मध्य प्रदेश में केले की फसल बर्बाद कर रहा सीएमवी वायरस

पुष्पेंद्र वैद्य, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

बुरहानपुर (मध्य प्रदेश)। केला की खेती करने वाले किसान इस समय सीएमवी वायरस से परेशान हो रहे हैं, शुरू में एक दो पौधों में वायरस का असर दिखा अब पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो रही है। इस वायरस के कारण किसान अपनी केले की फसल को उखाड़ कर फेंक रहे हैं।

किसान विट्ठल नारायण पाटिल बताते हैं, "आठ हजार पौधे लगाने में अब तक खाद-पानी सब मिलाकर ढ़ाई लाख रुपए खर्च हो गए। एक महीने से लगातार बारिश हो रही है, सूरज की रौशनी न मिलने पर ये रोग तेजी से फैलता है। हम सभी किसान पिछले दस-पंद्रह साल से जैन कंपनी की जी9 वैराइटी के पौध लगाते हैं, अब तक कोई शिकायत नहीं होती है, दो-चार पौधे खराब हो जाते थे। इतनी ज्यादा मात्रा में जो रोग फैला था वो कभी नहीं दिखा था, अगर बीमा कंपनी सर्वे करके कुछ करती है तभी किसान को कुछ राहत मिलेगी।"

वहीं मामले की जांच करने के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। ऐसे में किसान मांग कर रहे है कि उन्हें फसल बीमा के अंतर्गत बीमा दिया जाए नहीं तो आंदोलन किया जाएगा। । किसान इससे बचने के लिए महंगे कीटनाशक दवाइयों की स्प्रे कर रहे हैं। बुरहानपुर के किसानों का कहना है कि हमने 14 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से जैन टिश्यू कल्चर का पौधा लिया था। हम पिछले 15 सालों से इसी कंपनी के पौधों को बोते आ रहे हैं। इस साल इस पौधे पर सबसे अधिक वायरस अटैक हो रहा है। इससे हमें लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। इसके बावजूद अभी तक कोई ना कोई उद्यानिकी अधिकारी जाँच के लिए पहुंचा है और ना ही जैन टिशू कल्चर के अधिकारी।


लगातार बारिश और बदले मौसम के कारण केला फसल में वायरस का आक्रमण देखा गया है। कृषि विज्ञान केंद्र, बुरहानपुर के वैज्ञानिक डॉ अजीत सिंह बताते हैं, "पूरे देश मे जहां भी केले की खेती होती है, वहां पर कई तरह के वायरस का अटैक होता है। इस तरह के वायरस का अटैक बहुत कॉमन है, हर साल ये समस्या आती ही है। इसका सही प्रबंधन करके ही इसे रोका जा सकता है लेकिन अगर जहां ये पूरी तरह से एकबार आ गया तो इसे रोकना मुश्किल हो जाता है। लेकिन अगर आप सचेत हैं तो इससे फसल को बचाया जा सकता है।"

वो आगे कहते हैं, "इससे बचाव का सबसे सही उपाय है कि जहां से भी पौधे लें वायरस से ग्रसित न हों, अगर एक भी पौधे में वायरस का प्रकोप हुआ तो सारी फसल बर्बाद हो जाती है।"

किसान भूषण पाटिल कहते हैं, "मैंने एक एकड़ में दस हजार पौधे लगाए हैं, हालत ये हो गई है कि तीन हजार के करीब फसल में सीएमवी वायरस लग गया है, अगर और भी वायरस बढ़ा तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। हमने जैन कंपनी से इसलिए पौधे लिए थे कि इसके पौधे वायरस मुक्त रहते हैं। पौध खरीद से लेकर दवाई-खाद को मिलाकर दस हजार पौधों में मेरी दस हजार की लागत आ गई थी। अभी तो रोग ग्रस्त पौधे उखाड़कर फेक दिए हैं, अगर वायरस फैलने से नहीं रुका तो पूरा खेत उखाड़कर फेकना पड़ेगा।"

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