बाहुबली फिल्म देखकर छह साल के अर्जुन बन गए तीरंदाज

Ankit Kumar SinghAnkit Kumar Singh   27 Dec 2019 9:06 AM GMT

वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। जिस उम्र में बच्चों को पता भी नहीं होता कि उन्हें भविष्य में क्या करना है, उसी उम्र में छह साल के अर्जुन ने अपने नाम तीरंदाजी के कई रिकॉर्ड बना लिए हैं।

वाराणसी के आदित्य सिंह (अर्जुन सिंह) ने तीन साल पहले बाहुबली फिल्म देखने का बाद तीरंदाजी सीखने के बारे में अपने घरों से कहा। तब अर्जुन की उम्र सिर्फ तीन साल थी। लेकिन अपनी इस छोटे सी उम्र में यह तीरंदाजी के क्षेत्र में बड़े- बड़े धुरंधरों को मात देने का जज्बा रखते हैं।

अर्जुन अभी तक तीन बार स्टेट चैम्पियन रह चुके हैं। इसके अलावा अभी हाल में चीन के मकाउ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता ग्लोबल आर्चरी एलियंस यूथ इनडोर आर्चरी वर्ल्ड कप में रजत पदक जीतकर भारत नाम रौशन किया है। अपने उम्र से ज्यादा उम्र के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए इन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।


इनका इस क्षेत्र में रुचि लेने का किस्सा भी बड़ा अलग है। इनके पिता अजय सिंह कहते हैं, "जब अर्जुन तीन साल का था, उस समय बाहुबली फिल्म रिलीज हुई थी और उसमें तीर धनुष चलाने का वीडियो देख , जिससे यह खासे प्रभावित हुए। उसके बाद तो इन्होंने जिद ही पकड़ ली कि मुझे तीरंदाजी सीखनी ही है। इसके बाद मैंने शहर में पता किया कि तीरंदाजी कहा सिखाया जाता है। तब मैं एक संस्थान के पास गया तो उन्होंने कहा कि इनका उम्र में अभी छोटा है इसे सीखने के लिए कम से कम आठ साल तक उम्र होना चाहिए। इसके बाद दूसरी जगह संपर्क किया और वहां से एक कोच हमें मिले। घर की छत पर ही कोच इन्हें प्रैक्टिस करवाते हैं।"

अर्जुन के लिए पहली बार मणिपुर से तीर धनुष मंगवाया गया। उसके बाद कोच ने कहा कि अगर प्रतियोगिता में भाग लेना है तो इनके लिए रिकाब वाली धनुष की जरुरत पड़ेगी। तब इनके पिता ने दो लाख रुपए के आस -पास आने वाले रिकाब धनुष को कोरिया से मंगवाया।


अर्जुन की मां शशिकला कहती हैं, "अपनी जिद और जुनून की बदौलत अर्जुन तीरंदाज बना है। चाहे ठंडी हो या गर्मी चाहे बरसात। अर्जुन कभी ट्रेनिंग मिस नहीं करता। तीरंदाजी को लेकर उसका ये लगन कोच को भी प्रभावित करता है।" यह कहना गलत नहीं होगा कि अर्जुन के इस कामयाबी के पीछे उसके माता-पिता का सबसे बड़ा योगदान है जिन्होंने उसके उस हुनर को पहचाना और उसे उसके मंजिल तक पहुंचाने में पूरी मदद की।

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