बदलते मौसम में कुछ बातों का ध्यान रखकर रबी की फसल बचा सकते हैं किसान

भारी बारिश के बाद बदलते मौसम में रबी की सरसों, गेहूं, मटर के साथ ही शिमला मिर्च, गोभी जैसी फसलों में कई तरह की बीमारियां लगने लगती हैं, ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखकर किसान नुकसान से बच सकते हैं।

Divendra SinghDivendra Singh   17 Nov 2020 5:00 AM GMT

कई राज्यों में बारिश के साथ ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान हो गया, खरीफ की फसलों की कटाई के बाद रबी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों की बुवाई थोड़ी पिछड़ सकती है तो गोभी, मिर्च, टमाटर जैसी सब्जियों की खेती का भी नुकसान हुआ है। ऐसे में किसान कुछ उपाय अपनाकर फसलों को खराब होने से बचा सकते हैं।

रविवार 15 नवंबर और 16 नवंबर को पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि भी हुई। स्काईमेट के अनुसार आने वाले दिनों में भी अभी बारिश के साथ ओलावृष्टि हो सकती है।

फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. आईके कुशवाहा बताते हैं, "अभी जो बारिश हुई है और मौसम विभाग ने अगले एक-दो दिनों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है, इस बारिश से कुछ फसलों को तो फायदा हुआ तो कुछ फसलों का नुकसान भी हुआ है। अगर सब्जियों की फसलों की बात करें तो अभी गोभी और शिमला मिर्च को विशेष रुप से नुकसान पहुंचा है।"

अगर गेहूं की बात करें किसान पलेवा किया है तो बारिश की वजह से गेहूं की बुवाई में और देरी हो जाएगी और अगर गेहूं बुवाई में देरी होती है तो देरी से बुवाई होने वाली किस्मों का ही चुनाव करें। अगर किसानों ने गेहूं की बुवाई पहले से कर दी है और अंकुरण हो गया है तो ये बारिश खेती के लिए फायदेमंद है।


कई जगह पर अभी भी धान की कटाई चल रही है और किसान धान काटकर खेत में छोड़ देते हैं। अगर धान की जो फसल खेत में पड़ी है उसकी गुणवत्ता खराब हो जाएगी, इसलिए अच्छी तरह से धान को सुखा लें, जिससे धान टूटे नहीं, क्योंकि ऐसे में धान का अच्छा रेट नहीं मिल पाता है।

जिस खेत में ओले गिरे हैं और जलभराव नहीं है, उस खेत में ठंडक आ गई है, ठंडक आने ने फसल में गलन की समस्या शुरू हो जाती है। ऐसे खेतों में सल्फर (80%-डब्ल्यूडीजी) तीन ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर खेत में छिड़काव करते हैं तो जमीन में थोड़ी सी गर्मी आ जाती है। सल्फर का छिड़काव भी कर सकते हैं।

अगर शिमला मिर्च की बात करें तो जमीन में लगातार नमी और ठंडक से फंफूद लगने लगते हैं, तो मेटालेक्जिल दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर देंगे तो एक तो गलन पूरी तरह से रुक जाएगी। इसलिए अगर जमीन में गर्मी बढ़ानी है तो सल्फर का प्रयोग करें।

चने में उकठा और जड़ गलन जैसी समस्या आती है, ऐसे में एक कार्बेंडाजिम दो ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। ये छिड़काव सुबह-शाम को नहीं करना है, छिड़काव दोपहर में ही करना चाहिए, क्योंकि दोपहर में धूप निकल आती है।


मटर की फसल में भूरी रंग की फंफूदी की समस्या बढ़ जाती है। इसके लिए सल्फर (80%-डब्ल्यूडीजी) को दोपहर के समय दो-तीन ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

आलू की फसल में अचानक मौसम के बदलाव से नुकसान हो जाता है, ऐसे में किसान भाई सल्फर का छिड़काव कर दें। इसके साथ ही आलू की फसल में गलन की समस्या बढ़ जाती है, इसलिए इसमें भी मेटालेक्जिल दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर देंगे तो एक तो गलन पूरी तरह से रुक जाएगी।

आलू की फसल में झुलसा की भी समस्या आती है, इसलिए झुलसा से बचाव के लिए किसान भाईयों के पास समय है। इसलिए ट्राईकोडर्मा का प्रयोग करें।

अभी प्याज की नर्सरी में समस्या आ जाती है, तो इसमें गलन की समस्या आ सकती है। इसलिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड एक फंफूदी नाशक रसायन होता है, उसका छिड़काव करें।

इस समय खेत में दो तरह का गन्ना लगा हुआ है, एक पुरानी फसल है और दूसरी फसल जिसकी बुवाई सितम्बर में हुई होगी। पुरानी फसल तेज हवा और बारिश से गिर गयी तो उसे बांधकर रखें। बारिश गन्ने के लिए फायदेमंद ही होता है।

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