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गरीब बच्चों को मिलेगा अब अपनी पसंद के स्कूल में दाखिला

गरीब बच्चों को मिलेगा अब अपनी पसंद के स्कूल में दाखिलागाँव कनेक्शन

लखनऊ। अमूमन परिवारों की तरह ही सीता देवी (35 वर्ष) को भरोसा है कि उनके चारों बच्चे बड़े होकर उनका नाम रौशन करेगें क्योंकि उनका दाखिला अब शहर के अच्छे स्कूल में हो गया है।

लखनऊ की रहने वाली सीता देवी के बच्चों का दाखिला पिछले वर्ष रानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज में हुआ था। वो बताती हैं, ''हर मां बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ें लेकिन आमदनी कम होने के कारण बच्चों का दाखिला पास के स्कूल में करा दिया था जहां की फीस 150 रूपये प्रति माह थी लेकिन वो भी हम समय से नहीं भर पाते थे और स्कूल वालों की नाराजगी बच्चों को झेलनी पड़ती थी। अब तसल्ली हुई कि बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं।’’

दरअसल 'शिक्षा का अधिकार’ अधिनियम लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिले की अनिवार्यता कर दी थी। राज्य सरकार को इसके एवज में फीस आदि पर आने वाल खर्च सीधे स्कूलों को देना था। 

पिछले पांच वर्षों से राइट टू एजुकेशन के तहत गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रयास कर रहा अभ्युदय फांउडेशन के आमिर हुसैन बताते हैं, ''पिछले वर्ष 26 दिनों के अंदर पूरे 4400 दाखिले हुए थे और लखनऊ में 800 दाखिले हुए थे। इस बार हमारा लक्ष्य है कम से कम 1500 एडमिशन करवाने का। अभिवावक बीएसए ऑफिस से जाकर फार्म ले सकते हैं।’’ आमिर आगे बताते हैं, ''इस बार सभी जिलों को लक्ष्य दे दिया जाएगा कि वो इतने दाखिले तो कम से कम कराएं ही। ये आदेश जल्द ही मुख्य सचिव की तरफ से आयेगा।’’

कक्षा एक में पढ़ने वाले मयंक (7 वर्ष) को अब स्कूल जाना अच्छा लगता है वहां उसके अच्छे दोस्त भी बन गए हैं। वो बताता है, ''मैं अब रोज स्कूल जाता हूं, नया स्कूल बहुत बड़ा है। मैडम लोग भी अच्छी हैं।’’

भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013-14 में देशभर के प्राइवेट स्कूलों में कुल 21 लाख सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित थीं लेकिन केवल 29 फीसदी सीटें ही भर पाईं। उत्तर प्रदेश की हालत काफी बुरी है, इस नियम के तहत सूबे में महज तीन प्रतिशत दाखिले ही हुए।

रटीई के तहत 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चे को कक्षा एक में दाखिला दिया जाएगा और वह कक्षा आठ तक उसी स्कूल में निशुल्क पढ़ सकता है। इनकी फ़ीसदी की भरपाई सरकार 400 रुपए प्रतिमाह करती है।'' नियम के बावजूद भी प्राइवेट स्कूल गरीब बच्चों का एडमिशन लेने से मना करते हैं क्योंकि उन्हें पता है इससे स्कूल को पूरी लिखा पढ़ी और रिकार्ड रखना होगा जबकि अभी वो मनमानी फीस वसूलते हैं और सारे मानको को नहीं पूरा करते हैं।’’ शमीना बानो बताती हैं, जो अभ्युदय फांउडेशन की सदस्य हैं।

आकाश कुमार (42 वर्ष) के दो बच्चों का दाखिला पिछले वर्ष सिटी मांटेसरी स्कूल में बड़ी मुश्किल से हुआ था लेकिन अब बच्चों को वहां अच्छी शिक्षा मिल रही है। वो बताते हैं , ''मेरी आमदनी बहुत कम थी लेकिन बेटे में प्रतिभा थी उसका दिमाग बहुत तेज था इसलिए हमने संस्था की मदद से उसका दाखिला करा दिया अब वो अच्छे से पढ़ रहा है।’’

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