हादसे के बाद संवार रही महिलाओं की जि़ंदगी

हादसे के बाद संवार रही महिलाओं की जि़ंदगीgaonconnection

टूड़ीखेड़ा (लखनऊ)। बिजली हादसे में अपना एक हाथ लगभग गँवा चुकी बंथरा के एक गाँव में रहने वाली ममता यादव साक्षरता की अलख जगा रही है। उसने अपने गाँव में एक साक्षरता केंद्र खोला है जिसमें वह 25 महिलाओं को पढ़ना-लिखना सिखाती है।

बिजनौर रोड पर राजधानी से करीब 40 किलोमीटर दूर ये गांव है जहां ममता यादव अपना केंद्र चलाती है। पिछले साल की बात है जब वह अपने घर में एक दिन टीवी चलाने जा रही थी कि अचानक घरेलू की जगह हाइटेंशन लाइन का करंट वायरिंग में दौड़ गया जिससे ममता बुरी तरह से झुलस गई थी।

उसका इलाज चला। बीमार पिता और भाइयों ने सारी जमा पूंजी लगा कर उसका इलाज करवाया। इसके बावजूद दाहिने हाथ ने काम करना शुरू नहीं किया। आखिरकार ममता ने अब ठीक होने के बाद एक नये लक्ष्य पर ही काम करना शुरू कर दिया है। 

ग्लोबल ड्रीम्ज प्रोजेक्ट के तहत ममता अब साक्षरता की रोशनी फैला रही है। उसने अपने घर पर बुजुर्गों की शिक्षा का एक केंद्र खोला है।

इस केंद्र में वह करीब 25 महिलाओं के दो बैच संचालित कर रही है। यहां राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत महिलाओं को साक्षर होने का प्रमाणपत्र भी दिया जा रहा है। तीन बैच की पढ़ाई पूरी हो गई है। इसमें महिलाओं को उनका नाम लिखना, दस्तखत करना, अक्षर लिखना और पहचानना, अपने घर का पता लिखना आदि सिखाया गया है। 

रिपोर्टर - ऋषि मिश्र

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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