आम बजट 2019 से पहले आया गांव कनेक्शन सर्वे: क्या कहते हैं वे आम भारतीय जो टीवी स्टूडियो तक नहीं पहुंच पाते

भारत के सबसे बड़े ग्रामीण मीडिया प्लेटफॉर्म गांव कनेक्शन ने Union Budget 2019 से पहले 19 राज्यों में सर्वे कर जाना कि Narendra Modi सरकार से क्या कह रहा ग्रामीण भारत और क्या हैं उनके असल मुद्दे

लखनऊ। मौसम के बदलाव, सूखा और ओलावृष्टि को आज भारत का किसान खेती में बड़ी समस्या मानने लगा है। भारत का हर पांचवा किसान मौसम में बदलाव (क्लाइमेट चेंज) को खेती के लिए बड़ी समस्या मानता है।

खेती-किसानी में आने वाली दिक्कतों? फसलों के दाम कैसे तय हों? पानी की किस तरह की किल्लत से हर रोज जूझते हैं ग्रामीण? गाँव के लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर गाँव कनेक्शन ने 19 राज्यों में 18,000 लोगों के बीच सबसे बड़ा ग्रामीण सर्वे करके उनकी राय जानी। साथ ही, यह भी जानने की कोशिश की कि Union Budget 2019 से पहले केन्द्र की नई मोदी सरकार से इन ग्रामीणों को क्या उम्मीदें हैं।

गाँव कनेक्शन के इस राष्ट्रीय सर्वे के दौरान खेती-किसानी, कानून-व्यवस्था, ग्रामीण चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल संकट आदि से जुड़े कई सवाल पूछे गए।

किसानों को घाटे से उबारने और खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए लगातार मंथन और चर्चाएं होती रहती हैं, यही जानने के लिए कि इस बारे में किसान क्या सोचते हैं? गाँव कनेक्शन सर्वे के दौरान 43.6 प्रतिशत ने माना कि फसलों के सही दाम न मिलना किसानों की सबसे बड़ी समस्या है। जबकि 19.8 फीसदी लोग मौसम में बदलाव होने से पैदा हुई समस्याओं को और 17 प्रतिशत लोग खेती में बढ़ती लागत को बड़ी समस्या मानते हैं। तेरह प्रतिशत मानते हैं कि किसानों पर बढ़ता कर्ज़ खेती का संकट बढ़ा रहा है।

वहीं, किसान फसलों का उत्पादन तो करते हैं, लेकिन फसल के मूल्य निर्धारण में उनका कोई महत्व नहीं होता। दो तिहाई किसान चाहते हैं कि उनकी फसलों का दाम वो खुद तय करें। ग्रामीण भारत के इस सबसे बड़े सर्वे में 62.2 फीसदी ने माना कि फसलों के दाम तय करने का अधिकार किसानों के पास हो, जबकि 30 प्रतिशत मानते हैं कि फसलों के दाम सरकार तय करे।

पानी की समस्या से जूझ रहा ग्रामीण भारत

भारत इस समय जबरदस्त जल के संकट से जूझ रहा है। सिंचाई से लेकर पीने के पानी तक हर स्तर पर ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ता है। आधुनिक भारत गाँवों में हर तीसरे घर की महिला को पानी लाने के लिए आधा किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि नल और हैंडपंप से करीब 61 फीसदी लोगों के घरों में पानी की उपलब्धता है। महज आठ प्रतिशत ग्रामीणों को पेयजल पाइप की सप्लाई उपलब्ध है।

Union Budget 2019 से पहले इस सर्वे में किसानों से सवाल किया गया था कि क्या वो चाहते हैं कि उनकी आने वाली पीढ़ियां खेती करें? इसके जवाब में 48 फीसदी लोगों ने कहा हम नहीं चाहते कि हमारी अगली पीढ़ी खेती करे। जबकि इस दौरान 13.9 फीसदी ने लोगों कहा कि वो चाहते हैं कि उनके बच्चे खेती करें, लेकिन बच्चे नहीं चाहते। इस दौरान 38 फीसदी लोगों ने कहा कि वो (किसान) और उनके बच्चे दोनों चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी खेती करे।

सर्वे के डेटा का परीक्षण करने में मार्जिन ऑफ एरर +-3 है।

देश की सवा अरब आबादी में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहती है। महिलाओं के साथ हिंसा की खबरें आए दिन सुर्खियां बनने के बीच भी 63.8 फीसदी ने माना कि उनके घरों की महिलाएं दिन के समय घर से बाहर जाने में सुरक्षित महसूस करती हैं। जबकि 24.4 प्रतिशत ने कहा कि वो महिलाओं के बाहर जाने में हर वक्त सुरक्षित महसूस करते हैं।

किसानों की जो सबसे बड़ी समस्या बन कर उभर रही है वो आवारा पशु। ये पशु मेहनत करके तैयार की गई किसानों की फसल को बर्बाद कर रहे हैं। इन पशुओं से फसलों को बचाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सर्वे के दौरान हर दूसरे किसान ने माना कि छुट्टा जानवर उनकी फसलों के लिए समस्या बन गए हैं, 44 फीसदी ने कहा छुट्टा पशु पहले समस्या नहीं थे, लेकिन अब हो गए हैं।


