काली मिर्च की जैविक खेती : एक एकड़ से सालाना पचास लाख तक की कमाई

Divendra SinghDivendra Singh   27 Aug 2019 6:17 AM GMT

कोंडागाँव (छत्तीसगढ़)। अभी तक यही माना जाता रहा है कि काली मिर्च की खेती सिर्फ दक्षिण भारत में होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कोंडागाँव के किसान न केवल काली मिर्च की खेती कर रहे हैं। बल्कि अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के कोंडागाँव के चिकिलपुट्टी गाँव में कई सौ एकड़ में फैले जंगल में साल और ऑस्ट्रेलियन टीक के पेड़ों पर काली मिर्च के झाड़ दिख जाएंगे। ये है डॉ. राजाराम त्रिपाठी का मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म, जहां पर जैविक तरीके से औषधीय फसलों की खेती होती है।

मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म के अनुराग त्रिपाठी बस्तर में काली मिर्च की खेती के बारे में बताते हैं, "पहले कहा जाता था कि केरल (दक्षिण भारत) में इसकी खेती हो सकती है, बस्तर में नहीं हो सकती है, क्योंकि यहां क्लाइमेटिक कंडीशन अलग है। लेकिन मैं दिखाना चाहूंगा, केरल में हो सकता है तो यहां क्यों नहीं हो सकता है।"


काली मिर्च के पौधे का मूल स्थान दक्षिण भारत ही माना जाता है। भारत से बाहर इंडोनेशिया, बोर्नियो, चीन, मलय, लंका और स्याम जैसे देशों में भी इसकी खेती की जाती है। विश्वप्रसिद्ध भारतीय गरम मसाले में, ऐतिहासिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से, काली मिर्च का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है।


वो आगे कहते हैं, "हमारे यहां एक एकड़ में जो ऑस्ट्रेलियन टीक का जो पेड़ देख रहे हैं, ये पूरा एक एकड़ है, एक एकड़ में ऑस्ट्रेलियन टीक के सात सौ पौधे लगते हैं। जो पूरी तरह से इमारती लकड़ियों में प्रयोग होता है, और इसके साथ हमने, काली मिर्च का भी पौधा लगाया है।"

काली मिर्च के पौधे की पत्तियां आयताकार होती है। इसकी पत्तियों की लम्बाई 12 से 18 सेंटीमीटर की होती है और 5 से 10 सेंटीमीटर की चौड़ाई होती है। इसकी जड़ उथली हुई होती हैं। इसके पौधे की जड़ दो मीटर की गहराई में होती है। इस पर सफेद रंग के फूल निकलते हैं।


काली मिर्च के उत्पादन के बारे में अनुराग त्रिपाठी ने आगे कहा, " काली मिर्च का प्रोडक्शन जिस तरह से आप देख रहे हैं। एक पौधे में, प्रति वर्ष अगर एक गुच्छा दस ग्राम, का भी हम लें, और इनकी जो हाइट है, वो चालीस फीट एक औसत होती है। वैसे साठ-सत्तर फीट तक के होते हैं। अगर चालीस फीट भी अगर हम औसत लेते हैं, एक किसान की नजर से तो चालीस फीट में जो रेडियस है, एक से डेढ़ फीट का, इसमें लगभग साठ-सत्तर गुच्छे लगते हैं।"

"पचास का भी अगर हम गुच्छे ले सकते हैं, तो चालीस फीट में अगर आप गौर करें एक फीट का रेडियस है, एक फीट में हमको, लगभग पांच सौ ग्राम का प्रोडक्शन मिलेगा। इसके साथ अगर चालीस फीट आ गया तो चालीस फीट में कितना हमें प्रोडक्शन मिला। लगभग बीस किलो में एक मानक दर है। अगर एक औसत हम लें, पांच सौ रुपए, तो भी हमको एक झाड़ से दस हजार रुपए की आमदनी हो सकती है। और किसान को इसमें बहुत ज्यादा मेहनत की भी आवश्यकता नहीं है, "अनुराग त्रिपाठी ने आगे कहा।


काली मिर्च की खेती में खाद की भी जरूरत नहीं पड़ती है, पेड़ से जो पत्तियां गिरती हैं, वही खाद बनाने का काम करती हैं।

कई सारे पेड़ों के साथ हो सकती है काली मिर्च की खेती

अनुराग त्रिपाठी आगे कहते हैं, "हमारे जंगलों को बचाने के लिए हम पूरे शाल के झाड़ पर काली मिर्च लगा सकते हैं। इसके साथ मैं एक और चीज बताना चाहूंगा, जितनी भी खुरदरी सतह वाले हैं। यूकेलिप्टस को छोड़कर, उसके अलावा सभी खुरदरी सतह वाले, पेड़ों पर लगा सकते हैं, टीक में भी लगा सकते हैं, आम में, कटहल में, और इसके अलावा, जितने हमारे जंगली पौधे हैं। जो कहते हैं जंगल में होते हैं, उन सभी पौधों पर हम, आराम से लगा सकते हैं, अच्छी खेती प्राप्त कर सकते हैं।"

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें

अनुराग त्रिपाठी

कोंडागाँव, छत्तीसगढ़

9406358025, 7000719042

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