कितने फीसदी लोगों को आज भी लगता है कि कोरोना महज सर्दी जुकाम है? जानिए क्या कहता है ये सर्वे

भारत में एक करोड़ से ज्यादा Covid 19 (कोरोना वायरस) के मामले सामने आ चुके हैं। ब्रिटेन में इस खतरनाक वायरस के नए रूप से हड़कंप मचा है। भारत की हर 10 में से 6 लोग सोचते हैं कोरोना अभी है लेकिन एक बड़ी आबादी को लगता है कि कोरोना उनके आसपास है ही नहीं, जबकि किसी को लगता है कि कोरोना मामूली सर्दी जुकाम है, पढ़िए कोरोना को लेकर क्या सोचते हैं लोग ...

Kushal MishraKushal Mishra   24 Dec 2020 1:11 PM GMT

कितने फीसदी लोगों को आज भी लगता है कि कोरोना महज सर्दी जुकाम है? जानिए क्या कहता है ये सर्वेगाँव कनेक्शन सर्वे में सामने आया कि 21 फीसदी ग्रामीण परिवार नहीं मानते है कि अब कोरोना वायरस आसपास है।

ब्रिटेन में Covid 19 (कोरोना वायरस) का अब नया रूप सामने आने के बाद दुनिया भर के देशों में इस वायरस को लेकर चिंता गहराती जा रही है। इटली में लंबे समय से लॉकडाउन चल रहा है और एक बार लॉकडाउन तोड़ने पर भारतीय रुपयों में करीब 35 हजार का जुर्माना लगता है, लेकिन भारत में इस बीमारी को लेकर लोगों का नजरिया अलग नजर आता है।

करीब 135 करोड़ की आबादी वाले देश भारत में कोरोना संक्रमण से अब तक 1.45 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। एक करोड़ लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। देश ने लंबा लॉकडाउन झेला है। बावजूद इसके गांव के हर पांचवें व्यक्ति को लगता है कि कोरोना अब उनके आसपास नहीं है। 9.4 फीसदी लोगों को लगता है कि कोरोना शहरी लोगों की बीमारी है, जबकि 8.5 फीसदी लोग इसे हल्का सर्दी जुकाम-बुखार मानते हैं। हालांकि 64 फीसदी लोग मानते हैं कि कोरोना एक वास्तविक बीमारी है और लगभग 19% लोग इसे गंभीर बीमारी समझते हैं।

गाँव कनेक्शन ने ग्रामीण भारत में कोरोना वायरस के प्रसार और कोरोना वैक्सीन को लेकर ग्रामीणों के नजरिये के बारे में पता लगाने के लिए एक से दस दिसंबर के बीच 16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 60 जिलों में 6040 ग्रामीण परिवारों के बीच रैपिड सर्वे किया। सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर 5 फीसदी है। इस पर विस्तृत रिपोर्ट www.ruraldata.in पर पढ़ सकते हैं।

सवाल : क्या आपको लगता है कि कोरोना वायरस अभी भी आसपास है?

जवाब : 63 फीसदी ग्रामीण परिवारों ने कहा कि हाँ, कोरोना वायरस अभी भी आसपास है, जबकि 21 फीसदी ग्रामीण परिवारों ने यह कहा कि कोरोना वायरस अब आसपास नहीं है। 15 फीसदी कुछ कह पाने में असमर्थ रहे, जबकि 1.3 फीसदी ऐसे भी उत्तरदाता रहे जो मानते हैं कि कोरोना वायरस हमेशा से एक धोखा रहा है।


वहीं अलग-अलग राज्यों को ध्यान में रखकर क्षेत्रवार बात करें तो पश्चिमी राज्यों (महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश) में एक चौथाई ग्रामीण उत्तरदाता यानी 25.4 फीसदी को लगता है कि कोरोना वायरस अब आसपास नहीं है। जबकि पूर्वी-उत्तर पूर्वी राज्यों (ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश) में यह आंकड़ा 23.2 फीसदी था और उत्तरी राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा) और दक्षिण राज्यों (केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक) में क्रमशः 18.5 फीसदी और 18.7 फीसदी रहा।

सवाल : क्या कोरोना एक वास्तविक बीमारी है या सिर्फ एक अफवाह है?

