नए जमाने का किसान, सोशल मीडिया के जरिए अपने उत्पाद बेचता है 9वीं पास ये किसान

Arvind ShuklaArvind Shukla   30 July 2019 12:40 PM GMT

हिसार (हरियाणा)। खेती से मुनाफा कैसे कमाया जा सकता है? कैसे किसान अपने खेत की फसल को उत्पाद बनाकर अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं, ये समझना है तो हरियाणा के राजपाल सिंह श्योराण से मिलना चाहिए। राजपाल सिंह (60 वर्ष) दिल्ली से करीब 180 किलोमीटर दूर हरियाणा के हिसार जिले के कोथकला गांव में रहते हैं।

राजपाल अपने खेतों में उगे सरसों का तेल बेचते हैं, बाजरे और जौ के जैविक बिस्किट बनाते हैं और घर पर पली गाय और भैंस का घी बेचते हैं। उन्होंने अपनी चीजों की कीमत खुद तय की है। तेल 220 रुपए किलो तो घी 1200 से 2000 रुपए किलो तक है। राजपाल कहते हैं तो पहले आर्डर नहीं देता उसे मैं एक बूंद भी तेल या घी नहीं देता। वो अपने खुद के नाम से उत्पादों की ब्रांडिंग करते हैं और मुनाफा कमाते हैं। हालांकि हमेशा से ऐसा नहीं था, राजपाल दूसरे किसानों की तरह मंडियों में चक्कर लगाते थे।

"मैं पिछले पांच साल से जैविक खेती कर रहा हूं। दो साल पहले जैविक सरसों लेकर मंडी गया तो बेचना मुश्किल हो गया। रेट नहीं मिल पा रहा था। किसी तरह उसे बेचा। दूसरे साल सरसों लेकर मंडी नहीं गया, कोल्हू पर उसका तेल पिरवाया। सरसो बेचने की अपेक्षा कई गुना ज्यादा मुनाफा हुआ था।" राजपाल बताते हैं


"सरसों के तेल के साथ मैं जौ और बाजरे के बिस्किट बनाता हूं। सर्दियों में बाजरा और इन दिनों जौ के बिस्किट बेचता हूं। मैं दूध नहीं बेचता बल्कि मिट्टी की हडियों में पकाकर घी बेचता हूं। मुझे ये सब बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती। व्हाट्एसग्रुप, सोशल मीडिया और मित्र-रिश्तेदार ही सब ले जाते हैं।" राजपाल कहते हैं।

राजपाल हरियाणा के उस इलाके में रहते हैं, जहां बड़े पैमाने पर कपास की खेती होती है। कपास में ही भारी मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग होता है। रायायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रतिकूल खेत से लेकर लोगों की सेहत तक हर जगह दिखाई पड़ रही है। राजपाल बताते हैं, "पेस्टीसाइड वाली खेती ने हमारी जमीन और खेती को भारी नुकसान किया है। मैं लगातार लोगों से मिलता जुलता रहता हूं, आजकल हर आदमी किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त है। क्योंकि खाने में इतना जहर (कीटनाशक-रसायनिक खादें) मिली हैं। इसलिए मैंने जैविक खेती शुरु की। अपनी सोच बदली। मोटे अनाज और पारंपरिक खेती करने से कीटनाशकों के प्रयोग की जरुरत नहीं पड़ती।"

पेस्टीसाइड वाली खेती से तौबा करने के बाद राजपाल ने जैविक खेती शुरु की। और दो साल पहले अपने उत्पादों की मार्केटिंग भी शुरू की। उन्होंने अपनी खेती का जैविक प्रामाणीकरण कराया है तो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) का लाइसेंस भी लिया है। उम्र के इस पड़ाव में भी राजपाल लगातार कुछ नया सीखने में लगे रहते हैं, इन दिनों वो हिसार के चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय में प्रयोगधर्मी किसानों के लिए शुरु किए गए एग्री स्टार्टअप कोर्स में शामिल हो रहे हैं। इस कोर्स के लिए चुने गए वो अपने प्रदेश के 10 किसानों में से एक हैं।

किसानों के लिए कमाई की सलाह देते हए राजपाल सिंह कहते हैं, "अगर आपका उत्पाद शुद्ध है तो बाजार की दिक्कत नहीं होगी, किसान भाईयों को चाहिए अपने अच्छे उत्पादों को अपने तय किए रेट पर बेचें। अब कोई किसान भी मिलावट करेगा तो भी दंड का भागीदार होगा।"

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