गांव कनेक्शन सर्वेः ग्रामीण भारत में लगातार बढ़ रहा इंटरनेट का प्रभाव

डेटा रेट कम होने से ग्रामीण भारत में इंटरनेट का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। लगभग 80 फीसदी ग्रामीणों ने कहा कि वे इंटरनेट का प्रयोग करते हैं।

Daya Sagar

Daya Sagar   6 July 2019 11:27 AM GMT

लखनऊ। बनकटिया गांव (संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश) की मनीषा विश्वकर्मा (15 वर्ष) इंटरनेट के माध्यम से अपना सपना पूरा करने में लगी हैं। मनीषा अपने जिले की एकमात्र महिला फुटबॉल खिलाड़ी हैं। वह अपने दीदी का मोबाइल लेकर रोनाल्डो और मेसी का वीडियो देखती हैं ताकि वह अपनी ड्रिबलिंग स्किल को और मजबूत कर सकें।

मनीषा की ही तरह हरदुआ (मध्य प्रदेश) की विभा कुमारी (17 वर्ष) के लिए अब सिलाई सीखना ज्यादा कठिन नहीं है। स्कूल और सिलाई की क्लास से लौटने के बाद वह घर आकर इंटरनेट पर भी इससे जुड़ी जानकारियां हासिल करती हैं। वह इंटरनेट के माध्यम से सिलाई की नई-नई डिजाइनिंग सीख रही हैं।

इंटरनेट 20वीं सदी का ऐसा आविष्कार है, जो 21वीं सदी में अपना प्रसार लगातार करते जा रहा है। डिजिटल क्रांति के बाद बहुत ही कम घर-गांव ऐसे हैं जो इंटरनेट से अछूते हैं। गांव कनेक्शन ने इंटरनेट और उससे जुड़े संचार माध्यमों से संबंधित एक सर्वे किया, जिसमें कुछ रोचक तथ्य उभर कर सामने आए।

गांव कनेक्शन ने 19 राज्यों के 18267 ग्रामीण लोगों पर सर्वे किया। इन 18267 लोगों में से सिर्फ 19.27% यानी 3521 लोगों ने कहा कि वे इंटरनेट का प्रयोग नहीं करते हैं। इन 3521 लोगों में से 803 लोग ऐसे हैं जिनके पास इंटरनेट प्रयोग करने के लिए संसाधन तो हैं लेकिन वे इसका प्रयोग नहीं करते जबकि 2718 लोगों के पास इंटरनेट का प्रयोग करने के लिए स्मार्टफोन या कम्प्यूटर नहीं है।


लगातार बढ़ रही है इंटरनेट यूजर्स की संख्या

पिसावां, सीतापुर (उप्र) के पिंकू पांडेय की माने तो इंटरनेट ने उनकी जिंदगी अब बहुत आसान कर दी है। रोजगार की तलाश में लगे 26 वर्षीय पिंकू को अब विभिन्न वैकेंसी का पता उनके स्मार्टफोन पर ही पता चल जाता है। उन्होंने इसके लिए अपने फोन में जॉब अलर्ट भी लगा रखा है। वह कहते हैं कि सरकारी नौकरियों की तैयारियों में भी इंटरनेट काफी मदद करता है।

पिंकू की तरह ही महोली, सीतापुर के राहुल त्रिवेदी कहते हैं कि इंटरनेट ने तो उनकी दुनिया ही बदल दी है। 2018 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भी भारत की 1 अरब 30 करोड़ आबादी में से 56 करोड़ लोग इंटरनेट का प्रयोग करते हैं।

मैकिन्जी ग्लोबल इंस्टिट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 तक भारत में इंटरनेट प्रयोग करने वाले यूजर्स की संख्या 40 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी और भारत, चीन से भी आगे निकल जाएगा। वर्तमान में भारत चीन के बाद दूसरा सबसे अधिक इंटरनेट प्रयोग करने वाला देश है। मैकिन्जी के इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में डेटा मूल्य पिछले 6 साल में 95 प्रतिशत तक कम हुआ है इसलिए इंटरनेट यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ी है।


ग्रामीण भारत में बढ़ता इंटरनेट का प्रभाव

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम के मनोहरपुर गांव की रहने वाली एलीसेबा गुरिया कहती हैं कि इंटरनेट के आने से बहुत कुछ बदलाव हुआ है। उनके गांव तक जो जानकारियां और खबरें नहीं पहुंच पाती थीं वे अब गांवों तक पहुंच रही हैं। गुरिया बताती हैं कि इंटरनेट खेती के लिए भी मददगार है। उनके गांव के कई किसान इंटरनेट के माध्यम से ही उन्नत खेती करना सीख रहे हैं।

