गुमशुदा बच्चों को घर वापस लाने का अभियान 'ऑपरेशन स्माइल-2'

गुमशुदा बच्चों को घर वापस लाने का अभियान ऑपरेशन स्माइल-2गाँव कनेक्शन, आॅपरेशन स्माइल

बाराबंकी। हेमलता (काल्पनिक नाम) याद करती है तो सिहर कर उनकी आंखों से आंसू निकल पड़ते है। जब उनकी बिटिया घर से लापता हो गयी थी। लेकिन पुलिस और चाइल्ड लाइन संस्था के संयुक्त प्रयास ने हेमलता को उनकी बेटी से मिला दिया।

एक मां और उसके परिवार के लिए उसका बच्चा क्या है? यह वही अच्छे से जान सकता है जिसका बच्चा खो गया हों। लेकिन लापता बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का काम केन्द्र सरकार की योजना “आॅपरेशन स्माइल” ने कर दिखाया है। अब पूरे देश में इस अभियान का दूसरा भाग शुरू हो गया है। 

जिला मुख्यालय सेें 5 किमी की दूरी पर रहने वाली हेमलता बताती है, “पिछले साल सावन में बिटिया शालू (10 वर्ष) लापता हो गयी थी। वह पढ़ने में बहुत होनहार है। लेकिन उस दिन मास्टरनी ने डांटा और कही कि अगर कल काम पूरा करके नही आओगी तो अच्छा नही होगा। इस बात से बिटिया इतना डर गयी कि छुट्टी के बाद वह घर नही आयी। घर के पास रेलवे स्टेशन पर जाकर प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन में चढ़ गई।” 

’गांव कनेक्शन’ के संवाददाता ने जब शालू से पूछा तो वह सहमी हुई बताती है कि, “ट्रेन जब कानपुर के आगे निकली तो मुझे डर लगना शुरू हो गया लेकिन मैं चुपचाप गाड़ी में बैठी रही। लोग मुझे भिखारी समझकर कुछ पैसे भी दिए लेकिन मैं कुछ भी नही बोल पायी। बस स्टेशन पर उतरकर पानी पी लेती थी। गाड़ी 3 दिन बाद एक शहर में जाकर खड़ी हो गयी। तब एक आदमी ने बोला कि यही उतर लो। मैं प्लेटफार्म पर बैठी रो रही थी। वही एक पुलिस वाले ने मुझसे पूछा कि क्या हुआ। मैं डर की वजह से कुछ बोल नही सकी। फिर वो मुझे रेलवे के पुलिस स्टेशन ले गए।”

इधर घर पर न आने पर शालू के पिता रमेश (काल्पनिक नाम) बताते है, “उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। साथ ही चाइल्ड लाइन के अखिलेश शुक्ला को भी बताया।” पुलिस ने सभी जगह बच्ची की गुमशुदगी की सूचना भेज दी। छह दिन बाद अहमदाबाद से रेलवे पुलिस का फोन आया जिसने बताया कि एक बच्ची वहां पर मिली है जिसे वही के चाइल्ड लाइन भेज दिया गया है। बाराबंकी से पुलिस और चाइल्ड लाइन की एक टीम अहमदाबाद गयी, जहां से बच्ची को सुरक्षित घर लाया गया। 

यह एक घटना नही है। ऐसे हजारों की संख्या में बच्चे लापता हो रहे हैं, जिनकी खोज के लिए सरकार प्रयास कर रही है। पिछले वर्ष 'आॅपरेषन स्माइल' के जरिए 9,146 बच्चों को छुड़ाकर पुर्नवास केन्द्र पहुंचाया गया था। इसके साथ 'आॅपरेशन मुस्कान' में 1,972 बच्चें छुड़ाए गए। इस अभियान की सफलता के बाद एक बार फिर से पूरे देश में गुमशुदा बच्चों की खोज के लिए केन्द्र सरकार 'आॅपरेशन स्माइल 2' शुरू किया है। यह अभियान 1 जनवरी से 31 जनवरी तक पूरे देश में शुरू हो गया।

प्रदेश में आॅपरेशन स्माइल को देख रहे आई.जी.आर. के. स्वर्णकार ने बताया कि, “हमारी पुलिस सक्षम है कि वह लापता बच्चों को ढूंढ लाए साथ ही जरूरत पड़ने पर बच्चों पर कार्य कर रही संस्थाओं से भी मदद ली जाती है। लापता बच्चों की सूचना जहां से भी मिलती है, उस पर तुरन्त कारवाई की जाती है।" आगे बताते है, "इस आॅपरेशन से सम्बंधित डाटा महिला सम्मान प्रकोष्ठ में रखा जाता है। लापता बच्चों की सूचना प्रदेशों में स्थित बाल कल्याण समिति से मिलती है, जहां से निर्णय किया जाता है कि बच्चों को बाल संरक्षण गृह भेजा या कहीं दूसरी जगह रखा जाए।” 

क्या है आॅपरेशन स्माइल?

पिछले साल एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत केन्द्र सरकार ने आॅपरेशन स्माइल चलाया था। जिसने पूरे देश में लापता बच्चों को ढ़ूढ़ने का काम किया था। यह आॅपरेशन 9 राज्यों के 28 शहर में चलाया गया था। जिसमें राज्यों की पुलिस का सहयोग लिया गया। इसके तहत पुलिस को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें बच्चों की गुमशुदगी और संरक्षण से संबंधित जानकारी दी जाती है।बच्चों के लापता होने का रिकार्ड अलग-अलग स्तर पर रखा जाता है। यह राष्ट्रीय स्तर पर एन.सी.आर.बी, राज्य स्तर पर एस.सी.आर.बी और जिला स्तर पर डी.सी.आर.बी के पास होता है। इसके तहत गुमशुदा बच्चों का विवरण डाटा के रूप में वेबसाइट पर होती है। 

कम नही है लापता बच्चों की संख्या

उत्तर प्रदेश स्टेट पोर्टलेट के अनुसार अकेले उत्तर प्रदेष में कुल लापता बच्चों की संख्या 23,314 है, जिसमें से 14,530 बच्चों को सुरक्षित खोजा जा चुका है। 2015 में कुल लापता बच्चों की संख्या 2144 थी, जिसमें से पुलिस ने 1287 बच्चों को छुड़ाया है।

इस तरह के अभियान के जरिए सरकार ने इस वर्श भी ऐसे अनेक परिवारों के अन्दर उम्मीद की किरण जगाई हैं, जो अपने बच्चों की राह देख रहे है। सरकार का यह कदम एक ऐसा प्रयास है जिसके द्वारा लापता बच्चों को ढ़ूढ़ना आसान हुआ है।     

ग्रेटर नोएडा में आॅपरेशन स्माइल के जरिए 58 लापता बच्चों को पिछले हफ्ते छुड़ाया गया। जिसमें 26 बच्चें ग्रामीण और 22 बच्चों को नगरीय क्षेत्रों से और 10 बच्चें शहर के अलग-अलग कोनों से छुड़ाए गए। यह बच्चे इंटों के भट्टों, बस और रेलवे स्टेशन पर स्थित दुकानों पर काम कर रहे थे।   

रिपोर्टिंग - सुप्रिया श्रीवास्तव 

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