इस गांव को बुलाया जाता है नीम वाला गांव, यह है खास वजह

मनीष वैद्य, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

देवास (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के एक गांव में 1000 से ज्यादा नीम के पेड़ हैं। इतनी संख्या में नीम के पेड़ होने की वजह इस गांव को नीमगांव भी कहा जाता है। इस गांव में पहुंचने से आधा किलोमीटर पहले ही बहुत से नीम के पौधे मिलेंगे।

80 साल पहले शुरू हुआ था यह सिलसिला

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 157 किलोमीटर दूर देवास के बैरागढ़ का गांव नीमगांव के नाम से मशहूर है। यहां घर-घर में नीम के पेड़ देखने को मिलते हैं। गांव में इतने सारे नीम के पेड़ क्यों लगाए गए हैं इस पर प्रधान साईंदास बैरागी बताते हैं कि 80 साल पहले गांव में गंभीर बीमारी फैली थी। तब किसी ने नीम के पेड़ों को फायदेमंद बताकर गांव में नीम के पेड़ लगाने की सलाह दी थी।

साईंदास बैरागी आगे बताते हैं कि उस समय फैली महामारी से निजात पाने के लिए बुजुर्गों ने खूब सारे नीम के पेड़ लगाए थे। उसी समय यह पेड़ लगाने का सिलसिला शुरू हुआ था जो आज भी जारी है। आज गांव में करीब एक हजार से ज्यादा नीम के पेड़ हैं। 600 से ज्यादा पेड़ पंचायत की तरफ से लगाए गए हैं और ठीक उतने ही पेड़ गांव के लोगों ने अपने खुद के प्रयासों से लगाए हैं।

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नीम के पेड़ कितने फायदेमंद है यह वैज्ञानिक आधार पर भी साबित हो चुका है। आयुर्वेद में इसे औषधीय पौधा भी कहा जाता है। नीम के पेड़ की पत्ती, छाल, निम्बौली, फूल और टहनियों सब अपने आप में उपयोगी है।

किसान हरिराम कवलेचा कहते हैं कि एक नीम के कई फायदे हैं। नीम का पेड़ छायादार होता है, जिन जगहों पर नीम का पेड़ होता है वह जगह बहुत ठंडी होती है। इसके अलावा यह त्वचा, पेट, दांत के लिए भी बहुत उपयोगी माना जाता है।

नीम के पत्तियों में होता है कीटों को खत्म करने का गुण

उन्‍होंने बताया कि रासायनिक कीटनाशकों की जगह किसान खेतों में नीम के पत्तियों का छिड़काव करते हैं। इससे फसलों का विकास बेहतर होता है। नीम के पत्तियों से फसलों को किसी प्रकार से नुकसान भी नहीं होता है। इसके पत्तियों, फूलों को हम कीटनाशक से लेकर कई बीमारियों में उपयोग करते हैं। हरिराम के मुताबिक नीम के पत्तियों में कीटों को खत्म करने वाला गुण होता है।

बैरागढ़ गांव के बुजुर्गों की तरफ से शुरू किए गए पेड़ लगाने के इस अभियान को गांव के युवा आज भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। वह बारिश के मौसम में पौधा लगाते हैं और उसकी तबतक देखभाल करते हैं जब तक वह पौधा पेड़ बनकर तैयार नहीं हो जाता है।

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वहीं गांव के युवा संजय बताते हैं क‍ि यहां के ही निम्बौलियों से जिले के दूसरे गांवों और देवास की माता टेकरी पर भी नीम के पौधे लहलहा रहे हैं। गांव के युवक हर साल बड़ी तादात में निम्बौलियां इकट्ठा कर प्रशासन और अन्य गांवों तक पहुँचाते हैं ताकि और लोग भी नीम के पेड़ों का लाभ ले सकें।

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