यूपी:लखीमपुर में जमीन से निकल रही आग, देखिए वीडियो

Mohit ShuklaMohit Shukla   22 Jun 2019 11:14 AM GMT

लखीमपुर (उत्तर प्रदेश) यूपी के लखीमपुर में अचनाक 6 दिन से जमीन में दहक रही आग से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में डर बना हुआ है। वही आग का दायरा बढ़ने न पाये इसके लिए जेसीबी से तहसील प्रशासन ने आग के चारो तरफ खुदाई करवा दी है।

आग देखने वालों का लग रहा तांता...

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद से करीब 50 किलोमीटर दूर मोहमदी तहसील के दुल्हापुर निकट जमुनिया घाट पर करीब 5 बीघा जमीन में आग के शोले दहक रहे है। इस वजह से वहां की जमीन एक दम मुलायम व भूरभूरी हो गई है। जिसको देखने के लिए रोजाना हजारों लोग आ रहे हैं।



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वही इसको लेकर के स्थानीय पर्यवारण चिंतक मनदीप सिंह बताते है कि यहां की जमीन अधिक दलदली थी जो कि करीब 15 साल से सूखी पड़ी हई है, इस मिट्टी के नीचे जलकुंभी व अन्य खरपतवार के अवशेष शायद दबे हुए हैं जिसके कारण मौसम के बढ़ते तापमान से आग लग होगी या किसी ने जलाया होगा। इस सब बातों का मुख्य कारण है कि लखीमपुर जिले में सब से ज़्यादा किसान साठा धान की खेती करते हैं जोकि साठा धान पर्यावरण की दृष्टि से बहुत ही खतरनाक है। साठा धान का पौधा बहुत पानी खींचता है। आज लखीमपुर में जहां 60 से 70 फिट में पानी निकलता था वहीं किसान लोग 100 से 150 फिट गहरी बोरिंग कर रहे हैं।

ऑर्गेनिक पदार्थों के कारण उठ रहा धुंआ...

लखनऊ विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. ध्रुवसेन सिंह के अनुसार,'वहां कोई पानी का क्षेत्र होगा, जो सूख गया है। इसीलिए वहां पर ऑर्गेनिक पदार्थों के कारण धुंआ उठ रहा है। यह तापमान का भी असर है। अधिकतम तापमान के कारण यह ज्वलनशील बना है।

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झाड़ और कचरा के कारण लगी आग...

यह आग प्राकृतिक कारण से नहीं लगी है। किसी ने पहले कहीं चिंगारी फेंकी होगी, जो धीरे-धीरे सुलगता रहा। वहां की सारी चीजें बिल्कुल सूखी हुई होंगी। इस कारण आग बढ़ती चली जा रही है। हालांकि इससे जमीन को कोई नुकसान नहीं है। जमीन बंजर होने जैसी कोई बात नहीं है।

साठा यूके लिप्ट्स की रोपाई पर लगे रोक...

स्थानीय निवाशी व गोमती नदी बचाओ अभियान के पदाधिकारी प्रशांत मिश्रा ने बताया कि हमारे लखीमपुर खीरी जनपद में साठा धान व यूके लिप्ट्स की बहुत रोपाई की जाती है। जिसके चलते यहां की उपजाऊ जमीन बंजर होती जा रही है। नदियों का जलस्तर दिन पर दिन घटता जा रहा है। अगर समय रहते ही इसपर ध्यान आकर्षण नहीं किया गया तो ऐसी ही घटनाएं दिन पर दिन सुनने को मिलेगी और आने वाले एक दो सालों के अंदर लखीमपुर खीरी भी मराठवाड़ा बन जायेगा।


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