हाईब्रिड मक्के की खेती से किसानों को हो रहा नुकसान

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रविन्द्रपुरम (कानपुर देहात)। किसान सर्वेश कुशवाहा को इस बार तीन बीघे खेत में मक्का बोने में दस हजार रुपए की लागत आई पर जब पैदावार हुई है तो लागत निकलना भी मुश्किल हो गया।

पिछले दो वर्षों के सूखे की वजह से किसान परेशान हैं, वहीं जायद की फसल में भी अच्छी पैदावार नहीं मिल रही है। कानपुर देहात जिला मुख्यालय से लगभग  40 किमी दूर मैथा ब्लॉक के रविन्द्रपुरम गाँव के कई किसानों ने मक्का बोया था।

इस गाँव में रहने वाले सर्वेश कुशवाहा (60 वर्ष) बताते हैं, “मैंने इस बार तीन बीघा मक्का बोया था। एक बीघा में 10 हजार रुपए लागत आई है और एक बीघा में सिर्फ 18 कुंतल मक्का पैदा हुई है, जिसका बाजार भाव इस समय सवा तेरह सौ रुपए प्रति कुंतल है। पैदावर तो ठीक ठाक हुई है लेकिन लागत भी बहुत लगी है।” 

फ़ूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट 2014 के अनुसार भारत में हर वर्ष सालाना 42.3 मिलियन मैट्रिक टन मक्का पैदा होती है, इसका उत्पादन उत्तर-प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में प्रमुखता से होती है। उत्तर-प्रदेश देश का सबसे बड़ा मक्का उत्पादन प्रदेश है। 

इसी गाँव के इरफान (50 वर्ष) बताते हैं, “इस साल जो मक्का बोया था, मक्का की फसल में भुट्टे भी बहुत बड़े लगे थे लेकिन उन भुट्टों में कोई दाना नहीं था क्योंकि हाइब्रिड बीज जब भी बोते हैं तो हमेशा दुविधा रहती है पैदावर होगी भी या नहीं। हाइब्रिड बीज 400 रुपए प्रति किलो मिलता है, अगर पैदावार ठीक हो गई तब तो ठीक है लेकिन अगर बीज खराब निकल गया तो रोने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है।”

आज से छह साल पहले मक्का के साथ किसान सब्जियां,  बो लिया करते थे, जिससे उन्हें सब्जियां बाजार से नहीं लेनी पड़ती थी, लेकिन अब जबसे किसान हाइब्रिड बीज बोने लगे हैं तबसे कीटनाशक ज्यादा डालना पड़ता है, जिससे सब्जियां पैदा नहीं हो पाती हैं। 

देशी बीज अब पूरी तरह से खत्म हो गए हैं अब किसान पूरी तरह से बाजार पर निर्भर हो गया है। इस बार मक्का की पैदावार से किसानों के चेहरे पर थोड़ी खुशी आई है लेकिन पहले से इतना ज्यादा नुकसान हो चुका है कि मक्का की बेहतर पैदावार भी किसानों के घाव को भर नहीं पाया है।

छात्रा का नाम-प्रतिभा देवी 

हरनारायण सिंह डिग्री कालेज, मैथा कानपुर देहात 

स्वयं डेस्क प्रोजेक्ट

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