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

ट्विटर पर पोस्ट किया, "...राज्य और केंद्र दोनों सरकारें श्रमिकों की पीड़ा को नजरअंदाज कर रही हैं और इसके बजाय कॉरपोरेट्स को श्रमिकों (एसआईसी) का शोषण करने के लिए खुली छूट दे रही हैं।"

'याद करें या शोक मनाएं'

इस बीच, मुंडका पुलिस स्टेशन द्वारा 16 मई को जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, कुल 29 व्यक्ति लापता हैं और उनके पीड़ित परिजन अपने प्रियजनों को खोजने के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं, जिनमें से कई लोग तो परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।

"सात दिन हो गए, अभी भी मेरी 22 साल की बेटी मोनिका का कोई पता नहीं है। अगर वह मर गई है, तो कम से कम मुझे उसकी लाश दे दो। मैं अस्पतालों में दौड़ रही हूं, वे कह रहे हैं कि वह यहां नहीं है? फिर वो कहां पर है? आसमान खा गया कि धरती निगल गई, मेरी बेटी को लाकर दें। अपनी आंखों से अपनी बेटी को देखना है, कुछ पता नहीं चल पा रहा है। मुझे यह भी नहीं पता कि उसे याद करना है या शोक करना है, "विजय लक्ष्मी ने गाँव कनेक्शन को बताया।

लक्ष्मी के बगल में खड़े उसके पति ने कहा कि डॉक्टरों ने उसके बेटे के डीएनए के नमूने इकट्ठा किए हैं, ताकि उसका कारखाने के अंदर मिले शवों से मिलान किया जा सके। मोनिका के पिता विजय बहादुर ने गाँव कनेक्शन को बताया, "डीएनए टेस्ट चल रहा है और हम नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।"

इक्कीस वर्षीय पूजा भी लापता लोगों में से एक है।

"पूजा दीदी इस परिवार में अकेले कमाने वाली थी। उसकी कमाई हमारे परिवार के लिए आजीविका का एकमात्र जरिया थी, जिसमें मेरी छोटी बहन और मेरी माँ शामिल हैं। उन्होंने मुश्किल से दो-तीन महीने पहले कारखाने में काम शुरू किया था। वो हमें बताती थी कि हमें आगे क्या करना है। हमें लाश की पहचान करने के लिए मुर्दाघर ले जाया गया, लेकिन वे इतनी बुरी तरह से जले हुए हैं कि पहचान में नहीं आ रहे हैं कि मेरी दीदी उनमें से हैं या नहीं, "लापता पूजा की 19 वर्षीय बहन मोनी ने गाँव कनेक्शन को बताया। .

लापता पूजा की छोटी बहन मोनी।

उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री मोदी और सीएम केजरीवाल से हमारी मदद करने की अपील करती हूं वरना हम भी बच पाएंगे। मैं आगे पढ़ना चाहती हूं लेकिन मेरे घर में कमाई का कोई जरिया नहीं है।"

पेशे से पेंटर अकबर की भी ऐसी ही परेशानी है। फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिलने के बाद से ही वह अपनी पत्नी मुसरत की तलाश कर रहे हैं।

अकबर ने कहा, "मुझे अभी तक उसकी लाश नहीं मिली.. लोगों के काले, जले हुए शवों को देखना एक दैनिक आघात है और आश्चर्य होता है कि क्या यह मेरी पत्नी है। शव इतनी बुरी तरह से जले हुए हैं कि कोई भी उन्हें देखकर अपनों की पहचान नहीं कर सकता है।"

अब तक 27 मृतक श्रमिकों में से आठ की पहचान कर ली गई है।

इस बीच, कई परिजनों और जिंदा बचे लोगों ने गाँव कनेक्शन से बात की, उन्होंने दावा किया कि लापता व्यक्तियों की वास्तविक संख्या आधिकारिक संख्या से कहीं अधिक है।

अपनी जान बचाने के लिए रस्सी का उपयोग करके कारखाने की तीसरी मंजिल से नीचे उतरने के बाद, आग लगने से 10 दिन पहले कारखाने में शामिल हुईं ममता ने कहा कि जब वह बिल्डिंग से बाहर आईं तो 100 से अधिक लोग बिल्डिंग में फंस गए थे।


"लंच के बाद, फोरमैन ने हमें तीसरी मंजिल पर एक मीटिंग के लिए इकट्ठा होने के लिए कहा। अचानक, शाम लगभग 4 बजे, भगदड़ मच गई और लोगों ने कांच की खिड़कियां तोड़नी शुरू कर दीं। तब मुझे पता चला कि बिल्डिंग में आग लगी है। जलती हुई दुकान के अंदर कम से कम 100 लोग थे, जब मैं उससे बाहर निकली, उनमें से मुश्किल से 30-35 लोग बच पाए होंगे, "ममता ने बताया।

बिना परमिशन चल रही थी फैक्ट्री : फायर डिपार्टमेंट

जब गाँव कनेक्शन ने दिल्ली अग्निशमन सेवा के निदेशक से संपर्क किया, तो पता चला कि कारखाने ने कभी भी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए आवेदन नहीं किया था।

"जब भी डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) या एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) जैसा कोई प्राधिकरण अग्निशमन विभाग से अनुमोदन के लिए बिल्डिंग का मैप प्रस्तुत करता है, तो हम अग्नि सुरक्षा उपायों और डिजाइन के आधार पर एनओसी देते हैं। दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल गर्ग ने गाँव कनेक्शन को बताया कि मुंडका में फैक्ट्री के मामले में ऐसी कोई ड्राइंग हमें मंजूरी के लिए नहीं भेजी गई थी।

साथ ही मुंडका थाने के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मुंडका थाने के सब-इंस्पेक्टर सुनील भारद्वाज ने बताया, "हमने बिल्डिंग के मालिक मनीष लाकड़ा और फैक्ट्री के मालिक हरीश गोयल और वरुण गोयल को भी गिरफ्तार किया है।"

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