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झील में लगता है कश्मीर का यह बाज़ार, ग्राहक भी आते हैं नाव पर

श्रीनगर के प्रमुख तस्वीरों में कई बार जो फ़लों और सब्ज़ियों से लदे शिकारे नज़र आते हैं वो सब श्रीनगर में सूर्योदय के समय लगने वाले 'गुदिर' के होते हैं। श्रीनगर में सुबह लगने वाले सब्ज़ी के बाज़ार को स्थानीय भाषा में 'गुदिर' कहा जाता है। सरल भाषा में कहें तो यह झील में नावों के ऊपर लगने वाला बाज़ार या मंडी होता है।
#Jammu and Kashmir

श्रीनगर। सुबह के साढ़े चार बजते ही श्रीनगर के डल झील में शिकारों की हलचल होने लगती है। डल में चलने वाले नावों को स्थानीय भाषा में शिकारा कहते हैं जो कि सैंकड़ों के लिए रोज़ी-रोटी का ज़रिया भी है।


श्रीनगर के प्रमुख तस्वीरों में कई बार जो फ़लों और सब्ज़ियों से लदे शिकारे नज़र आते हैं वो सब श्रीनगर में सूर्योदय के समय लगने वाले ‘गुदिर’ के होते हैं। श्रीनगर में सुबह लगने वाले सब्ज़ी के बाज़ार को स्थानीय भाषा में ‘गुदिर’ कहा जाता है जिसमें शहर भर के थोक विक्रेता और ग्राहक आते हैं। सरल भाषा में कहें तो यह झील में नावों के ऊपर लगने वाला बाज़ार या मंडी होता है।

स्थानीय सब्ज़ीयों, फलों की तैरती दुकानों के अलावा गुदिर में आये लोगों के लिए खान-पान की दुकानें भी यहाँ शिकारों पर ही नज़र आती हैं। सूरज की पहले किरण झील पर पड़ने के पहले ही बाज़ार में नदरू, कश्मीरी लाल मूली, साग, तरबूज़ आदि लेने के लिए लोगों आवागमन शुरू हो जाता है और छः बजते-बजते सब्ज़ियों से भरे शिकारे बाज़ार या फ्लोटिंग मार्किट से वापस आते शिकारे दिखने लगते हैं।


गुदिर में सब्ज़ी बेचने और खरीदने वाले लोगों को सुबह की काहवा पिलाने के लिए मुश्ताक हुसैन हर रोज़ अपने शिकारे पर कहवा बना कर बेचते हैं, वो भी पूरे परंपरागत अंदाज़ में। “काहवा एक ट्रेडिशनल टी है कश्मीर का, इसको हर्बल टी भी बोलता है। इसको पहले बोलता है मुग़ल टी। इसको कॉपर के पॉट में बनता है जिसके अंदर कोयला डालता है। इस पॉट को समावार बोलता है। इसमें एलेवेन स्पाइस डालता है। गेरान (ग्यारह) चीज़ों से बनने वाला काहवा में केसर, बादाम, इलायची, दालचीनी, अदरक, गुलाब पत्ती, अखरोट डालता है। हम लोग इसको विंटर में ज़ादा पीता है,” मुश्ताक हुसैन ने बताया और फ़िर कहवा पाउडर से भरे अलग-अलग वज़नों के पैकेट दिखने लगा… “ये 200 का है, ये वाला 350, आप कौन सा लेंगे?”


कश्मीर अपने रंग-बिरंगे, दुर्लभ प्रजातियों के फूलों के लिए भी जाना जाता है। और उन्हीं फूलों से अपने शिकारे भरे हुए लोग भी गुदिर में फूलों के बीज बेचते नज़र आते हैं। मोहम्मद यूसुफ़ बताते हैं, “हर देश से लोग यहाँ आते हैं। जो भी श्रीनगर आया वो एक दफ़े इस फ्लोटिंग मार्केट में भी तशरीफ़ लाता है। सुबह-सुबह फूलों के बीज खरीदने। ये सब फ़ूल 50 डिग्री तापमान में भी खिलते हैं। यहाँ ज़्यादा ठंढ में तो फ़ूल जी नहीं पाते पर आप इन बीजों को अपने साथ कहीं भी ले जा कर पाल सकते हैं। नरगिस, लिली, कमल, कश्मीरी जैस्मिन, गुलाब, लैवेंडर जैसे और बहुत फ़ूल हैं हमारे पास।” 


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