एलीसेबा की ही गांव की सलोनी तिग्गा ने बताया कि इंटरनेट के माध्यम से उनके बच्चों की पढ़ाई बहुत आसान हो गई है। वह खुद यूट्यूब से देखकर नए-नए पकवान, आचार और मसाला बनाना सीख रही हैं। आचार-पापड़ का व्यवसाय कर उन्हें आर्थिक फायदा भी हुआ है। जबकि सलोनी की बहन सलोमी तिग्गा कई व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ी हैं। इससे उन्हें देश-दुनिया से लेकर आस-पास के जिलों और गांव-जवार की खबरें आसानी से मिल जाती हैं।

2013 के सरकारी आंकड़े के अनुसार भारत के 637,000 गांव के 75 करोड़ लोग इंटरनेट से वंचित थे लेकिन इसके बाद से लगातार बदलाव हो रहे हैं। यह बदलाव बेहतर बिजली और नेटवर्क व्यवस्था की वजह से हो रहा है। 2013 का एक रिसर्च कहता है कि जैसे-जैसे ग्रामीण भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ेगी वैसे-वैसे ही इसका सकारात्मक प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। गांव कनेक्शन का ग्रामीण भारत पर किया गया यह सर्वे इस बात की पुष्टि करता है। इस सर्वे के मुताबिक इंटरनेट के उपभोक्ता ग्रामीण भारत में लगातार बढ़े हैं और वे इसका प्रयोग मनोरंजन से लेकर ज्ञानवर्धन में कर रहे हैं।


Kantar IMRB ICUBE की 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार 56 करोड़ में से 87 प्रतिशत यानी 49.3 करोड़ भारतीय इंटरनेट के नियमित यूजर हैं। इसमें से 29.3 करोड़ यूजर शहरी जबकि 20 करोड़ यूजर ग्रामीण भारत से संबंधित हैं। इन 49.3 करोड़ लोगों में से 97 प्रतिशत लोग इंटरनेट का प्रयोग मोबाइल पर करते हैं, इससे पता चलता है कि ग्रामीण अंचलों और कम आय लोगों के बीच में इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है।

यह रिपोर्ट कहती है कि ग्रामीण भारत में लगातार इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़ रही है। 2015 में जहां ग्रामीण इंटरनेट यूजर्स की संख्या कुल 9 प्रतिशत थी, वह 2018 में बढ़कर 25 प्रतिशत हो गई। सिर्फ 2018 में ग्रामीण इंटरनेट यूजर्स की संख्या 2017 के मुकाबले 35 प्रतिशत तक बढ़ी है। यह रिपोर्ट दावा करता है कि 2019 के अंत तक आते-आते ग्रामीण इंटरनेट यूजर्स की संख्या 20 करोड़ से बढ़कर 29 करोड़ हो जाएगी। वहीं बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक और रिपोर्ट कहती है कि 2020 तक भारत में ग्रामीण और शहरी इंटरनेट यूजर्स की संख्या बराबर हो जाएगी।

गांव कनेक्शन ने जो सर्वे किया है वह पूर्णतया ग्रामीण भारत पर आधारित है और वह भी इन्हीं बातों को साबित करता है। योजनाओं के मुताबिक सरकार जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉड-बैण्ड सेवा शुरू करने जा रही है, जिससे ग्रामीण भारत इंटरनेट से और सरलता से जुड़े। इसके लिए इंटरनेट को केबल टीवी से कनेक्ट कराये जाने की सरकार की योजना है।


सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव

गांव कनेक्शन ने जो सर्वे किया है उसके मुताबिक 18267 में से लगभग 80 प्रतिशत लोग विभिन्न माध्यमों द्वारा इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। इंटरनेट का प्रयोग करने वाले इन 15549 लोगों में से 6883 लोगों ने बताया कि वे इंटरनेट का प्रयोग केवल फेसबुक, व्हाट्सएप्प और अन्य सोशल मीडिया साइट्स के लिए करते हैं। जबकि 5440 अन्य लोगों ने कहा कि वे इंटरनेट का प्रयोग सोशल मीडिया के साथ-साथ अपनी जानकारी बढ़ाने और नई चीजों के बारे में जानने के लिए करते हैं। वहीं 2403 लोगों ने कहा कि वे इंटरनेट का प्रयोग अधिकतर वीडियो देखने के लिए करते हैं।

फेसबुक और व्हाट्सएप की डाटा के अनुसार भारत में लगातार इसके यूजर्स बढ़ रहे हैं। भारत में कुल 35 करोड़ लोग एक्टिव सोशल मीडिया यूजर हैं। फेसबुक सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है जिसका प्रयोग भारतीय करते हैं। फेसबुक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार कुल 30 करोड़ भारतीय फेसबुक पर ऐक्टिवेट हैं। वहीं फेसबुक की ही स्वामित्व वाली मैसेंजर एप्प व्हाट्सएप पर लगभग 20 करोड़ भारतीय हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है।


