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हार न मानकर कायम की पूरे गाँव में मिसाल

हार न मानकर कायम की पूरे गाँव में मिसालgaonconnection

लखनऊ। शांती देवी (42 वर्ष) की शादी हुई जब वो 14 वर्ष की थीं तब उनकी दोगुनी उम्र वाले आदमी से धोखे से शादी करा दी गई। फिर भी हार न मानकर शांती देवी ने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया और आज आशासंगिनी बनकर पूरे गाँव की महिलाओं की सेवा कर रही हैं।

हरदोई जिले के शाहाबाद ब्लॉक से चार किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में नरही गाँव हैं। यहां की रहने वाली शांती देवी आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है| 2600 आबादी वाले इस गाँव में हर कोई शांती देवी का नाम जानता है | वर्ष 2006 में आशा बहू के पद के लिए चुनी गई फिर अपने कठिन परिश्रम से जल्द ही पूरे गाँव की आशा संगिनी बन गई।

शांती देवी बताती हैं, “मैं पश्चिम बंगाल की रहने वाली हूं। आज से 28 साल पहले जब मैं 14 साल की थी, हमारी चचेरी बहन हमें दिल्ली घुमाने के बहाने लेकर आई थीं। दिल्ली में मुश्किल से 15 दिन ही रुकी थी, चचेरी बहन के पति एक दिन कहने लगे की हमारे एक दोस्त की शादी है, हम सब जा रहे हैं तुम भी चलो। तब मुझे नहीं पता था कि हम कहां जा रहे हैं। गाड़ी में बैठकर हम उनके साथ चले आए। एक गाँव में मंडप सजा था दूल्हा बैठा था, मुझे नहीं पता था दुल्हन कहां थी।”

वो आगे बताती हैं, “मैं उस दिन को याद नहीं करना चाहती, क्योंकि उस मंडप में मेरी दोगुनी उम्र के दूल्हे के बगल में मुझे बैठाया गया था| तब मुझे पता चला कि मेरी ही शादी हो रही है| मेरे बहन बहनोई कब मुझे छोड़कर चले गए पता ही नहीं चला।”

शांती आगे बताती हैं कि अनजान शहर, अनजान चेहरे, अजनबी रिश्ते, नासमझी भाषा, रहन-सहन, खान-पान कुछ भी नहीं था | मेरे पति पुतीलाल (57 वर्ष) पांच भाइयों में तीसरे नम्बर पर थे,मेरी शादी के समय इनके चारों भाइयों की शादी हो गई थी, उनका परिवार नहीं चाहता था कि हम उनके घर में रहे| हर दिन मेरे ऊपर हिंसा होती। मारपीट गाली-गलौज तो दिनचर्या में शामिल हो गया था। इतनी यातनाओं के बाद भी जब परिवार वालों का मन नहीं भरा तो उन्होंने मुझे मेरे गाँव वापस भेज दिया।”

वो आगे बताती हैं कि जब अपने गाँव पहुंची तो पता चला कि मैं गर्भवती हूँ| घरवालों ने दबाव डाला कि बच्चा गिरवा दो, यहाँ तुम्हारी दूसरी शादी कर देंगे | लेकिन मैंने ये पाप करने से मना कर दिया और वापस अपने ससुराल चली गई।

बेटी के जन्म के बाद खेतों में मजदूरी करके पेट भरती थी, बेटी के जन्म के दो साल बाद एक और बेटा हुआ| जिन्दगी के दिन मेहनत मजदूरी से जैसे तैसे कट रहे थे| पांच साल बाद एक और बेटे का जन्म हुआ| पांच लोगों का परिवार हो गया था| खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा था,पूरे परिवार सहित हम पानीपत चले गए और वहां दस साल तक हमने और हमारे पति ने फैक्ट्री में काम किया| बच्चे बड़े हुए तो उनके भविष्य की चिंता हुई,फिर वापस अपने गाँव आ गई| यहाँ बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया, बच्चे स्कूल से पढ़कर आते तो मुझे पढ़ाते| उनकी पढ़ाई के साथ-2 मैंने भी हाई स्कूल पास कर लिया| ये बताते हुए शांती देवी के चेहरे पर खुशी की झलक थी।

शांती देवी की मेहनत से उनकी बड़ी बेटी अनीता देवी (25 वर्ष) पुलिस में भर्ती हो गई है, बड़े बेटे संतोष कुमार (22 वर्ष) ने आर्मी में पिछले साल ही ज्वाइन किया है। छोटा बेटा संदीप (17 वर्ष) बीएससी सेकेंड ईयर में है|

रिपोर्टर : नीतू सिंह

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