नए कृषि कानून लागू नहीं तो उत्तर प्रदेश में मंडी के बाहर धान की खरीद किस कानून के तहत हो रही?

यूपी में धान की खरीद शुरु होते ही एक विवाद शुरू हो गया है। लखीमपुर में किसान नेताओं ने कहा कि देश में नए कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक लगी है, लेकिन यहां मंडी के बाहर MSP से काफी कम रेट पर धान खरीदा जा रहा है, जो APMC एक्ट का उल्लंघन है। इस मामले में यूपी में एक एफआईआर भी दर्ज की गई है। जानिए क्या है पूरा मुद्दा।

Arvind ShuklaArvind Shukla   14 Oct 2021 4:10 PM GMT

अलीगंज (लखीमपुर खीरी, यूपी)। "उत्तर प्रदेश में धान की खरीद-फरोख्त किस कानून के तहत हो रही है? जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है, इसका मतलब है कि देशभर में नए कृषि कानून लागू नहीं हैं। फिर यूपी में देश से बाहर है क्या?, अगर प्रदेश में मंडी एक्ट लागू है तो मंडी के बाहर प्राइवेट आदमी (व्यापारी) धान की खरीद कैसे कर रहा है?" किसान नेता धर्मेंद्र मलिक ने ये सवाल लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन और मंडी समिति के अधिकारियों के पूछा, जिसका कई घंटे बाद जवाब मिला। (पूरी कहानी वीडियो में देखिए)

किसानों से औने-पौने दामों पर धान खरीदने वाले अलीगंज कस्बे के एक निजी व्यापारी (फर्म) के खरीद केंद्र के बाहर धरने पर बैठे किसानों से लखीमपुर जिले में गोला तहसील के उपजिलाधिकारी अखिलेश यादव ने कहा, "जो लोग गलत तरीके से आढ़त का लाइसेंस लेकर मंडी के बाहर अपना धंधा चला रहे हैं। गैरकानूनी तरीके से काम कर रहे हैं। सभी के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। अगर वो मंडी के अंदर खरीद करेंगे तो उनका लाइसेंस रहेगा वर्ना बंद (रद्द) किया जाएगा।"

आगे बढ़ने से पहले आपको बता देते हैं कि लखीमपुर (Lakihmpur) के अलीगंज में ऐसा क्या हो रहा था, जिसके बाद नाराज किसानों ने प्रदर्शन किया, एक व्यापारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई और इस बात पर चर्चा शुरु हो गई कि यूपी में किस नियम कानून के तहत अनाज की खरीद फरोख्त होती है।

लखीमपुर खीरी में गोला तहसील के अलीगंज इलाके में रहने वाले किसान अजीत सिंह बताते हैं, "हमने कल अपना करीब 50 कुंटल धान 950 में रुपए में बेचा है। आज से 4 दिन पहले मैं गोला मंडी में गया था वहां बिक्री नहीं हुई थी फिर घर लेकर आया उसे साफ किया और पास में एक धान मिल है वहां 950 में बेचा। बेचा क्या समझिए कि फेंक आया हूं।"

अजीत सिंह अपने हाथ में पकड़ी हुई एक पर्ची दिखाते है, जिसमें बेचे गए धान के हिसाब के साथ नीचे लिखा था, जमीन के कागजात देने होंगे। किसान नेताओं के मुताबिक इस पर्ची पर जो लिखा है वो किसानों का दुर्भाग्य, सरकारी पैसे और योजनाओं का गड़बड़झाला और आंकड़ों की बाजीगरी है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी जो अलीगंज एक व्यापारी दुकान के बाहर दोपहर के बाद से धरने पर बैठे थे, इस पर्ची का मतलब समझाते हैं।

