गंगाघाट रेलवे स्टेशन में ज़मीन पर बैठने को मजबूर यात्री

गंगाघाट रेलवे स्टेशन में ज़मीन पर बैठने को मजबूर यात्रीगाँव कनेक्शन

शुक्लागंज (उन्नाव)। गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है, यहां यात्रियों के लिए न ही बैठने की जगह है और न ही कड़ी धूप से बचने के लिए छांव की व्यवस्था है। रेलवे टैक पार करने के लिए यहां ऊपरीगामी पुल भी नहीं है। यह हाल तब है जब यात्रियों से माह में लगभग 12 लाख रुपये रेलवे कमाता है।

जिला मुख्यालस से 16 किमी दूर पश्चिम दिशा में गंगाघाट रेलवे स्टेशन है जहां पर पिछले करीब पांच सालों में ट्रेनों कि संख्या तो बढ़ती गईं, लेकिन गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का ग्राफ  नहीं बढ़ा। ऐसे में एक यात्री को एक टिकट प्राप्त करने में घंटो तक लाइन में लगना भी आम हो गया है। जबकि टिकट काउण्टरों की संख्या वही है जो लगभग पांच साल पहले थी। इसमें भी अगर यात्री के पास फुटकर पैसे नहीं है तो उससे पहले तो यह कह दिया जाता है कि पैसे फुटकर लेकर आओ, अगर यात्री पैसे फुटकर नहीं दे पाता तो उसे टिकट भी नहीं मिल पाती। ऐसे में ये सब छोटी-छोटी परेशानियां यात्रियों के लिए सिरदर्द बनी है। पूछताछ केन्द्र के नाम पर आज भी यात्रियों को अपनी ट्रेन की जानकारी हासिल करने के लिए पहले तो यात्री 10 मिनट बर्बाद करता है उसके बाद काउण्टर पर बैठे बाबू सही समय सारिणी नहीं बता पाते है।

लखनऊ की प्रतिदिन यात्रा करने वाले शुक्लागंज निवासी राम नरेश बताते हैं, ''मैं यहां से करीब 15 वर्षों से लखनऊ के लिए डेली पसेंजरी करता हूं। कानपुर व उन्नाव के बीच मुख्य रेलवे स्टेशन के रूप में गंगाघाट स्टेशन को जाना जाता है। स्टेशन में अव्यवस्थाओं के कारण पूर्व में रोज करीब तीन हजार यात्रियों का स्वागत करने वाले स्टेशन में इस समय यात्रियों की संख्या घट कर औसतन प्रति दिन दो हजार रह गई है।''

राम नरेश आगे बताते हैं, ''असुविधाओं के कारण गंगाघाट रेलवे स्टेशन की बजाय अब यात्री   निजी साधनों या फिर टैक्सी से सीधे कानपुर उन्नाव    जा रहे हैं।''

खानपान के लिए नहीं है कैन्टीन

गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर जब भी कोई यात्री कहीं से यात्रा कर वापस लौटता है तो उसे खाने-पीने के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को कुछ भी खाने-पीने के लिए अवैध वेन्डरों का शिकार होना पड़ता है।

घंटी बजे तो समझो आ रही ट्रेन

गंगाघाट रेलवे स्टेशन से अगर आप यात्रा करना चाहते तो, पहले आप को कुछ बातों को सीखना पड़ेगा। बता दे कि गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर आज भी ट्रेने आने से पहले घंटी बजाई जाती है। अगर घंटी एक बार बजे तो समझों ट्रेन पिछले स्टेशन से निकल चुकी है और जब दोबारा बजे तो समझ लो कि गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने वाली है। लेकिन घंटी कि आवाज से यात्रीयों को यह जानकारी नहीं मिल पाती है कि स्टेशन पर कौन सी ट्रेन आने वाली है और कहां को जाएगी।

रिजर्वेशन कराना तो गंगाघाट रेलवे स्टेशन न जाना

कहने को तो गंगाघाट रेलवे स्टेशन को बी श्रेणी का दर्जा दे दिया गया पर गंगाघाट स्टेशन में सुविधाओं को लेकर अन्य श्रेणियों से दूर है। गंगाघाट रेलवे स्टेशन को बी श्रेणी का दर्जा देकर विभिन्न प्रकार की सुविधाएं यात्रियों को देने के लिए बनाया गया था पर हकीकत कुछ और ही बयां करती है। एक माह से करीब रोजाना स्टेशन जाकर यात्रियों से सुविधाओं के हालचाल लेते रहे हैं। लेकिन यात्रियों की माने तो गंगाघाट स्टेशन को बी श्रेणी मिलने के बावजूद भी उन्हे आज तक किसी भी प्रकार का कोई लाभ नही मिला। वहीं यात्रियों की माने तो करीब छ: माह पूर्व गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर टर्फ  बदलने वाले कार्यों का जायजा लिया था। साथ ही साथ यात्रियों ने डीआरएम को एक लिखित पत्र देकर गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर ही एमएसटी बनने व कुछ एक्सप्रेस टे्रनों को रोकने की मांग की थी। डीआरएम ने यात्रियों से पत्र लेकर इन सुविधाओं को जल्द से जल्द देने का वादा किया था। तब से लेकर आज तक यात्रियों को किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिल सकी। वहीं दूसरी ओर गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन की सुविधा तो उपलब्ध पर है पर पिछले कई माह से यात्री रिजर्वेशन कराने तो आते है पर उन्हे सर्वर व तकनीकि खराबी बताकर वापस लौटा दिया जाता है। 

एक नज़र

  1. यात्रियों की संख्या प्रतिदिन लगभग 2000
  2. एक माह की रेलवे की कमाई लगभग 10 लाख
  3. गंगाघाट रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों की कुल संख्या लगभग 300
  4. गंगाघाट रेलवे स्टेशन रुकने वाली ट्रेन लगभग 38 
  5. प्लेटफार्मों की संख्या कुल चार, लेकिन नहीं है, ऊपरीगामी पुल
  6. बैठने की कुल सीट दो
  7. अभी तक नहीं है ट्रेनों के एनाउंसमेंट की सुविधा

रिपोर्टर - विशाल मौर्य

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