सूखे और बाढ़ से बचना है तो लगाएं पेड़

आज हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या पानी की है, कई गाँव में ये हाल है कि जिस पानी को हम कपड़े धोने के लिए भी इस्तेमाल नहीं करेंगे उसे पीने को मजबूर हैं। सूखा और बाढ़ में पेड़-पौधों का कितना महत्व है, इस बारे में जीजिविषा सोसायटी की वेलफेयर एक्टिविस्ट मंजरी उपाध्याय।

मंजरी उपाध्याय बताती हैं, "सूखे से लेकर बाढ़ तक का कारण पेड़ों की अंधाधुंध कटाई है। अगर कटाई का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में पानी के लिए हम तरस जाएंगे। पेड़ के कटने से प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है की सांस लेना दूभर हो गया है।"

अमेरिका के हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में प्रदुषण के कारण भारत में लगभग 12 लाख लोगों की मौत हुई थी। स्ट्रोक, मधुमेह, दिल का दौरा, फेफड़े के कैंसर या फेफड़े की पुरानी बीमारियों से पूरी दुनिया में करीब 50 लाख लोगों की मौत हुई।


मंजरी उपाध्याय आगे बताती हैं, "सड़कें बनाने के लिए पेड़ के पेड़ काट दिए जाते हैं, लेकिन उसके स्थान पर दूसरे पेड़ नहीं लगाए जाते। जब पेड़ होते हैं किसी एरिया में तो वो उस जगह की मिट्टी को बांध के रखते हैं। ''

अब पेड़ नहीं लगाया तो आगे सांस भी नहीं ले पाएंगे

बड़े-बड़े इंडस्ट्रियल एरियाज में देखें तो पाएंगे की सबसे बड़ी समस्या सांस लेने की है नौबत ये आ गयी है की अब हम बिना मास्क लगाये घर से नहीं निकल सकते।

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मंजरी उपाध्याय आगे बतातीं है की जब भी हम देखते हैं कि कहीं पानी ज्यादा हो रहा है तो पेड़ तो पेड़ अगर हम घास भी अच्छी बिछा दे किसी एरिया में और 1000 लीटर या 2000 लीटर पानी भी डाल दें तो हम देखेंगे सुबह से शाम के बीच वो पानी रिचार्ज हो चुका रहता है।


अगर साफ़ हवा में सांस लेनी है तो पहला पेड़ इसलिए लगाएं

वायु प्रदुषण का स्तर देखते हुए अगर अभी पेड़ नहीं लगाया गया तो हम हज़ारों बीमारियों से घिर सकते हैं जैसे ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी इत्यादि इस बारे में मंजरी उपाध्याय बताती हैं, ''हर पत्ती हर पेड़ अपने आप में एक कूलर और एसी का काम करता है। अर्टिफिशिअल एसी तो हम यूज़ कर ही रहें हैं साथ में एक पेड़ भी लगा लें।

सबसे अच्छे पेड़ कौन से होते हैं ? इस बारे में वो बताती हैं, "सभी पेड़ अच्छे होते है लेकिन जो लॉन्ग टर्म तक रहते हैं और ऑक्सीजन के अच्छे रिसोर्स होते हैं वो पीपल, बरगद, पाकड़, गूलर, नीम और महुआ होता है।

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