हैंडपंप की ये हालत किसने की ?

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बाराबंकी/लखनऊ। देश के कई इलाकों में लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। समस्या ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है। बुंदेलखंड के ज्यादातर नल सूख गए हैं, तो पश्चिमी यूपी, अवध क्षेत्र और पूर्वांचल में भी नल लोगों को पानी के लिए तरसा रहे हैं।

बाराबंकी जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर उत्तर दिशा में तहसील फतेहपुर के पास ग्राम बडेला में लगा एक हैंडपंप पिछले कई वर्षों से खराब है। हैंडपंप का सिर्फ एक हिस्सा दिख रहा है बाकी कचरे में पट गया है। गाँव के निवासी और शिक्षक रमाकांश वर्मा बताते हैं, “गाँव के लोग पानी के लिए तरह रहे हैं, दूसरे मोहल्ले में पानी लेने जाते हैं, लेकिन इस हैंडपंप की कोई सुध नहीं ले रहा है। हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी ये बेकार पड़ा है।”

बाराबंकी में ही निंदूरा ब्लॉक के सुलेमाबाद की रहने वाली कक्षा नौ की छात्रा गोल्डी सिंह बताती हैं, “गाँव के अधिकतर सरकारी नल खराब पड़े हैं। प्रधान ध्यान ही नहीं देते। घर में लगे हैंडपंप से पानी नहीं आता। अब बाल्टी भर के बाहर से लाना पड़ता है।”  

यही हाल प्रदेश के दूसरे इलाकों का है। कहीं हैंडपंप रिबोर का इंतजार कर रहे हैं कहीं ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों की उदासीनता का शिकार हो रहे हैं।

जलनिगम के मुताबिक प्रदेश में 26 लाख से ज्यादा हैंडपंप है। “प्रदेश में 26 लाख हैंडपंप है। पिछले वित्तीय वर्ष में नए हैंडपंप नहीं लगे थे लेकिन हर ब्लॉक में 50-50 के हिसाब से  41050 से ज्यादा हैंडपंप रिबोर किए गए थे। जल निगम के मुख्य अभियंता ग्रामीण पीके त्यागी बताते हैं, “एक हैंडपंप पर 45 हजार से 80 हजार (बुंदेलखंड- सोनभद्र जैसे इलाकों में) रुपये तक लागत आती है। हमारा काम हैंडपंप लगाना है। रखरखाव का काम पंतायत का है उन्हें इसका बजट मिलता है। जब तक स्थानीय लोग और प्रधान जागरुक नहीं होंगे, समस्या हल नहीं होगी।”

बाराबंकी में जल निगम के मुख्य अभियंता केडी गुप्ता बताते हैं, ''जिले में 54685 हैंडपंप हैं। अब फिर नए हैंडपंप लगाने की तैयारी है।''

पानी की बढ़ती किल्लत और सरकार से लेकर स्थानीय लोगों की उदासीनता से जल संरक्षण को लेकर कार्यकर रहे स्वयं सेवी संस्थाएं परेशान है। पश्चिमी यूपी के संगठन नीर फाउंडेशन के निदेशक नीरज त्यागी बताते हैं, “क्योंकि ज्यादातर इलाकों में पानी आसानी से उपलब्ध है इसलिए लोग इसकी तवज्जो नहीं देते। सिर्फ सरकार पर दोष नहीं मढ़ा जा सकता है। लोगों को खुद जागरुक होना होगा अपने अधिकारों और कर्तव्यों के लिए भी। लोग तालाबों पर कब्जे कर रहे हैं, फिर पानी के लिए शोर मचता है।”

12 मई से लगेंगे नए हैंडपंप

ग्रामीण इलाकों में पेय जल की समस्या को दूर करने के लिए प्रदेश भर में 12 मई से विधायक कोटे से 100-100 नए हैंडपंप लगेंगे जबकि 100 रीबोर किए जाएंगे। कुछ दिनों पहले ही कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार ने सभी जिलाधिकारियों से गाँवों का चयन कर सूची मांगी थी। प्रवीर कुमार ने कहा था कि पानी की समस्या को देखते हुए 12 मई को इसके लिए धनराशि जारी कर दी जाएगी।

इसके साथ ही बुंदेलखंड के पठारी इलाकों, सोनभद्र और मिर्जापुर के पठारी और इलाकों और इलाहाबाद में ट्रांस गोमती के लिए 15 करोड़ रुपये है हैंडपंप लगेंगे।

इस बारे में पंचायती राज विभाग के संबंधित अधिकारी उप निदेशक गिरीश चंद नागर के मोबाइल पर कई बार कॉल की गई लेकिन बात नहीं हो सकी

रिपोर्टर - वीरेंद्र शुक्ला

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