गरीबों के लिए ज़मानत नियमों पर 21वां विधि आयोग देगा सुझाव

गरीबों के लिए ज़मानत नियमों पर 21वां विधि आयोग देगा सुझावGaon Connection

नई दिल्ली (भाषा)। गरीबों के लिए जमानत नियम और आसान हो सकते हैं। ज़मानत दिए जाने के मुद्दे पर एकसमान नियमों की जरूरत का सरकार द्वारा पक्ष लिए जाने के बाद 21वें विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी एस चौहान ने कहा है कि इस मुद्दे पर न्यायाधीशों के लिए दिशानिर्देश की ज़रूरत नहीं है, लेकिन फिर भी आयोग ऐसे तरीकों की सिफारिश करेगा जिससे सुनिश्चित हो सके कि गरीबों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।

हालांकि, न्यायमूर्ति चौहान ने ये भी कहा कि वो ज़मानत दिए जाने के मुद्दे पर न्यायाधीशों के लिए दिशानिर्देशों के विचार को खारिज नहीं कर रहे और आयोग इस पर गौर करेगा। विधि आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष न्यायमूर्ति चौहान ने कहा, "एक वकील और एक न्यायाधीश के तौर पर मेरा अनुभव ये रहा था कि किसी मामले के तथ्यों पर निर्भर करते हुए ये अदालत का विवेकाधिकार होता है। अदालत आधे सेकंड में तय कर लेती है कि जमानत दी जानी चाहिए कि नहीं, चाहे ये जमानत देने का उचित मामला हो या नहीं।" उन्होंने कहा कि एकमात्र मुश्किल ये है कि कानूनी सहायता या धन के अभाव में गरीबों को ज़मानत नहीं मिल पाती। न्यायमूर्ति चौहान ने कहा, "कभी-कभी वो मुचलका नहीं ला पाते। अगर अदालत उन्हें जमानत दे भी देती है, तो वो रिहा नहीं किए जा सकते। हम सिर्फ इन बिंदुओं पर सुझाव दे सकते हैं, लेकिन न्यायाधीशों के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं हो सकता।" 

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