"ये किसान के नाम पर लूट है। वर्ना एक प्राइवेट व्यापारी या मिल मालिक धान बेचने पर जमीन के कागज (खसरा-खतौनी, आधार कार्ड) क्यों मांगेगा? दरअसल ये धान यहां से उठकर फिर सरकारी खरीद केंद्रों में जाएगा। ये व्यापारी और मिल मालिक जो किसान से 900-1200 में धान खरीद रहे हैं, किसान के पेपर दिखाकर सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य के 1940 रुपए का दाम लेंगे। ये एक बड़ा घोटाला है। ये किसानों से धान खरीद नहीं बल्कि धान की लूट है।" धर्मेंद्र मलिक कहते हैं।

किसानों के मुताबिक सुबह तब उन्होंने ये मुद्दा उठाया जो व्यापारी और अधिकारी दोनों ये कह रहे थे कि व्यापारी नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के तहत धान खरीद रहे हैं, (नए कृषि कानून सिर्फ पैन कार्ड के आधार पर किसी को कहीं भी किसी से भी कृषि उपज खरीद का हक देते हैं, लेकिन नए कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाया है।" लेकिन जब हमने आदेश की कॉपी मांगी और ये कहा कि क्या सुप्रीम कोर्ट का आदेश यूपी में लागू नहीं है। जिसके बाद इस व्यापारी पर कार्रवाई हुई है।

इस मामले में दिनभर गहमागहमी चली। धरने पर बैठे किसानों के बीच पहुंचे एसडीएम गोला अखिलेश यादव ने कहा, "जो लोग गलत तरीके से आढ़त का लाइसेंस लेकर बाहर (मंडी) अपना धंधा चला रहे हैं। काम कर रहे हैं। गैर कानूनी रूप से धंधा चला रहे हैं। सभी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वो मंडी के अंडर काम करेंगे वर्ना उनके लाइसेंस बंद (रद्द) किए आएंगे।"

एसडीएम ने मौके पर मौजूद किसानों से बताया कि मंडी के बाहर खरीद करने वाले व्यापारी/फर्म डीएस ट्रेडर्स के खिलाफ कोतवाली गोला में मंडी सचिव की तरफ से तहरीर दी गई है। इसके अलावा व्यापारी ने जो मंडी के बाहर खरीदकर मंडी शुल्क नहीं चुकाया है उसका शमन भी करेंगे।

इस कार्रवाई का मतलब था कि उत्तर प्रदेश में एपीएमसी एक्ट (APMC) के तहत यानी मंडी कानून के तहत की कृषि उपज कानूनी है। गांव कनेक्शन ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग के कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार निदेशालय के निदेशक से बात की। यूपी कृषि उपज की खरीद किस एक्ट के तहत के तहत रही है, इस सवाल के जवाब में कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार निदेशालय के निदेशक डॉ. सुग्रीव शुक्ला ने कहा, "नए कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्थिति यथावत है। जब नए कृष कानून आए थे उस दौरान शासनादेश जारी हुआ था, स्थगन के बाद कोई आदेश जारी नहीं हुआ। स्थिति यथावत है। मंडी एक्ट के तहत अगर मंडी की फिजिकल बाउंड्री के अंदर खरीद होगी तो मंडी शुल्क देना होगा। मंडी के बाहर खरीद पर कोई टैक्स नहीं है। जो बाहर खरीदते हैं वो खरीदते रहें।"

किसानों से औने-पौने दाम पर खरीद और जमीन के कागजात मांगने वाले लखीमपुर में अलीगंज के एक व्यापारी पर दर्ज FIR

इस मामले में कोतवाली गोला में रात को ही भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक डीएस ट्रेडर्स ने वर्ष 2019-20 से अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है और फर्म द्वार धोखे से कारोबार किया जा रहा था।

यूपी में खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट के मुताबिक 14 अक्टूबर तक प्रदेश में एमएसपी (1940 और 1960 रुपए प्रति कुंटल) की दर से 505 किसानों से 2183.681000 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। प्रदेश में अब तक 1424998 किसानों ने आवेदन किया है। जिसमें से 1298367 किसानों का सत्यापन हो चुका है। प्रदेश में सरकार ने पहले दौर में फिलहाल 1711 खरीद केंद्र संचालित हैं। खरीफ विपणन सीजन के लिए यूपी सरकार ने 77 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है।

खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट के आंकड़े।

उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में 1 अक्टूबर से धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू हुई है, उनमें लखीमपुर खीरी भी है। लेकिन 12 अक्टूबर तक जिले में ज्यादातर केंद्रों पर खरीद जीरो थी। (उदाहरण के लिए पलिया मंडी के दो केंद्रों में भी 13 अक्टूबर खरीद शून्य थी।) जिसकी लिए सरकारी अधिकारी ने दो वजह बताईं, एक धान में नमी की मात्रा निर्धारित 17 फीसदी से कहीं ज्यादा है दूसरा जिले में धान मिलर्स से धान कुटाई को लेकर समझौता नहीं हो पाया है। इस संबंध में जिलाधिकारी ने रात में धान खरीद को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें कहा गया कि किसानों से शिकायत न मिले, खरीद शुरू कराई जाए।

इससे पहले अलीगंज में हंगामा बढ़ने पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मिल और व्यापारियों को धान बेचने आए किसानों से कहा था कि वो अपने ट्रैक्टर ट्राली लेकर गोला की नवीन गल्ला एवं फल मंडी में वहीं पर सभी किसानों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिए ऑनलाइन टोकन कराएंगे और 1940 रुपए का दाम दिलाएंगे।

गांव कनेक्शन को गोला मंडी में मिले गोला तहसील में लखरावा के किसान मोहम्मद शमीम (60 वर्ष) के पास 60 एकड़ धान है। वो अपना 4 ट्राली करीब 200 कुंटल धान खुले बाजार में बेच चुके थे। एक ट्राली (करीब 50 कुंटल) लेकर दोबारा एक मिल में गए थे, दौरान विवाद हो गया।

मो. शमीम गांव कनेक्शन को बताते हैं, "सरकारी खरीद शुरू नहीं हो रही है। किसान को तो पैसा चाहिए। इसलिए धान मिल वाले को बेच रहे थे। वहां दो शर्ते होती हैं। अगर नगद पैसा चाहिए चो 900-1100 रुपए कुंटल का रेट मिलेगा अगर एक दो महीना रुक सकते हैं मिल वाले 1200 के आसपास रेट दे देंगे। लेकिन उसके लिए कागजात (खसरा खतौनी आधार) देना होता है।"

13 अक्टूबर को लखीमपुर के अलीगंज कस्बे में एक व्यापारी के खरीद सेंटर के बाहर धरने पर बैठे किसान।

कई किसानों ने गांव कनेक्शन को बताया कि जब मिल मालिक या व्यापारी किसान से पेपर पर खरीद करते हैं तो उसका मतलब होता है, "अगर वो 100 कुंटल धान किसी व्यापारी या धान मिल को देते हैं, और वो एक लाख 20 हजार रुपए का होता है तो 1.20 लाख रुपए का ही पेमेंट होगा लेकिन ये पैसा सरकार की तरफ से भेजा जाएगा। बस जो हम 100 कुंटल धान देते है वो आंकड़ों में 55-60 कुंटल दिखाया जाएगा।

किसान नेता दिगंबर सिंह कहते हैं, "दरअसल ये लोग न सिर्फ मिलीभगत कर किसानों को लूट रहे हैं बल्कि सरकार को भी अंधेरे में रख रहे हैं। सरकार को लगता है कि धान किसानों से खरीदा जा रहा है लेकिन वहां सिर्फ नंबर बढ़ते हैं किसान को उसका फायदा नहीं मिलता है।"

गांव कनेक्शन ने साल 2020 में भी धान की खरीद का मुद्दा उठाया था

वीडियो- मो. सलमान, रिपोर्टिंग सहयोग मोहित शुक्ला



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