नौकरी की जगह युवक ने खेत में आजमाएं इंजीनियरिंग के फॉर्मूले, इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग से कमा रहे मुनाफा

Diti BajpaiDiti Bajpai   16 May 2019 8:22 AM GMT

खोलाचौरी (पौड़ी)। उत्तराखंड में ज्यादातर युवा पढ़ाई के लिए बाहर जाते हैं और वहीं नौकरी कर लेते हैं, लेकिन 26 वर्षीय अभिषेक सिंह ने दूसरे शहर जाकर पढ़ाई तो की लेकिन नौकरी नहीं की। अभिषेक ने अपने ही गाँव में इंटीग्रेटेड फार्मिंग शुरू की और आज वह इस व्यवसाय से लाखों की कमाई कर रहे हैं।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग यानि एकीकृत कृषि प्रणाली से कोई भी किसान साल भर मुनाफा कमा सकता है। इस प्रणाली में एक घटक से बचे हुए उत्पादों और अवशेषों को दूसरे घटक के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। अगर आप मुर्गीपालन करते हैं तो पोल्ट्री की बीट को मछलियों को खिला सकते हैं। इससे मछली की अधिक मात्रा में तादाद होगी, जिससे मुनाफा होगा और दूसरा उस तालाब के पानी को सिंचाई के लिए प्रयोग में लाया जा सकेगा। अगर इसके साथ पशुपालन भी किया जाए तो गाय-भैंस के दूध को बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

पौड़ी जिला मुख्यालय से 15 कि.मी. दूर खोलाचौरी गाँव में अभिषेक ने अपना फार्म बनाया हुआ है। "पिछले तीन पहले मैंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग शुरू की। हर साल कुछ न कुछ नया सीखने को मिला," अभिषेक ने गाँव कनेक्शन को बताया, "मेरे घर में कभी गाय-भैंस नहीं पाली गई तो मुझे कोई अनुभव नहीं था, एक साल उनको समझने में लगा कि गायों को कौन-कौन सी बीमारियां होती है, कब टीकाकरण करना है, क्या-क्या खाने में देना है।"


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दूसरे साल का जिक्र करते हुए अभिषेक बताते हैं, "दूसरे साल में मैंने दूध की मार्केटिंग पर फोकस किया। साथ ही पोल्ट्री व्यवसाय भी शुरू किया जिसमें मैंने शुरू में 500 पक्षियों को रखा, आज उनकी संख्या एक हज़ार से ज्यादा है।"

देश भर में छोटे एवं सीमांत आकार के खेतों की संख्या बढ़ने से एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) की उपयोगिता और अधिक बढ़ रही है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार इस पर जोर भी दे रही है। एकीकृत खेती का मूल यह है कि एक किसान की जमीन का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाए।


"इंटीग्रेटेड फार्मिंग बहुत जरूरी है क्योंकि इसका बाइ प्रोडक्ट आप कहीं भी प्रयोग कर सकते हैं। पोल्ट्री का बीट मछलियों के लिए आहार के रूप में प्रयोग होता है। गोबर को खेतों में खाद के रूप में प्रयोग करते हैं," अभिषेक अपने पॉलीहाउस को दिखाते हुए बताते हैं, "इस पॉलीहाउस में हम कोई भी सीजन की सब्जी उगा सकते हैं अभी हमने फूलगोभी, टमाटर, पत्तागोभी और मूली लगाया हुआ है।"

अभिषेक ने अपने फार्म के एक-एक इंच का अच्छे से इस्तेमाल किया है। फार्म में गाय-भैंसों को रखने के लिए 21 स्क्वायर फीट है जिसमें 30 पशु को रखने की क्षमता है। इसके साथ ही 1200 स्क्वायर फीट में पोल्ट्री फार्म बनाया हुआ है जिसमें 1000 पक्षियों को रखने की क्षमता है।

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अभिषेक बताते हैं, "अभी हाल में हमने मछली पालन के लिए तालाब बनवाया हुआ है, जिसमें मछली 400 सीड डाला है। यह हमारा तीसरा साल है, दो साल से हमारा इनपुट लग रहा था लेकिन अब फायदा होने लगा है।"

मुनाफे के साथ इंटीग्रेटेड फार्मिंग में आने वाली चुनौतियों के बारे में अभिषेक बताते हैं, "पहाड़ों में खेती करना बहुत मुश्किल काम है क्योंकि यहां अभी भी पानी की कमी, दूध के सही दाम न मिलना और पशुओं के चारा न मिल पाना एक चुनौती है। अभी हम कम्प्रेस फीड ब्लॉक पशुओं को देते हैं।"

गाँव के और भी लोग हुए प्रेरित

अभिषेक ने जब इंटीग्रेटेड फार्मिंग शुरू की तब उनके गाँव में कोई भी खेती या पशुपालन से जुड़ा नहीं था लेकिन उनके काम से प्रेरित होकर आज उन्हीं के गाँव में कई लोग डेयरी फार्म चला रहे हैं। "मुझे देखकर काफी लोग जागरूक हुए। लोगों को पता नहीं था कि सरकार की योजनाओं का कैसे लाभ ले। इन सभी के बारे में लोगों को जानकारी दी। योजनाओं की मदद से आज लोग डेयरी फार्मिंग कर रहे है। अभी हम कॉपरेटिव बनाने की सोच रहे है ताकि जिले में लोगों को दूध के दाम मिल सके," अभिषेक ने गाँव कनेक्शन को बताया।


विदेशी लोगों को भी सिखाएंगे इंटीग्रेटेड फार्मिंग

"सरकार द्वारा होम स्टे की योजना चल रही है, जिसमें हम बेम्बू हट्स बना रहे हैं। ताकि विदेशों से आए लोग हमारे फार्म को देख सकेंगे। वह भी गायों का दूध निकालना, मछली पकड़ना जैसे काम कर सकें," अभिषेक सिंह ने बताया। उत्तराखंड सरकार में देशी-विदेशी पर्यटकों को अभूतपूर्व अनुभव प्रदान करने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए पंडित दीनदयाल गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना शुरू की है।

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