जब उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान ने बताया था, मुसलमानों में संगीत हराम क्यों है?

जब भी शहनाई का नाम आता है, उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान का नाम खुद ब खुद हमारी ज़बान पर आ जाता है। वह शहनाई के जादूगर थे। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान अब हमारे बीच तो नहीं है, लेकिन अक्सर उनसे जुड़े क़िस्से सुनाई देते रहते हैं।

मुसलमानों में एक प्रचलित धारणा है कि "मुसलमानों के लिए संगीत हराम है।" हिंदी के कवि, संपादक और संगीत के जानकारी यतीन्द्र मिश्र ने बिसमिल्लाह ख़ान की जीवनी लिखते वक़्त यही सवाल उनसे किया। इस सवाल के जवाब में मशहूर शहनाई वादक बिसमिल्लाह ख़ान ने यतीन्द्र मिश्र को वही जवाब दिया, जो उन्हें उनके गुरू ने बताया था। यह पूरा क़िस्सा आप यतीन्द्र की ज़बानी इस वीडियो से जान सकते हैं।

गांव कनेक्शन के नए शो 'यतीन्द्र की डायरी' के पहले ऐपिसोड में यतीन्द्र मिश्र उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान से जुड़े इसी क़िस्से को साझा कर रहे हैं। इस शो में यतीन्द्र, संगीत के संस्मरण बताते नज़र आएंगे।

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