एक ही पंचायत के दो गांवों तक पहुंचने के लिए जान को जोखिम में डालना पड़ता है

Ankit ChauhanAnkit Chauhan   13 Sep 2019 12:11 PM GMT

मोडासा (गुजरात)। ये एक ही पंचायत के दो गाँव हैं, लेकिन एक गाँव से दूसरे जाने के लिए ग्रामीण या तो 15 किमी लंबे रास्ते से जाएं, या फिर पानी भरे नाले को पार करके गाँव जाएं।

गुजरात के अरावली जिले के मोडासा तहसील के डॉक्टर कंपा और मुलोज गाँव के बीच में यह एक नदी का नाला, जो लोगों की मुसीबत बनकर हर साल खड़ा हो जाता है, जिसकी वजह से लोग काफी परेशान होते हैं। इस रास्ते से करीबन 10 गाँव के लोग हर दिन आते-जाते रहते हैं, और कई गाड़ियां भी यहीं से निकलती हैं। जो बेहद जोखिम साबित हो सकता है।

डॉक्टर कंपा गांव है जिनकी तमाम कागजी कार्यवाही मुलोज ग्राम पंचायत से होती है। अगर इसी गाँव के किसी भी लोगों को कुछ काम है चाहे वह ग्राम पंचायत का हो या फिर दूसरे गांव के लिए जाना है तो यह नाला किसी भी हाल में पार करना जरूरी बन जाता है। क्योंकि इसके वाला अलावा छोटा रास्ता कोई और नहीं है। अगर भारी बारिश होती है तो यहां से जाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन बन जाता है।


अगर दूसरा रास्ते का चयन करते हैं तो करीबन 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, या कहो कि 15 किलोमीटर घूम के जाना पड़ता है जिसकी वजह से समय और पैसे का दुरुपयोग होता है। लोग तो किसी भी तरह से घुटनों तक पानी में चले जाते हैं पर पशुओं का हाल काफी बेकार बेहाल है क्योंकि अगर पशु जाते हैं तो कभी-कभी मौत भी हो जाती है एक पशु बेचारा जिंदगी का रास्ता पार करते हुए हुए जिंदगी से हार गया।

डॉक्टर कंपा के रहने वाले धर्मेन्द्र भाई कहते हैं, "हम लगभग 60 साल से रहते हैं और हमारा खेती का व्यवसाय है। हमारे गाँव के पास यह एक नाला है जहा बारिश में काफी पानी आ जाता है, जिसके कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इतना ही नहीं जान को जोख़िम में डालकर जाना पड़ता है। जब भी एक या डेढ़ इंच बारिश होती है तब हमारी यह समस्या और बढ़ जाती है। हमारा कोई भी काम हो तो हमें मुलोज गाँव में जाना पड़ता है ओर हमें यह नाला किसी भी हाल में पार करना पड़ता है। आसपास में करीबन 25 गांव है जो लोग यहां से ही निकले हैं, क्योंकि यहां से जाना आसान होता है। स्थानीय लोगों की अगर मानें तो , करीबन यहां आजादी के बाद से यहां पर ही बसेरा करते हैं और तब से लेकर अब तक यही हाल है।

नाले के उस तरफ का गाँव मूलोज गाँव के प्रवीण भाई कहते हैं, "35 साल पहले यहां यहां पर रास्ता बनने का काम तो शुरू हुआ पर मेटल बिछा दी कंक्रीट डाली और उसके बाद न जाने कौन सी मजबूरी आ गई कि रास्ता ही बंद कर दिया। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी स्थिति वैसी की वैसी है। बच्चे, बूढ़े, बुजुर्ग कोई भी व्यक्ति हो अब आदत से मजबूर हो गए हैं, यहां तक कि अगर कोई बीमार हो गया बच्चे को स्कूल जाना है तो यही एक रास्ता है जो पार करना बेहद जरुरी बन जाता है।"

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