दुरुस्त सिंचाई व्यवस्था खेती की सबसे बड़ी मांग

बढ़ता घाटा और झंझटों के बीच किसानों का खेती के प्रति मोहभंग होता जा रहा है, फिर भी इसे सुधारा कैसे जा सकता है? इस पर 41 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अगर सिंचाई व्यवस्था में सुधार हो जाए तो कृषि पर मंडरा रहा संकट दूर हो सकता है। जबकि एक तिहाई (30%) लोग अनाज का बेहतर मूल्य मिलने को और 20 प्रतिशत ने सस्ते डीजल की उपलब्धता की जरूरत बताई।

देश में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर करने के लिए नहरों की व्यवस्था में सुधार बहुत जरूरी है। देश के हर तीसरे किसान (करीब 37%) की नई सरकार से मांग है कि देश में सिंचाई सुविधाएं बेहतर करने के लिए नहरों का दुरुस्त होना बहुत जरूरी है। 19 फीसदी ट्यूबवेल के लिए सस्ते दामों डीजल या बिजली की उपलब्धता को जरूरत मानते हैं।

गाँवों में इंटरनेट की पहुंच लगातार बढ़ती जा रही है, इस वजह से ग्रामीणों में बाहरी दुनिया से सूचनाओं का आदान-प्रदान काफी आसान हुआ है। ज्यादातर लोगों के हाथ में मोबाइल और इंटरनेट पहुंचने से उन्हें अपने काम की जानकारी पाने, या लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता।

गाँवों में सबसे अधिक इंटरनेट का उपयोग सोशल मीडिया पर सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए होता है। सर्वे के दौरान सबसे अधिक 38 प्रतिशत लोगों ने माना कि वो इंटरनेट का उपयोग फेसबुक, व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया के लिए करते हैं, जबकि 30 प्रतिशत लोग किसी भी तरह की जानकारी पाने के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैँ। पंद्रह प्रतिशत लोगों के पास ऐंड्रायड फोन ही नहीं हैं।

खेती के लिए किसान आसानी से संसाधन जुटा पाएं और समय पर खाद-बीज को खरीदने के लिए उन्हें दिक्कत न हो सरकार सस्ते ब्याज पर किसान ऋण उपलब्ध कराती है, लेकिन 59 प्रतिशत किसान किसी भी तरह का कृषि लोन नहीं ले पाते। जबकि 25 प्रतिशत 50,000 हजार से कम, 15 प्रतिशत पांच लाख से कम कृषि ऋण ले पाते हैं।

किसानों के कृषि लोन न लेने के बारे में कई कारण हो सकते हैं, एक तो उन तक जानकारी न होना, दूसरे कागजी कार्यवाही इतनी आधिक होने से वो किसी झंझट में फंसने स बचते भी हैं।

किसान अपनी खेती से कमाई का सबसे अधिक हिस्सा पारिवारिक समारोहों में खर्च करते हैं, जबकि खेती से हुई कमाई को दूसरे नंबर पर घर बनवाने और घरेलू चीजों को खरीदने में लगाते हैं। सर्वे के दौरान 27 फीसदी लोगों ने बताया कि पारिवारिक समारोहों पर खर्च करते हैं। जबकि दूसरे नंबर पर 25 प्रतिशत लोग घर बनवाने और घरेलू चीजों को खरीदने में खर्च करते हैं। मात्र 10 फीसदी ने माना कि वह खेती से कुछ बचत कर पाए।

बीमार होने पर गावों के लोग सबसे पहले सरकारी अस्पताल ही पहुंचते हैं, सर्वे के दौरान 44 फीसदी लोगों ने कहा कि वह पास के सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन अभी भी गाँव का हर तीसरा आदमी (36 प्रतिशत लोग) इलाज कराने के लिए सबसे पहले प्राइवेट डॉक्टर के पास ही पहुंचते हैं।

देश में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस की भूमिका हर स्तर पर रहती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव में लोगों को अपने अधिकारों के न पता होने के कारण थानों के चक्कर लगाते रहते हैं। ग्रामीण भारत के लिए हुए अब तक के सबसे बड़े ग्रामीण सर्वे से पता चलता है कि हर चौथे आदमी (26.1%) ने माना कि पुलिस अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करती है। जबकि 35 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पुलिस सही काम कर रही है।

(नोट: गांव कनेक्शन सर्वे की सभी फाइंडिंग पर अगल-अलग स्टोरी आपको हिंदी और अंग्रेजी में भी पढ़ने को मिलेगी)

सर्वे पर संबंधित ख़बरें अंग्रेजी में यहां पढ़िए- Ahead of #UnionBudget2019 a postcard for Modi from rural India: Survey of those ordinary Indians who you won't find in the TV studios

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