ब्रोकली, सलाद जैसी विदेशी सब्जियों की जैविक खेती करता है ये युवा किसान

सीतापुर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के सीतापुर के युवा किसान नंदू पांडे शिमला मिर्च समेत विदेशी सब्जियों की खेती से मुनाफा कमा रहे हैं। उनके खेतों में शंख के आकार वाली विशेष ब्रोकली है तो कई तरह की विदेशी सलादें साथ ही शिमला मिर्च की हरी, लाल, पीली और कई तरह की किस्मों की खेती हो रही है।

सीतापुर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित गोंदलामऊ ब्लॉक के गोपालपुर पश्चिमी में यूपी का सबसे बड़ा करीब एक हेक्टेयर का पॉली हाउस है, जहां वो संरक्षित खेती करते हैं। इस पॉलीहाउस में चार तरह की शिमला मिर्च उग रही हैं।

नंदू पांडेय (35 वर्ष) के मुताबिक, उनके फार्म पर शिमला मिर्च समेत सभी तरह की सब्जियां जैविक तरीके से उगाई जाती हैं। सब्जियों की खेती में जिले से लेकर प्रदेश स्तर पर अब तक कई जगह अवॉर्ड जीत चुके नंदू सिर्फ आठवीं पास हैं, अधूरी पढ़ाई को उन्होंने अपने अनुभव से दूर कर दिया है।


नंदू बताते हैं, "दस साल पहले मैं भी गन्ना, गेहूं और अरहर की खेती करता था। इसी बीच जानकारी होने पर सिर्फ दो बीघे (आधा एकड़ से कम) खेत में शिमला मिर्च लगाई। जिसमें 8 हजार की लागत आई, जबकि उपज 35 हजार की हुई थी, यानि परंपरागत फसलों की अपेक्षा कई गुना ज्यादा मुनाफा हुआ, जिसके बाद मैंने बड़े स्तर पर शिमला मिर्च की खेती शुरू की।"

नंदू के पास आज 68 लाख की लागत वाला एक हेक्टेयर खेत में पॉली हाउस है। इस लागत में करीब 28 लाख रुपए सरकार से उन्हें सब्सिडी के रूप में मिले हैं। इस पॉली हाउस में वो बेमौसम वाली सब्जियां उगाते हैं।

कभी 100 रुपए को तरसते थे आज करोड़ों में टर्नओवर

युवा किसान नंदू बताते हैं, 17-18 साल पहले हम 100 रुपए की नोट को देखने के लिए तरसते थे, लेकिन आज ईश्वर की कृपा से उन्नत खेती की बदौलत साल में एक करोड़ तक का टर्नओवर हो जाता है। मेरा खुद का कारोबार चल ही रहा है, गाँव के दर्जनों लोगों को रोजगार दे रखा है।"


शिमला मिर्च की खेती का गणित

इजराइल की तर्ज पर भारत में संरक्षित (पॉली हाउस और ग्रीन हाउस) खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है। ये फसलें मौसम से प्रभावित नहीं होती, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है। नंदू बताते हैं, "मुझे एक हेक्टयर में शिमला मिर्च की खेती में करीब 1 लाख की लागत (पॉली हाउस को छोड़कर) आती है, जबकि भाव अच्छा मिल जाए तो तीन लाख से साढ़े तीन लाख का उत्पादन हो जाता है।"नंदू के मुताबिक लाल शिमला मिर्च 80 रुपए किलो तो पीली 90 और सफेद वाली 50 जबकि हरी शिमला मिर्च के उन्हें 40 रुपए किलो का भाव मिलता है। ये रेट उनके खेत का है जहां से कारोबारी खुद आकार ले जाते हैं।


14 रंग की शिमला मिर्च उगाने की तैयारी

देश में बढ़ते मॉल कल्चर और लोगों की सेहत के प्रति जागरुकता से देश में विदेशी सब्जियों (एग्जाटिक वेजिटेबल) की मांग बढ़ रही है। जागरूक किसान इस मांग का फायदा उठा रहे हैं। नंदू बताते हैं, "मेरी कोशिश है विदेशों की तरह सभी 14 तरह की शिमला मिर्च की खेती अपने फार्म में करूं।"

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विदेशी सलाद और ब्रोकली में फायदा

नंदू के फार्म पर कई जिलों के किसान और कृषि कारोबार से जुड़े लोग भी पहुंचते रहे हैं। फार्म पर पहुंचे उनके मित्र विश्व विजय सिंह बताते हैं, "एक विशेष तरह की ब्रोकली (शंख के आकार वाली) जो उन्होंने चार साल पहले लंदन में खाई थी, उसे यहां देखा है।"नंदू बताते हैं, "इस ब्रोकली के बीज वो नेपाल से लेकर आए थे, इस मौसम में ये 150 रुपए प्रति पीस तक बिकी है। 16-17 फरवरी को यूपी के राजभवन में हुई शाक भाजी प्रदर्शनी में भी ये ब्रोकली लोगों का ध्यान खींच रही थी।"

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