क्या आपने कभी किसी लड़की या महिला को पंचर बनाते हुए देखा है

अशोक दायमा

कम्युनिटी जर्नलिस्ट

झाबुआ (मध्य प्रदेश)। क्या आपने कभी किसी महिला या लड़की को पंचर बनाते हुए देखा है ? शायद आपका जवाब ना ही होगा, लेकिन मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में जब एक महिला को उसके पति ने पागल कहकर छोड़ दिया तो उसने हिम्मत नहीं हारी और पेट पालने के लिए पंचर की दुकान खोल ली।

झाबुआ जिला मुख्यालय से लगभग 15 किमी दूर रामा ब्लॉक के गांव पालेड़ा में 19 वर्षीय पूजा परमार ने जब पंचर की दुकान खोली तो पड़ोसी और घर वालों ने खूब ताने मारे। लेकिन पुरुषों के कहे जाने वाले काम को पूजा न सिर्फ अच्छे से कर रही हैं, उसी की कमाई से अपने माता-पिता सहित परिवार के पांच सदस्यों का खर्च भी उठा रही हैं।

अपने बारे में पूजा कहती हैं "घर में गरीबी के कारण पांचवीं से आगे नहीं पढ़ पायी। कम उम्र में ही शादी हो गयी थी। ससुराल गयी तो पति कहने लगा कि तुम्हे खाना बनाने नहीं आता, तुम पागल हो, और यह कहकर उसने मुझे छोड़ दिया।"

पूजा साइकिल से लेकर ट्रक के टायरों तक का पंचर बना लेती हैं। कई बार तो उस सड़क से गुजरने वाले लोग उनका यह काम देखने लगते हैं और उनकी दृढ़ता को सलामी करते हैं। आसपास के जो लोग पहले उनका मजाक उड़ाते थे वे लोग भी अब पूजा की हिम्मत की दाद देते हैं।

यह भी पढ़ें- हजार बछड़ों की मां: जर्मनी की इरीना ब्रूनिंग कैसे बन गईं सुदेवी दासी

ये काम कैसे शुरू किया के बारे में पूजा कहती हैं "जब घर आयी तब घर में बूढ़े मां-बाप को देखा। वे अब कुछ कर नहीं सकते। ज्यादा पढ़ी-लिखी भी नहीं थी। दूसरा कोई काम आता नहीं था इसलिए पंचर की दुकार खोल ली। इससे अब रोज 200 से 500 रुपए तक की कमाई हो जाती है। गाड़ी कोई भी हो, सबका टायर खोल और फिट कर सकती हूं।"

पूजा अब उन लोगों को लिए मिसाल बन गयी हैं जो मुश्किलों के सामने घुटने टेक दिया करते हैं।

Share it
Top