शिक्षित लोगों में कम है सोशल मीडिया के प्रयोग का चलन

गांव कनेक्शन के इस सर्वे में यह ट्रेंड देखा गया कि शिक्षा के स्तर के आधार पर लोग इंटरनेट की उपयोगिता का निर्धारण कर रहे हैं। मसलन जो लोग ग्रेजुएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त किए हैं वे लोग इंटरनेट का प्रयोग जानकारियां हासिल करने के लिए अधिक करते हैं। वहीं जो लोग कम पढ़े-लिखे या निरक्षर हैं वे लोग इंटरनेट का प्रयोग सोशल मीडिया मसलन- व्हाटसएप्प, फेसबुक और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे-टिक टॉक आदि का प्रयोग करने के लिए करते हैं।

इन 18267 लोगों में ग्रेजुएशन के ऊपर या प्रोफेशनल डिग्री ले रहे लोगों में से सिर्फ 90 लोग ही ऐसे हैं जो कि वीडियो देखने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। वहीं सोशल मीडिया के प्रयोग के मामले में भी पोस्ट ग्रेजुएट और प्रोफेशनल डिग्री होल्डर लोग अधिक उत्साहित नजर नहीं आते हैं। इन 18267 में से सिर्फ 373 लोग ऐसे मिले जिनके पास पोस्ट ग्रेजुएट या प्रोफेशनल डिग्री हो और वे सोशल मीडिया के एक्टिव यूजर हैं।

वहीं निरक्षर या कम-पढ़े लिखे लोगों में इंटरनेट का प्रयोग मनोरंजन के लिए अधिक किया जाता है। वे इंटरनेट का प्रयोग वीडियो देखने और सोशल मीडिया के प्रयोग करने का चलन बढ़ा है। गांव कनेक्शन के सर्वे में 373 लोग ऐसे मिले जो कि निरक्षर होने के बावजूद एक्टिव फेसबुक और व्हाटसएप्प यूजर हैं जबकि 300 निरक्षर लोग ऐसे मिले जो कि वीडियो देखने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करते हैं।


जेंडर बराबरी की तरफ बढ़ते कदम

गूगल की एक रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट के उपयोग से महिला सशक्तिकरण को एक नई दिशा मिली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं दिन प्रतिदिन की खबरों के प्रति अधिक जागरूक हुई हैं। स्मार्ट फोन के आने से सोशल मीडिया तक भी महिलाओं की पहुंच बढ़ी है। गांव कनेक्शन के सर्वे में महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे मनोरंजन के लिए, वीडियो देखने के लिए और सोशल मीडिया का प्रयोग करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करती हैं। हालांकि ग्रामीण भारत में अभी भी ऐसी महिलाओं की संख्या काफी कम है।

Kantar IMRB ICUBE की रिपोर्ट भी कहती है कि पिछले एक साल में इंटरनेट बहुत तेजी से जेंडर बराबरी की तरफ कदम बढ़ा रहा है। 2018 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारत में इंटरनेट के कुल यूजर्स में से 42 प्रतिशत यूजर्स महिलाएं हैं। एक्टिव यूजर्स के मामले में भी महिलाएं पुरूषों के कंधे से कंधा मिला रही हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक जहां पुरूष हर दिन 78 मिनट फेसबुक पर बिताते हैं, वहीं महिलाएं 77 मिनट इंटरनेट पर बिताती हैं।


साइबर क्राइम का भी बढ़ रहा खतरा

साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन कहते हैं कि यह ट्रेंड ग्रामीण भारत के लिए बहुत अच्छा है कि गांव के लोग इंटरनेट के माध्यम से बाहरी दुनिया से जुड़ रहे हैं। इंटरनेट का प्रयोग गांव के लोगों को पढ़ाने, उन्हें सुरक्षित और जागरूक रहने के लिए किया जा सकता है।

रक्षित टंडन आगे कहते हैं कि लेकिन ग्रामीणों को इनका इस्तेमाल बहुत ही सावधानी से करना होगा। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की साल 2017 की डाटा के अनुसार उस साल 53000 से अधिक साइबर क्राइम के मामले दर्ज हुए। रक्षित टंडन भी इसी तरफ ध्यान दिलाना चाहते हैं।



वह कहते हैं, "यह डाटा थोड़ा सा डरावना भी है क्योंकि लोग बिना जागरूकता के इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं। इसकी वजह से ग्रामीण लोगों के ठगे जाने का भी खतरा बढ़ा है। इसके अलावा सोशल मीडिया के अतिशय प्रयोग से सोशल फैब्रिक भी प्रभावित हो रहा है। व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज आने से लड़ाई-झगड़े और यहां तक की झगड़े की नौबत आ जाती है।"

रक्षित कहते हैं कि इसके लिए सभी लोगों को इंटरनेट का प्रयोग बहुत ही सावधानी और जागरूकता से जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत सरकार की एक छोटी सी पुस्तिका भी आती है जिसके द्वारा आप इंटरनेट के सही प्रयोग के गुर को सीख सकते हैं। यह पुस्तिका हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में 'डिजिटल इंडिया' की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

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