ग्रामीणों की सूझ-बूझ से कानपुर में गंगा नही हो रही मैली

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सीताराम मानाताला (कानपुर नगर)। गंगा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब ग्रामीणों ने नई पहल की है। गंगा किनारे बसे इन गाँवों के लोगों ने गाँव में एक फिल्टर चैंबर का निर्माण करवाया है, जिससे बारिश और नालियों का पानी अब फिल्टर होकर गंगा नदी में जा रहा है।

गंगा नदी पांच राज्यों से होकर गुजरती है, जिसमें प्रतिदिन उत्तराखंड में लगभग 44 करोड़ लीटर उत्तरप्रदेश में 327 करोड़ लीटर, बिहार में 40 करोड़ लीटर और पश्चिम बंगाल में 178 करोड़ लीटर सीवेज और फैकि्ट्रयों का प्रदूषित पानी गिरता है। 

कानपुर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर शिवराजपुर ब्लॉक का सीताराम मानाताला गाँव गंगा के किनारे बसा है। नदी के किनारे गाँव होने के कारण गाँव का सारा गंदा पानी सीधे नदी में छोड़ दिया जाता है। सीताराम मानाताला गाँव निवासी हरिश्चंद्र (53 वर्ष) बताते हैं, “पिछले कई वर्षों से गाँव की नालियों का पानी सीधे गंगा नदी में गिरता था और इससे गंगा का पानी प्रदूषित हो रहा था, जिस गंगा को पवित्र मानकर हम अपने घरों में पूजा के लिए इस्तेमाल करते हैं, उसी गंगा को आस-पास के गाँवों के लोग दूषित कर रहे थे, पर अब हम लोग ये मुहिम चला रहे हैं इससे हम गंगा को दूषित होने से बचाएंगे।”

गाँव में इन चैम्बरों का निर्माण गैर सरकारी संस्था डब्लूडब्लूएफ एक प्रोजेक्ट के तहत कराया जा रहा है। डब्लूडब्लूएफ प्रोजेक्ट के जिला समन्यवक राजेश वाजपेयी कहते हैं, “गंगा नदी के किनारे कम से कम 29 बड़े शहर, 70 कस्बे और हजारों गाँव स्थित हैं, अगर सभी लोग मिलकर गंगा को निर्मल बनाने के अभियान में शामिल हो तभी हम इन आंकड़ों को समाप्त कर सकते हैं। हम लोग अभी छह जिलों (जहां से गंगा गुजरती है) बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, कानपुर और फतेहपुर में इस अभियान को चला रहे हैं। इन जिलों में अभी तक गंगा किनारे 16 चैंबरों का निर्माण कराया जा चुका है।

 वो आगे बताते हैं, “सोख्ता युक्त फिल्टर चैम्बर गंगा के किनारे वाले गाँवों में कई जिलों में बनवाए जा रहे हैं। इन चैम्बर को बनवाने से पहले उन गाँवों के लोगों को गंगा को स्व्ाच्छ रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है, इसके बाद गाँव के ही लोगों को फिल्टर चैंबर की देखरेख की जिम्मेदारी भी सौंपी जा रही है। हम लोग प्रधान से अपील कर रहे हैं कि मनरेगा की मद से इन चैंबरों की निर्माण करवाया जाए ताकि उसकी अच्छे से देखरेख की जा सके।

ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर सोमनाथ शुक्ला इस प्रोजेक्ट के बारे में बताते हैं, “जब गंगा की सफाई का काम शुरू हुआ तो सबसे ज्यादा गंदगी गंगा के आस-पास के गाँवों के पास मिली, इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी हो गया की इन गाँवों को इस सफाई अभियान में सबसे पहले शामिल किया जाए।”

इसी गाँव के बलराम (54 वर्ष) के बताते हैं, “पहले हम गाँव के लोग भगवान की मूर्तियां और हवन सामग्री का विसर्जन गंगा नदी में करते थे लेकिन जबसे हमे जानकारी मिली है कि अगर हमने गंगा नदी को साफ़ न रखा तो हम घातक बीमारी की चपेट में आ जाएंगे, तभी से हम उन मूर्तियों और हवन सामग्री को गड्ढे में खोदकर विसर्जित कर देते हैं। अब तो ये फ़िल्टर चैम्बर हमारे लिए वरदान साबित होगा क्योंकि गाँव का गन्दा पानी अब सीधे गंगा नदी में नहीं गिरेगा ।

नीतू सिंह 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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