चोर बाज़ार नाम से मशहूर पर चोर कहां हैं?

पुराने लखनऊ में स्थित ऐतिहासिक बाज़ार चोर बाज़ार नाम से मशहूर है लेकिन ना तो यहां बिकने वाला सामान चोरी का होता है न ही कोई चोर उसे बेचता है।

मोहम्मद फहद

लखनऊ। पुराने लखनऊ के नक्खास एरिया में हर रविवार को एक ऐतिहासिक बाज़ार लगता है। यहां सुई से लेकर सिलाई मशीन और बच्चों के खिलौनों से लेकर किताबें तक सब मिलता है। ये बाज़ार पूरी दुनिया में चोर बाज़ार नाम से मशहूर है। बाज़ार के व्यापारी बताते हैं-

"यहां चोरी का कोई सामान नहीं बिकता। ये बाज़ार हर हफ्ते लाखों का व्यापार करता है और कोई कैसे हर हफ्ते लाखों का माल चोरी कर एक जगह बेचने ला सकता है। हम लोग पूरा व्यवसाय ईमानदारी से करते हैं। ग्राहकों को बिल भी देते हैं।"

ये बाज़ार अंग्रेजों और नवाबों के वक़्त से लग रहा है। इसकी खासियत ये है कि जो सामान आपको कहीं नहीं मिलेगा वो यहां मिल जाएगा। पुरानी गाड़ियों के पुर्जे हों या नए-पुराने कपड़े, जूते, टीवी, फ्रिज, यहां ज़रूरत का हर सामान यहां मिलता है। साथ ही साथ आपको इस बाज़ार में एंटीक सामान भी मिलते हैं, जैसे पुराने सिक्के और नोट, मूर्तियां, पेंटिंग्स, वो किताबें भी जो दुनिया के किसी पुस्तकालय में नहीं मिलेंगी।

ये भी पढ़ें- पीओपी-सीमेंट नहीं, गुड़, बेल और उड़द की दाल से निखर रही लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों की रंगत

कुछ व्यापारियों ने ये भी बताया कि इस बाज़ार को नवाबों के वक़्त में गरीबों के लिए बसाया गया था क्योंकि दुकानों से काफी सस्ते दाम में यहां सामान मिल जाता है। बाज़ार की शोभा बढ़ाने हर हफ्ते यहां सैकड़ों आदमी आते हैं, चाहे अमीर हों या गरीब। चोर बाज़ार में शनिवार की देर रात से ही ग्राहकों का आना शुरू हो जाता है। कुछ ग्राहक ऐसे भी हैं जो कई सालों से इस बाज़ार में सामान खरीदने आ रहे है। उनका मानना है कि अगर आपको अपने मतलब का और काम का सामान चाहिए तो यहां जल्दी आना पड़ेगा। यही वजह है कि शनिवार रात से ही बाज़ार गुलज़ार हो जाता है।

Share it
Top