गुलबर्ग सोसाइटी मामलाः 14 वर्ष बाद 24 दोषी करार

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अहमदाबाद (भाषा)। एक विशेष अदालत ने अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोगों के जघन्य नरसंहार के 14 साल बाद 66 आरोपियों में से गुरुवार 24 को दोषी ठहराया। इनमें 11 को हत्या का दोषी पाया गया। किन्तु सभी के विरुद्ध षड्यंत्र के आरोप हटा लिये गए।

विशेष न्यायालय के न्यायाधीश पीबी देसाई ने भाजपा पार्षद विपिन पटेल समेत 36 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत आरोपों को वैध ठहराया गया, जबकि उन पर लगाए गये साजिश रचने के आरोप (120बी) को हटा दिया गया। भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी को हटाते हुए अदालत ने कहा कि मामले में आपराधिक साजिश रचे जाने का कोई साक्ष्य  नहीं है।

विश्व हिंदु परिषद (विहिप) नेता अतुल वैद्य सहित 13 अन्य को अपेक्षाकृत हल्के आरोपों में दोषी ठहराया गया। मामले में दोषी ठहराये गये लोगों को छह जून को सजा सुनायी जायेगी। गुलबर्ग सोसाइटी मामले से पूरा देश तब स्तब्ध रह गया था, जब अहमदाबाद के बीचों बीच स्थित इस सोसाइटी पर हमला कर 400 लोगों की भीड़ ने पूर्व सांसद एहसान ज़ाफरी सहित वहां के निवासियों की हत्या कर दी थी। यह घटना 2002 के गुजरात दंगों के संबंध में दर्ज नौ मामलों में शामिल थी, जिनकी जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी जांच कर रही थी।

इस घटना से एक दिन पहले साबरमती एक्सप्रेस की एस-6 कोच को 27 फरवरी 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन के पास जला दिया गया, जिसमें 58 कारसेवक मारे गये थे। विहिप नेता अतुल वैद्य को भी इस मामले में दोषी ठहराया गया है। कांग्रेस पार्षद मेघ सिंह चौधरी एवं इलाके के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक केजी एरडा को दोषमुक्त करार दिया गया है। मामले की निगरानी कर रहे उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी अदालत को 31 मई तक अपना फैसला सुनाने का निर्देश दिया था। इस मामले में एसआईटी द्वारा आरोपी बनाये गये 66 लोगों में से नौ पहले से ही जेल में बंद हैं, जबकि अन्य जमानत पर बाहर हैं। अदालती फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एहसान जाफरी की पत्नी ज़ाकिया ज़ाफरी ने इस फैसले पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि सभी को दंडित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने लोगों को मारा और उनकी संपत्ति नष्ट की।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उन्हें स्वयं अपनी आंखों से यह सब करते हुए देखा।’’ उन्होंने कहा कि एक महिला के रुप में उनमें मृत्युदंड मांगने का साहस नहीं है किन्तु उन्हें कठोर दंड मिलना चाहिए। उनके पुत्र तनवीर जाफरी ने कहा कि वह इस बारे में अपने वकील से बात करेंगे कि 36 अन्य को बरी कैसे कर दिया गया और अपनी अगली रणनीति तैयार करेंगे। तनवीर ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जब दंगे में 400 लोग शामिल थे तो केवल 24 लोगों को दोषी कैसे ठहराया गया। 

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