किसान नहीं कर पा रहे हैं खेतों की सिंचाई, पंद्रह साल से बंद पड़ा है नलकूप

अंजनी मिश्रा, कम्‍युनिटी जर्नलिस्‍ट

अमेठी (यूपी)। देश में सरकार खेती किसानी को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं बहुत से सरकारी नलकूप खराब पड़े हुए हैं। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए बारिश का इंतजार करना पड़ रहा है या वे निजी संसाधन से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। ऐसे में उनका आर्थिक बजट बिगड़ रहा है।

मामला अमेठी जिले के जामो विकास खंड क्षेत्र के कटारी गांव का है। यहां पर सन् 1974 में राजकीय नलकूप स्थापित किया गया था। नलकूप आने से किसानों को खेती करने बहुत आसानी हो गई थी। लेकिन बीते 15 साल से यह नलकूप खराब हुआ पड़ा है। बोरिंग फेल होने से इस क्षेत्र के लगभग सौ एकड़ भूमि की सिंचाई बाधित हो रही है। इसके चलते किसानों को परेशानी के साथ ही निजी संसाधनों से सिंचाई करने में आर्थिक चपत भी लग रही है।

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स्‍थानीय किसान बब्लू तिवारी ने बताया कि यहां लगभग 44 साल पहले नलकूप स्थापित किया गया था। आसपास के कई गांवों की सिंचाई व्यवस्था इसी नलकूप पर निर्भर थी। लेकिन बीते 15 साल से यह नलकूप खराब पड़ा हुआ है। इससे संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई लेकिन मामला संज्ञान में नहीं लिया गया।


स्‍थानीय ग्रामीण नफीस कादरी ने बताया कि कई बार अधि‍कारियों से इसकी शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसका परिणाम यह निकला कि यहां की सिंचाई व्यवस्था निजी नलकूपों के हवाले हो गई। इससे किसानों को कई प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मंहगाई के दौर में सिंचाई करना किसानों को भारी पड़ रहा है।

अधिशासी अभियंता नलकूप खंड अमेठी जयप्रकाश ने कहा कि यह एमजी 22 का नलकूप है और इसका निर्माण कार्य 1974 में हुआ था। किसी भी राजकीय नलकूप की लाइफ 17 साल होती है, उस हिसाब से यह दोगुना चला है। हालांकि इस मामले की जानकारी जेई और एसडीओ को दी गई है। एक पंप लगाकर देखेंगे अगर पानी का स्तर बढ़ जाता है तो अच्छी बात है, नहीं तो हम लोग जल्द ही सांसद नीधि या सरकार से प्रयास करेंगे कि इस नलकूप को रिबोर कराया जाए।

सरकारी आकड़ों की बात की जाए तो पूरे यूपी में कुल 33375 नलकूप स्‍थापित किए गए हैं। इनसे 2929000 हेक्‍टेयर खेत की सिंचाई की जाती है। वहीं अमेठी में 366 नलकूप हैं, जिनसे 33550 हेक्‍टेयर खेत की सिंचाई की जाती है।

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