हार्वेस्टिंग फार्मर नेटवर्क ऐप: मोबाइल में एक क्लिक पर बेचिए अपनी फसल, और भी हैं कई फायदे

हार्वेस्टिंग फार्मर नेटवर्क नामक इस ऐप को अमेरिका में इंजीनियर रहे रुचित गर्ग ने शुरु किया है। इस ऐप के माध्यम से किसानों को फसल में रोग लगने से लेकर उत्पाद बेचने तक की जानकारी और सुविधा मुफ्त में मिलती है। गांव कनेक्शन ने रुचिग गर्ग से इस बारे में खास बात की।

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   20 Sep 2019 4:55 AM GMT

अमेरिका में पैसे तो कमा रहा था लेकिन मेरा दिल भारत में था। मैं देश के किसानों के लिए कुछ करना चाहता था। ये ऐप किसानों की कई मुश्किलों को आसान कर रहा है। - रुचित गर्ग, संस्थापक, हार्वेस्टिंग फार्मर नेटवर्क

किसानों की खेती-किसानी से जुड़ी हर मुश्किल अब एक मोबाइल ऐप दूर कर सकेगा। देश के कई किसान इस ऐप का फायदा भी उठा चुके हैं। 'हार्वेस्टिंग फार्मर नेटवर्क' नाम से ये मोबाइल ऐप किसानों से जुड़ी हर समस्या का समाधान एक ही मंच पर दे रहा है यानि फसल की बुवाई से लेकर उसे बेचने तक।

पेशे से इंजीनियर और के संस्थापक रुचित गर्ग 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "असम के एक किसान ने हमारे ऐप पर अनानास की तस्वीर पोस्ट की और कहा कि उन्हें इसका खरीदार नहीं मिल रहा है। मैंने जैसे वह फोटो देखी तो उसके बारे में पता किया। सर्च करने पर पता चला कि यह तो बेहद खास प्रजाति का अनानास है।"

रुचित ने बताया, "मैंने अपने चंडीगढ़ में अपने परिचितों को उस अनानास के बारे में बताया और लोग उसे खरीदने को तैयार हो गये। तब मैंने उस किसान को फोन पर ऑर्डर दिया। पहले ट्रक और फिर प्लेन से लगभग 2500 किमी. दूर सफर कर अनानास हम तक पहुंचा। किसान ने मैसेज भेजकर हमें शुक्रिया बोला।"

रुचित गर्ग के मुताबिक ये ऐप इतना आसान है कि किसान इसे आसानी से चला सकते हैं। फोटो- साभार

फसल की पैदावार ज्यादा हो या कम, किसान अपनी मेहनत की सही कीमत पाने के लिए हमेशा संघर्ष करता है। कई बार फसल अच्छी होती है तो रोग या कीट उसे बर्बाद कर देते हैं। ऐसे में किसानों के लिए 'हार्वेस्टिंग फार्मर नेटवर्क' मोबाइल ऐप काफी मददगार साबित हो सकता है।

रुचित बताते हैं, "आप इस ऐप के माध्यम से अपनी फसल बेच और खरीद भी सकते हैं। इसके अलावा कोई भी खेती से जुड़ा औजार यहां लिस्ट करा सकते हैं या किसी किसान भाई को जरूरत है तो खरीद भी सकता है।"

किसान इस ऐप के माध्यम से फसल या मवेशी की फोटो डालकर उसकी बीमारी और उपचार का पता भी लगा सकते हैं। इस बारे में रुचित कहते हैं, "हमारे ऐप से बड़ी संख्या में किसान और वैज्ञानिक भी जुड़े हैं। जब भी कोई किसान अपनी परेशानी बताता है कि कई बार दूसरे किसान ही उसकी मदद करते हैं। मामला ज्यादा गंभीर होता है तो समय-समय पर वैज्ञानिक भी सलाह देते हैं।"

मोबाइल ऐप के संस्थापक रुचित कहते हैं कि कई बार जब फसल अच्छी होती है तो किसानों की मुनाफा बिचौलियों के हिस्से चला जाता है। ऐसे में हमारे ऐप से किसानों को इस समस्या से भी छुटकारा मिलेगी। कोई भी किसान ऐप के माध्यम से अपनी फसल को लिस्ट कराकर अपने मुताबिक उसकी कीमत तय कर सकता है।"


वह आगे कहते हैं, "खरीदार और विक्रेता आपस में बात कर लेते हैं। कई बार जब हम डील हमारे माध्यम से पूरी होती है तो कुछ पैसे लेते हैं फीस के स्वरूप। ये फीस भी बहुत कम होती है।"

रुचित बातते हैं कि जब किसान अपनी उपज बिचौलियों के माध्यम से बेचता है तो उसमें पैसे कई स्तरों पर बंट जाते हैं। इसी कारण किसान को सही कीमत नहीं मिल पाती। ऐसे में हमारे ऐप से सीधे उपज से बचने से किसानों का फायदा खुद-ब-खुद बढ़ जाता है।

ऐसी ही एक घटना का जिक्र करते हुए रुचित बताते हैं, "असम के ही एक किसान ने हमारे ऐप पर बताया कि मेरे पास लकनादौन प्रजाति की हल्दी है। इसे कोई खरीदार नहीं मिल रहा। इस हल्दी की खासियत मुझे पता थी। दवाओं में इसका प्रयोग बहुत ज्यादा होता है। मैंने इस बारे में अमरिका की दवा बनाने वाली कंपनी से बात की और किसान से हल्दी मंगा लिया। हम ऐसे किसानों को सीधे लाभ दे रहे हैं।"

पांच भाषाओं में है ऐप

यह ऐप भारत के अलावा कई और देशों में भी काम कर रहा है क्योंकि रुचित का मानना है कि किसानों की परेशानी हर जगह एक जैसी है। मगर वो यह भी कहते हैं कि उनका फोकस भारत पर है। इस ऐप से फिलहाल 20 प्रदेशों के किसान जुड़े हैं। इस ऐप की सुविधाएं पांच भाषाओं में है ताकि किसानों के लिए भाषा परेशानी न बने।

अमेरिका में नौकरी छोड़ किसानों के लिए शुरू किया काम

भारत में इंजीनियरिंग करने के बाद रचित अमेरिका चले गये, लेकिन वो हमेशा से किसानों के लिए कुछ करना चाहते थे। रुचित बताते हैं, "अमेरिका में पैसा तो कमा रहा था लेकिन दिल भारत में था। अपने देश के किसानों के लिए कुछ करना चाहता था। यही सोचकर यह ऐप बनाया। मेरा मकसद यही है कि किसानों को मेरे माध्यम से फायदा पहुंचे।"

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