मध्य प्रदेश का झिरी गाँव, जहां हर कोई संस्कृत में बात करता है

Pushpendra VaidyaPushpendra Vaidya   5 Nov 2019 7:56 AM GMT

राजगढ़(मध्य प्रदेश)। अगर आप इस गाँव में जाते हैं और लोग आपसे संस्कृत में बात करते हैं तो चौकिएगा मत। एक गाँव ऐसा है जहां बुढ़े हों या बच्चे हर कोई फर्राटेदार संस्कृत बोलते हैं। यही नहीं गाँव में घरों की दीवारों पर संस्कृत में ही श्लोक लिखे गए हैं और घरों के नाम भी संस्कृत में ही लिखे गए हैं।

मध्यप्रदेश का झिरी गाँव पूरे देश में संस्कृत गाँव के नाम से मशहूर है। झिरी गाँव राजगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित है। गाँव में संस्कृत भारती से जुड़े कुछ लोग करीब 15 साल पहले यहां आए थे। तभी से संस्कृत भाषा लोगो के इतनी भा गई कि लोगों ने इसे पूरी तरह अपना लिया। लोगों को यह भाषा मीठी लगती है। इसमें बोल चाल से अपनापन लगता है।

गाँव के हरिवंश सिंह चौहान कहते हैं, "संस्कृत हमारी मातृ भाषा है, जैसे जब एक दूसरे से मिलते हैं तो हिंदी में बात करते हैं, 'आप कहां जा रहे हो, आप कहां से आ रहे हो', वही हम संस्कृत में कहते हैं, भवना कुत्र गच्छति, कुता: गच्छति। यही नहीं यहां से जो हमारी बहनों की शादी दूसरे गाँवों में हुई वहां भी जाकर वो लागों को संस्कृत सिखा रही हैं।"

यहां हाय, हैलो, नमस्कार, गुड मॉर्निंग या राम-राम नहीं बल्कि संस्कृत में नमो- नम: बोला जाता है। मोबाइल फोन पर बात करना हो या फिर खेती बाड़ी की बात करनी हो एक दूसरे से संस्कृत में बातें करना पुरातन काल की याद ताजा कर देता है। गाँव में आकर ऐसा लगता है मानो हम भारत के वैदिक काल या आदि काल में लौट आए हों।


संस्कृत भाषा दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है। बीते पाँच हजार सालों से यह लोक प्रचलित है। संस्कृत में लिखा गया ऋगवेद दुनिया का सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है। इसकी रचना वैदिक काल में ईसा से करीब ढाई से तीन हजार साल पहले की गई थी। पाणिनी ने अष्टाध्यायी नाम से इसका व्याकरण भी लिखा है। हिन्दी और अंग्रेजी के प्रभाव से संस्कृत का प्रभाव कम हुआ लेकिन आज भी हिन्दु संस्कारों और धार्मिक कार्यों में संस्कृत मंत्रों का ही उपयोग किया जाता है। अब गाँव एक बार फिर संस्कृत को उपयोग में लाकर अपनी जड़ों की तरफ लौटना चाहता है।

झिरी गाँव में कई घरों के बाहर 'संस्कृत गृहम' लिखा गया है। इसका मतलब है इस घर में रहने वाले सभी लोग संस्कृत में ही बात करते हैं। पूरे गाँव में 70 फीसदी लोग संस्कृत अच्छी तरह जानते हैं। इन्हें व्याकरण का ज्ञान ज्यादा नहीं है मगर संस्कृत धारा प्रवाह बोलते हैं।

यहां के कुछ नौजवान बच्चों को संस्कृत सिखाने के लिए खास कोशिश कर रहे हैं। स्कूल के अलावा गाँव के मंदिर में बच्चों को इकट्ठा कर उन्हें खेल-खेल में संस्कृत सिखा रहे हैं। बच्चे भी उतने ही चाव से संस्कृत सीख रहे हैं।

गाँव में शादी-ब्याह हो या फिर कोई और मांगलिक मौके गाँव की महिलाएं संस्कृत में ही गीत गाती हैं। और तो और पनघट हो या चौपाल यहां भी संस्कृत में ही बात की जाती है। मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक में संस्कृत गाँव झिरी पर एक विशेष अध्याय लिखा गया है गाँव के लोग इस पर फख्र करते हैं।

झिरी गाँव का ये बदलाव वाकई तारीफ-ए-काबिल है। आमतौर पर ब्राह्मण ही कर्मकांड के लिए संस्कृत जानते हैं। कर्नाटक के शिमोगा जिले के मात्तुर गाँव में भी सभी संस्कृत बोलते हैं। यहां ज्यादातर ब्राह्मण परिवार है लेकिन झिरी गाँव में सिर्फ एक ही ब्राह्मण परिवार है। जाहिर ऐसे झिरी गाँव अपने आप में एक बडी मिसाल है जो अपनी कामयाबी कुछ अलग ही इबारत लिख रहा है।

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