हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर लगाई रोक

हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर लगाई रोकGaon Connection

नई दिल्ली। उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के खिलाफ कांग्रेस की अर्जी पर मंगलवार को नैनीताल हाइकोर्ट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन पर रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत को अब 31 मार्च को बहुमत साबित करना होगा। हाईकोर्ट ने कांग्रेस पार्टी के बागी विधायकों को भी वोटिंग का अधिकार दे दिया है।

सदन में हाईकोर्ट का निरीक्षक नियुक्त होगा, मान्यता रद्द विधायकों के वोट अलग रहेंगे। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी बोले, मुख्यमंत्री की मांग अदालत ने मानी, हमने फ्लोर टेस्ट की मांग की थी। स्पीकर का फैसला चला, बस तारीख बदली।

वर्ष 1989 में इसी तरह के एक फैसले में भी न्यायपालिका ने राष्ट्रपति शासन रद किया था। 'एसआर बोम्मई बनाम केन्द्र सरकार' के मामले में हुआ यह था कि कर्नाटक की एसआर बोम्मई सरकार बर्खास्त कर दी गई थी। गवर्नर ने सदन में बहुमत साबित करने का मौका भी नहीं दिया था। बोम्मई ने केन्द्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मार्च 1994 में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आया था, सरकार के बहुमत का फैसला सदन के भीतर ही होगा, कोर्ट ने यह आदेश दिया।

दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की अगुवाई में पार्टी ने 28 मार्च को राज्यपाल से मुलाकात की थी और अपने साथ 34 विधायक होने का दावा किया था। अपने दावे को पुख़्ता करने के लिए रावत ने विधायकों की साइन की हुई चिट्ठी भी सौंपी थी।

इसी के साथ जहां कांग्रेस इसे अपनी जीत बता रही है उसी के साथ बीजेपी खेमा इस बात से खुश है कि बागी विधायकों को भी वोट का अधिकार मिल गया है। 

कुछ ऐसा है उत्तराखंड विधानसभा का सियासी समीकरण

उत्तराखंड में 71 विधायकों में 36 कांग्रेस के विधायक हैं। इनमें से नौ बागी हो गए हैं। 27 विधायक बीजेपी के हैं। एक विधायक बीजेपी से निष्कासित है। तीन निर्दलीय विधायक हैं। दो बीएसपी के विधायक हैं। एक उत्तराखंड क्रांति दल का विधायक है।

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