बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के बच्चों की जिंदगी बदल रही शिक्षिका, राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी किया गया है सम्मानित

Mohit ShuklaMohit Shukla   24 Sep 2019 6:17 AM GMT

सीतापुर (उत्तर प्रदेश)। "हर रोज सुबह होते ही हम इंतजार करने लगते हैं कि कब आठ बजे मैम आये और हमको पढ़ाएं। क्योंकि मैम हम बच्चों के लिए नए-नए खिलौने लेकर आती हैं। छुट्टी के समय पर हम लोगों को मूवी दिखाने ले जाती हैं, "पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली रोहिणी बताती हैं।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद बाढ़ प्रभावित लहरपुर ब्लॉक के पिड्डूरिया गाँव के प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका रुचि अग्रवाल ने सीरत सूरत दोनों ही बदल कर रख दिया। शिक्षिका रुचि बताती हैं, "साल 2016 में विद्यालय में प्रधानाध्यपिका का कार्यभार संभाला था। उस समय विद्यालय में छात्र संख्या महज 15 से 20 होगी। हम ने गाँव मे घर-घर जाकर के बहुत मेहनत की आज हमारे विद्यालय में 192 छात्र-छात्राएं हैं।"


वो आगे बताते हैं, "जिन बच्चों को ककहरा नहीं आता था। आज वो बच्चे इग्लिश की कमांड समझते हैं। शिक्षा के साथ साथ बच्चों को बाहरी दुनिया से रूबरू कराने के लिए समय समय पर बच्चों को मूवी दिखाने के लिए थियेटर ले जाते हैं। पार्क भी घुमाने ले जाते हैं। आज स्कूल के सभी बच्चे यूनिफार्म में आते हैं। उनको सुबह प्रार्थना के समय में गायत्री मंत्र का उच्चारण कराया जाता है। इसके बाद ही कक्षा में प्रवेश कराया जाता है। बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए समय समय पर मूल्यांकन किया जाता है। जो बच्चा पढ़ने में अच्छा होता है उसको कक्षा का मॉनीटर बनाते है।जिस से कक्षा में दूसरे बच्चे भी प्रेरित होकर खूब पढ़ाई करें।"

अपनी तनख्वाह का पांच प्रतिशत खर्च करती हैं बच्चों पर

शिक्षिका रुचि अग्रवाल बताती हैं, "अपने वेतन का पांच फीसद हिस्से से स्कूल में बच्चों के खेल का सामान, खिलौने लाना। बच्चों को पिकनिक पर ले जाना, स्कूल के जरूरी सामान लेकर आना। इन सब कार्यों पर खर्च करती हूं। यहीं कारण है कि गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस पर पुलिस लाइन में होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेकर बच्चे जिले में प्रथम स्थान पर आते हैं।"


राज्य शिक्षक पुरुस्कार से नवाजी जा चुकी हैं रुचि अग्रवाल

शिक्षक दिवस के अवसर पर अभी हाल ही में गाजरी इलाके के इस दुगर्म क्षेत्र के विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए रुचि अग्रवाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य शिक्षक पुरूस्कार से नवाजा था। पुरुस्कार में मिलने वाली धनराशि को रुचि ने बच्चों के पढ़ाई के लिए एलईडी टीवी पर खर्च कर दिया।

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