फूलों और सब्जियों की ऐसी प्रदर्शनी आपने पहले शायद ही देखी हो

लखनऊ। फूलों और सब्जियों की दर्जनों तरह की किस्मों की प्रदर्शनी शायद ही पहले आपने कभी देखी होगी। राजधानी लखनऊ में दो दिवसीय 50वीं फल, शाकभाजी और पुष्प प्रदर्शनी में सैकड़ों किस्मों की प्रदर्शनी लगाई गई है।

फल, शाकभाजी और पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन पिछले कई वर्षों से हो रहा है। प्रदर्शनी में राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, उच्च न्यायालय लखनऊ, पीएससी कारागार, सीमैप, रेलवे, एचएएल, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, नगर निगम, अंसल एपीआई, टाटा मोटर्स आदि संस्थाएं भाग ले रही हैं।


प्रदर्शनी में प्रदेश के कई जिलों के किसान और उनके उत्पाद शामिल किए गए। इनमें मशरूम, स्ट्राबेरी, और फूलों समेत कई फसलें शामिल रही हैं। प्रदर्शनी में अपनी फसल के शामिल किए जाने से किसान काफी खुश नजर आए।


बाराबंकी में सूरतगंज ब्लॉक में दौलतपुर के किसान अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, "मेरी स्ट्राबेरी और मशरूम को यहां रखा गया है। ऐसी प्रदर्शनियों से किसानों को हमेशा कुछ नया सीखने को मौका मिलता है।" अपने जिले के किसानों और खेती में हो रहे नए प्रयोगों का जिक्र कहते हुए बाराबंकी के जिला उद्यान अधिकारी महेंद्र कुमार ने कहा, बाराबंकी ने मेंथा की खेती में तो नाम कमाया ही है, केला और फूलों की खेती में भी परचम लहराया है। पिछले कुछ वर्षों में जिले के किसानों ने स्ट्राबेरी, जरवेरा औषधीय फसलों की खेती में सतावरी और सहजन भी उगाना शुरु किया है। हमारी कोशिश है आने वाले दिनों में जरेवरा के अलावा दूसरे फूलों की खेती को भी बढ़ावा दिया जाए।


प्रादेशिक पुष्प प्रदर्शनी के इतिहास में वर्टिकल गार्डेन, फूलों से बनी आकृतियों की प्रतियोगिता, पॉली हाउस में उत्पादित शाकभाजी, यूरोपियन सब्जियों के साथ-साथ विशिष्ट फलों, मशरूम, शहद और पान के पत्तों की प्रतियोगिता को शामिल किया गया है।





शाक-भाजी और फूल प्रदर्शनी में प्रदेश के कई जिलों के किसानों और संस्थाओं ने हिस्सा लिया। जिसमें बाराबंकी, लखनऊ, रायबरेली, सीतापुर समेत कई जिला कारागार भी थे, इन जेलों की उगाई गई सब्जियों का भी यहां प्रदर्शन किया गया। जेल अनुभाग की प्रदर्शियों के अवलोकन और विजेताओं की चयन प्रक्रिया कर रहे केंद्रीय उपोष्ण उद्यान अनुसंधान संस्थान, रहमेना खेडा में फसल उत्पादन के विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम पांडेय ने कहा, "यूपी के किसान काफी कुछ नया सोच रहे हैं। वो नई-नई फसलें उगा रहे हैं। किसानों के साथ ही यहां पर कई जिला कारागारों में कैदियों द्वारा उगाई गई सब्जियों का प्रदर्शन किया गया जो जेल में हो रहे अच्छे कामों का भी परिणाम हैं। कैदियों के इस हुनर को बढ़ाया जा चाहिए।"


पहले ही दिन बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने फल और फूलों के आकर्षण का आनंद लिया। शाक व सब्जी प्रदर्शनी के स्टॉल में 20 किलो का कद्दू देख हर कोई हैरान सा नजर आ रहा था। वहीं, तीन फिट लंबी मूली और डेढ़ फिट की गाजर से निगाहें हटने का नाम ही नहीं ले रही थीं। पांच फिट की लौकी के साथ तो सेल्फी लेने वालों की भीड़ लगी रही।

सीतापुर जिले के प्रगतिशील किसान नंदू पांडेय ने पार्सेले, ब्रोकली, लेट्यूस जैसी विदेशी सब्जियों की खेती करते हैं। नंदू पांडेय बताते हैं, "इस बार समय पीली, लाल, हरी शिमला मिर्च, ब्रोकली जैसी कई सब्जियों की खेती की है, ऐसी प्रदर्शियों में हमें बहुत सी जानकारियां मिलती हैं।


गमलों में लगे विभिन्न रंगों के मौसमी फूल जैसे पेंजी, पिटूनिया, सिनरेरिया, पॉलीएंथस, रोडैंथी, स्वीट लिलियम, स्वीट एलाइजम, स्टाक, स्टेसिस, फ्लाक्स वाल फ्लावर आदि को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।

आलू, बैंगन, गाजर जैसी कई सब्जियों की दर्जनों किस्मों के साथ ही, पार्सले, ब्रोकली, बेसिल जैसी फसलों की भी कई किस्मों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है।

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