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"पहले लोग शराबी कहते थे, अब नाक से बांसुरी बजाने वाला कलाकार कहते हैं"

Ankit Kumar SinghAnkit Kumar Singh   9 March 2020 5:38 AM GMT

पहले लोग शराबी कहते थे, अब नाक से बांसुरी बजाने वाला कलाकार कहते हैं

कैमूर (बिहार)। "गांव की गालियों से जब निकलता था तो लोग मुझे नशेड़ी कह कर पुकारते थे। बोलना तो छोड़िए देखना पसंद नहीं करते थे, लेकिन आज जब घर से निकलता हूं तो वही लोग कहते हैं कि एक बार नाक से बांसुरी तो बजाइए।" बिहार के जिला कैमूर के रहने वाले नसीम सिद्दीकी कहते हैं।

बिहार की राजधानी पटना से लगभग 250 किलोमीटर दूर कैमूर जिले के देवहलिया गांव के मुस्लिम बस्ती के रहने वाले नसीम आज अपने नाक से बांसुरी बजाने को लेकर जाने जाते हैं। अपने इस काम से वे खुश भी हैं और कहते हैं "जो जिंदगी आज है वह पिछले 20 साल पहले होती तो शायद मैं आज कहीं और होता। जिंदगी के दो दशक ने बहुत कुछ मुझसे छीन लिया। नशे की ऐसी लत पड़ी कि इसके अलावा जिंदगी में कुछ बचा ही नहीं था। मगर आज जिंदगी के मायने और उद्देश्य बदल चुके हैं।"


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नसीम खुद अपने बारे में बताते हैं कि कैसे वे पहले हमेशा शराब के नशे में डूबे रहते थे। लेकिन बिहार में शराब बंदी के बाद उनके जीवन में बदलाव आ गया। नसीम कहते हैं " मेरे दारू पीने से मेरा परिवार काफी परेशान था। मेरी खुद की बैंड पार्टी थी लेकिन मेरे नशे ने मुझसे वो भी छीन लिया। ऐसा नहीं था कि मैं नशे से दूर नहीं होना चाहता था, लेकिन छोड़ नहीं पाता था। तब घर के लोगो ने मुझे जौनपुर जिला उत्तर प्रदेश के कछवाछा गांव के मकदूम असरफ दरगाह पर गये। वहां से आने के बाद मैंने दारू न पीने का प्रण लिया और वहां से जब आया तो मैंने बांसुरी खरीदी और मुंह से बजाते बजाते मैंने नाक से बजाना शुरू कर दिया और आज पिछले 2 सालों से मैं बजा रहा हूं।"

नसीम को शराब की ऐसी बुरी लत लगी थी कि जब उनकी बेटी की शादी हो रही थी तो उनके पिता ने पैसा मांगा तो उन्होंने कहा कि मेरे पास उसको देने के लिए कुछ नहीं है। यह कहते-कीते नसीम रो देते हैं। लेकिन अब नसीम की बैंड पार्टी भी शुरू हो चुकी है।

नसीम से जब हमारी मुलाकात हुई तो वह गांव के पश्चिम छोर पर स्थित शिव के मंदिर में बांसुरी बजा रहे थे। आगे जब उनसे बात हुई तो वे कहते हैं कि मैं हर रोज यहीं आता हूं और रियाज करता हूं। मगर जब रास्ते में जाता हूं या घर पर भी बैठा रहता हूं तो बांसुरी बजाने लगता हूं। जब शुरू में मैं नाक से बांसुरी बजाता था तो लोग मुझे पागल कहते थे मगर आज मुझे कलाकार कहते हैं। और इसी कलाकारी के बदौलत जो इज्जत 20 साल पहले खत्म हो चुकी थी आज वह मिल रही है।

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आगे नसीम कहते हैं कि बैंड पार्टी से अब मैं अच्छी कमाई कर रहा हूं। पहले दो-चार सौ रुपयों के लिए तरसता था अब तो पांच हजार रुपए ईनाम में ही मिल जाते हैं। बच्चों को अच्छे से पढ़ा भी पा रहा हूं।

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