जवाब : 64 फीसदी ग्रामीण उत्तरदाताओं ने कहा कि कोरोना एक वास्तविक बीमारी है, जबकि करीब 19 फीसदी ने यह भी माना कि कोरोना एक घातक बीमारी है।

जबकि 11 फीसदी ग्रामीण परिवार ऐसे रहे जिन्होंने कहा कि कोरोना बढ़ा-चढ़ा कर बताई गई एक समस्या है, 9.4 फीसदी ने कहा कि कोरोना शहरों की बीमारी है, 8.9 फीसदी ने इसे एक अफवाह करार दिया। 8.5 फीसदी ग्रामीण उत्तरदाताओं ने कहा कि कोरोना बीमारी सिर्फ हल्का बुखार और जुकाम है, जबकि 7.8 फीसदी ने इसे अमीरों की बीमारी माना और 4.2 फीसदी ग्रामीण उत्तरदाता ऐसे भी रहे जो कोरोना बीमारी के बारे में कुछ भी कह पाने में असमर्थ रहे।

झारखण्ड के हजारीबाग़ जिले के विष्णुगढ़ ब्लॉक के करगालो गाँव में रहने वाले सुनील साव (21 वर्ष) के पिता उगन साव मार्च में कोरोना संक्रमण का शिकार हुए थे, इसके बाद गाँव वालों ने सुनील के परिवार से बातचीत करना भी बंद कर दिया था। हालांकि कुछ दिनों तक अस्पताल में उपचार मिलने के बाद सुनील के पिता स्वस्थ हो गए।

लंबे समय बाद कोरोना वायरस को लेकर अब गाँव में लोगों के नजरिये के बारे में सुनील 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "अब गाँव में कोरोना जैसी कोई चीज है ही नहीं, कोरोना से पहले जैसे माहौल था, वैसे ही वापस हो गया है। गाँव में कई लोगों को लगता है कि कोरोना एक अफवाह है। हमारे ब्लॉक में ढाई-तीन महीने से कोरोना का कोई नया मामला भी देखने को नहीं मिला, इसलिए मास्क भी ज्यादातर लोग तभी पहने नजर आते हैं जब बाहर जाते हैं।"


कोरोना वास्तविक बीमारी है या नहीं इसे लेकर अलग-अलग क्षेत्रों की राय अलग अलग रही है। क्षेत्रवार आंकड़ों पर गौर करें तो दक्षिणी राज्यों में यानी केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के 74.8 फीसदी ग्रामीण परिवार मानते हैं कि कोरोना एक वास्तविक बीमारी है। यह आंकड़ा अन्य क्षेत्रवार राज्यों के आंकड़ों में सबसे ज्यादा रहा। दूसरी ओर सर्वे में यह भी सामने आया कि जिन राज्यों में कोरोना वायरस की प्रसार दर अन्य राज्यों की अपेक्षा कम थी, उन राज्यों में 29.5 फीसदी ग्रामीण उत्तरदाता ऐसे रहे जिन्होंने कोरोना को एक घातक बीमारी माना।

ग्रामीण भारत में कोरोना वायरस के प्रसार का पता लगाने के लिए 16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में किए गए इस रैपिड सर्वे में कई अन्य रोचक आंकड़े भी सामने आये। कुल 6040 ग्रामीण उत्तरदाताओं में से करीब एक चौथाई यानी 26 फीसदी ने कहा कि उनके परिवार में किसी न किसी सदस्य का कोविड-19 टेस्ट किया गया, जबकि सर्वे से शामिल कुल ग्रामीण परिवारों में से 15 फीसदी परिवारों का कोई न कोई सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाया गया।

सवाल : कोरोना महामारी को कैसे देखते हैं?

जवाब- 51.3 फीसदी ग्रामीण उत्तरदाताओं ने इसे चीन द्वारा रची गई एक साजिश करार दिया, जबकि 22 फीसदी ने कोरोना महामारी को लेकर सावधानियों का पालन करने के लिए नागरिकों की विफलता माना। दूसरी ओर 19.5 फीसदी ने इसे एक्ट ऑफ़ गॉड माना तो 17.9 फीसदी ने इसे सरकार/शासन की विफलता करार दिया।


गाँव कनेक्शन ने जिन ग्रामीण परिवारों में रैपिड सर्वे किया, उनमें 30 फीसदी सामान्य जाति के थे, जबकि करीब 37 फीसदी अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) के थे। इसके अलावा 18 प्रतिशत अनुसूचित जाति के और 11 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के रहे। राशन कार्ड के आधार पर देखें तो 48 प्रतिशत उत्तरदाता गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल कार्ड धारक थे, जबकि 45 प्रतिशत गरीबी रेखा से ऊपर यानी एपीएल कार्ड धारक रहे और पांच प्रतिशत अंत्योदय योजना (एएवाई) के थे। सर्वे में इन ग्रामीण परिवारों के मुखिया या फिर किसी व्यस्क और जानकार व्यक्ति से आमने-सामने बातचीत की गयी।

इस सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में जल्द ही कोरोना वैक्सीन आने के संकेत दिए हैं। दूसरी ओर एम्स के निदेशक ने नए साल में जनवरी तक भारत में कोरोना वैक्सीन आने को लेकर संभावना जताई है। फिलहाल भारत में पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड को लेकर काम कर रहा है। इस कोरोना वैक्सीन के भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अप्रूवल दी जानी है।

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