अलीगढ़ : आलू के गढ़ में स्ट्रॉबेरी की खेती

Gyanesh SharmaGyanesh Sharma   27 March 2019 12:27 PM GMT

ज्ञानेश शर्मा, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के जिलों में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरु हो गई है। पिछले वर्ष के मुकाबले रकबा भी तेजी से बढ़ा है। अलीगढ़ में आलू जैसी नगदी फसल उगाने वाले कई किसान भी स्ट्रॉबेरी उगाने लगे हैं।

अलीगढ़ जनपद मुख्यालय से करीब 38 किलोमीटर दूर अतरौली ब्लॉक के गांव शेरपुर में प्रगतिशील किसान विपिन और श्याम कुमार इन बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की खेती की है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा भी होने की उम्मीद है।

अतरौली के रायपुर स्टेशन के निकट गांव नगला शेरपुर के तीन किसान भाईयों विपिन कुमार, श्याम कुमार, विनीत कुमार मिलकर खेती करते हैं। ये किसान भाई अपने खेतों में नए प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। विपिन कुमार बताते हैं, " कुछ समय पहले संभल जिले में इस फसल के बारे में सुना था। फिर इसकी पूरी जानकारी लेने के लिए हम तीनों भाई पुणे गए। वहां से फसल की बारीकी जुटाई और फिर नर्सरी लाकर इस बार करीब 8 एकड़ में खेती की है।"


पिछले उत्तर प्रदेश के राजभवन में हुई शाकभाजी प्रदर्शनी में भी उनके खेत की स्ट्राबेरी रखी गई थी। यहां मिले जिले के उद्यान अधिकारी एनके सहानिया ने बताया कि अलीगढ़ में कई किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरु की है। ऐसे किसानों को प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ड्रिप लगाने के लिए अनुदान दिया गया है। इन किसानों को हो रहे मुनाफे को देखते हुए उम्मीद है अगले वर्ष कई दूसरे किसान भी इसकी खेती करेंगे।'

विपिन कुमार के खेतों में स्ट्रॉबेरी को देखने के लिए पिछले दिनों खाद्य एवं प्रसंस्करण विभाग के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग, मुख्य विकास अधिकारी दिनेश चंद के साथ गांव शेरपुर पहुंचे थे। उन्होंने किसान को हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिया था।

विपिन ने खेत में बैड पर स्ट्रॉबेरी लगाई थी, जबकि बीच में लहसुन बोया था। उन्होंने बताया कि लहसुन के साथ सहफसली खेती से फायदा ये मिलता है कि स्ट्रॉबेरी के पौधे रोग से बचे रहते हैं। विपिन अपनी फसल को दिल्ली की आजादपुर मंडी भेजते हैं।

गांव में मिल रहा 40 बेरोजगारों को रोजगार

विपिन कुमार ने बताया कि प्रतिदिन करीब 20 से 40 मजदूरों की जरूरत होती है। फल तोड़ने से लेकर छंटाई व डिब्बा पैकिंग का काम चलता है। साथ ही पौधा से जो पत्ते टूटकर गिरते हैं उन्हें भी तत्काल उठाया जाता है। ताकि खेत में सफाई रहे जिससे कि फल भी साफ टूटे। इसमें विंटर, स्टार विंटर व प्लेटिना प्रजाति के पौधे लगाए गए हैं। गांव के ही महिला पुरुषों को घर के घर ही लगातार काम करने से रोजगार भी मिल रहा है। साथ ही पानी की बचत होती है। पिछले दिनों किसान के खेत पर पहुंचे प्रमुख सचिव ने किसान से चार पैकेट स्ट्रॉबेरी के लिए एक हजार रुपए दिए थे।

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