शहीदों के बच्चों के लिए रिटायर्ड कर्नल ने शुरू की डेयरी

Diti BajpaiDiti Bajpai   17 May 2019 6:24 AM GMT

विकासनगर (देहरादून)। शहीदों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके इसके लिए 80 वर्षीय कर्नल विजय दुग्गल ने स्कूल तो शुरू किया ही साथ ही बच्चों को शुद्व दूध और उससे बने उत्पाद मिल सके इसके लिए कुछ वर्ष पहले डेयरी की शुरूआत की। इस डेयरी के जरिए रोजाना 70 बच्चों को अच्छी गुणवत्ता का दूध मिल पा रहा है।

कर्नल दुग्गल की डेयरी देहरादून जिले से करीब 45 किमी दूर विकासनगर तहसील में उनके शुरू किए स्कूल में ही बनी हुई हैं। कर्नल बताते हैं, ''मैं 1989 में आर्मी से रिटायर होकर आया और 1990 में मैंने यह स्कूल शुरू किया। जब हम एक लड़ाई के लिए श्रीलंका जा रहे था तब मैंने जवानों से कहा था कि मैं मर गया तो तुम मेरे परिवार का ध्यान रखना अगर तुम में से कोई मरा सारी उम्र में ख्याल रखूंगा। तब से यह करवा शुरू हुआ।''


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अपनी बात को जारी रखते हुए कर्नल बताते हैं, ''हमारी डेयरी में कितना दूध होता है हम यह कभी गिनती नहीं करते हैं क्योकि हमने इसको व्यवसायिक स्तर पर नहीं पाला है इनको मैं अपना परिवार समझता हूं यह सब हमारे लिए बेटियों की तरह है। मुझे इनसे बहुत लगाव है। डेयरी में जो भी दूध होता है उसको बच्चों को दिया जाता है दूध के साथ दही, पनीर, खीर भी बच्चों को दिया जाता है। सेल नहीं करते हैं।

डेयरी में सभी गायों को विजय दुग्गल अपने बेटे बटियों की तरह मानते हैं। वह कहते हैं, ''मेरे पास 15 गर्ल्स (गाय) और 4 बॉयज (बछड़े) है। शुरू में राजस्थान से दो बछिया खरीदी एक का नाम चांदनी रखा दूसरा का नाम तारा रखा। इन्हीं दोनो से कहानी आगे बढ़ी और आज परिवार बहुत बड़ा हो गया है धीरे-धीरे और आगे बढ़ेगा।'' विजय दुग्गल ने बताया।

स्कूल में शहीदों के बच्चों की आने की प्रक्रिया के बारे में विजय बताते हैं, ''आर्मी हेडक्वाटर हमे सीधे शहीदों के बच्चे भेजता है। उग्रावादियों के साथ मुठभेड़ में जो ज़वान शहीद होते है उनके बच्चे यहां आते है। हम हर साल उनको 25 सीटें को देते है। अभी हमारे पास शहीदों के 70 बच्चे है। इन बच्चों के लिए स्कूल में सारी सुविधाएं है।


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रिटायरी गायों का भी रखते हैं ख्याल

ज्यादातर लोग गाय के दूध न देने पर उनको छुट्टा छोड़ देते है लेकिन कर्नल की डेयरी जो पैदा होती है वह मर के ही वहां से जाती है। ''डेयरी में जितनी गाय है वो सभी हमारे परिवार का हिस्सा है। हमारे यहां बछड़ा पैदा हो या बछिया मर के ही जाता है। रिटायरी को भी हम उतना ही खाना देते हैं जितना दूध देने वाली गाय को।'' कर्नल ने अपनी डेयरी को दिखाते हुए बताया।

उपकरणों के साथ डेयरी में लगा है एफएम रेडियो

गायों को गर्मी न लगे इसके लिए कर्नल ने पंखे के साथ कूलर की व्यवस्था की है। इसके साथ गायों को गाना सुनाने के लिए डेयरी में एफएम रेडियो भी लगाया है।


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बछिया पैदा करने वाले सीमन का कर रहे प्रयोग

कर्नल बताते हैं, ''पशुपालन विभाग से जब से हमने बछिया पैदा करने वाला सीमन लिया है तब से हमारे यहां बछिया की संख्या ज्यादा बढ़ी है। इससे काफी लाभ भी हुआ है। इस सीमन से जो भी बछिया पैदा होती है उसके दूध देने की क्षमता अधिक होती है साथ ही वह काफी स्वस्थ भी होती हे।'' उत्तराखंड के ऋषिकेश जिले के श्यामपुर में पहली प्रयोगशाला खोली गई है जिसमें सैक्स सोर्टेड सीमेन की डोज तैयार भी की जा रही है, जिससे सिर्फ बछिया ही पैदा होती है। इस सीमन को देश के कई राज्यों में भेजा जा रहा है।

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