जैविक खेती करना इस महिला किसान से सीखिए

Lakshmi DeviLakshmi Devi   16 Aug 2019 5:43 AM GMT

रांची (झारखंड)। किस समय क्या खेती करनी है, कब सिंचाई करनी है, कब खाद डालनी है, ये सब जानकारियां लेने सब इन्हीं के पास आते हैं, कृषक मित्र प्रभा देवी।

झारखंड के सिल्ली प्रखंड के बाह्मनी गांव की प्रभा देवी खुद तो खेती करती ही हैं, दूसरी सैकड़ों महिलाओं को खेती के लिए प्रेरित भी करती हैं। आस-पास के कई गाँवों की महिला किसान इन्हीं से जानकारियां लेने आती हैं। प्रभा बताती हैं, "पहले मेरे पास पैसे नहीं होते थे। घर के छोटे-मोटे काम के लिए किसी से पैसे लेने पड़ते थे। पहले बेहद जरूरी कामों के लिए जमीन गिरवी रखनी पड़ती थी। बच्चों की जरूरतें पूरी नहीं कर पाती थी, लेकिन आजीविका कृषक मित्र बनने के बाद अब स्थितियों में सुधार हुआ है।

महिला किसानों को खेती की जानकारी देती प्रभा देवीमहिला किसानों को खेती की जानकारी देती प्रभा देवी

आजीविका समूह की 32 वर्षीय प्रभा देवी बताती हैं, "मैं बहुत पहले से इस समूह से जुड़ी हुई हूं। साल 2001 में इस समूह में बस बचत किया जाता था। अब जैसे समस्याओं का हल किया जाता है उस तरीके से समस्याओं का हल पहले नहीं हो पाता था। पहले बेहद जरूरी कामों के लिए जमीन गिरवी रखनी पड़ती थी। छोटे मोटे खर्च के लिए पति से पैसे लेने पड़ते थे। उस समय हम महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता था।"


झारखंड स्टेट लाइवलीवुड प्रमोशनल सोसायटी के जरिए बनाए जा रहे सखी मंडलों की वो सक्रिय सदस्य हैं। उनकी प्रतिभा और खेती के प्रति लगन को देखते हुए जेएसएलपीएस ने उन्हें विशेष ट्रेनिंग भी दिलवाई है। उन्हें कई वर्कशॉप और कृषि से जुड़े आयोजनों में भेजा जाता है। जहां से मिली सीख और ज्ञान को वो दूसरी महिलाओं में बांटती हैं।

प्रभा देवी आगे बताती हैं कि उनको और उन जैसी महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता है। समुह से जुड़ने से पहले व्यापार के लिए पूंजी नहीं थी। मेरी आर्थिक स्थिति भी खराब थी। 2014 में आजीविका कृषक मित्र का चुनाव हुआ जिसमें महिलाओं ने मुझे। घर में तमाम जिम्मेदारियां और मजबूरियां रहते हुए भी मैंने मीटिंग अटेंड की। घर के बाहर जाकर। मैंने अपने बच्चों को घर पर छोड़ बाहर जाकर एक जिम्मेदार कृषक मित्र की मित्र की भूमिका निभाई।

वो आगे कहती हैं, "आजीविका कृषक मित्र बनने के बाद मैं लोगों को बेहतर खेती के लिए खाद और बीजों की जानकारियां देने लगी। 2017 में मेरा गांव में उत्पादक समूह का गठन हुआ। इस समूह में कुल 68 महिला किसान हैं। सारे 68 किसानों के केंचुआ खाद के लिए बेड भी दिलवाया है। कुछ किसानों को सिंचाई योजनाओं का भी लाभ दिलाया है।"

ये भी पढ़ें : ग्रामीण महिलाएं सलाहकार बनकर सिखा रहीं बेहतर खेती का तरीका

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top