हिंदी साहित्य की अनमोल कहानियां जिन्हें आप पढ़ना चाहेंगे बार-बार

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हिंदी साहित्य में एक से बढ़कर एक महान लेखक व उनकी कहानियां है। कुछ कहानियां ऐसी हैं जो बरसों पुरानी होने के बावजूद आज भी हमारे दिलों को छूती हैं। कुछ ऐसी की कहानियों के बारे में हम आपको बता रहे हैं-

उसने कहा था- चंद्रधर शर्मा गुलेरी

शब्दों की कारीगरी से एक अद्भुत प्रेम कहानी कहानी बयान करने वाले चंद्रधर शर्मा की कहानी ‘उसने कहा था’ हिंदी साहित्य की अद्भुत कहानी है। हिंदी साहित्य में सबसे पुरानी कहानी माने जाने वाली ‘उसने कहा था’ के संवाद आज भी दिलो-दिमाग पर छाए रहते हैं। खासकर कहानी का नायक लहना सिंह जब-जब अपनी प्रेमिका से पूछता है, ‘तेरी कुड़माई हो गई?’ इसके नाम के साथ ही इसे जानने-समझने का रोमांच भरने वाला रहस्य जुड़ा हुआ है जो पाठकों को पूरी कहानी पढ़ने के लिए मजबूर करता है। 

हिंदी साहित्य की यह कहानी वैसे तो एक प्रेम कहानी है लेकिन 100 साल से ज्यादा समय हो जाने के बाद भी हिंदी की यादगार कहानियों में से एक मानी जाती है। यह प्रेम कहानी आज की लवस्टोरी जैसी नहीं है। न वैलंटाइंस डे मनाती है और न ही गिफ्ट का आदान-प्रदान करती है। 

कफन- प्रेमचंद्र

प्रेमचंद्र के बारे में कहा जाता है कि उनकी कहानियों में सामाजिक मुद्दों को बेहतरीन और मार्मिक तरीके से दर्शाया जाता है। अपनी कहानी कफन में उन्होंने गरीबी को बड़ी कड़वी सच्चाई के साथ पेश किया है। घीसू और उसका बेटा माधव सर्दियों में अलाव जलाए हुए हैं और उसमें आलू भुन रहे हैं। माधव की पत्नी बुधिया प्रसव पीड़ा के मारे घर पर पड़ी है और चिल्ला रही है लेकिन दोनों में से किसी में उसे अंदर जाकर देखने की हिम्मत नहीं होती। यह दुर्भाग्य ही था कि इस कहानी को दलित विमर्श के तहत पिछले वर्षों में विवादों में घेरा गया। समाज में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई को दिखाती यह कहानी प्रेमचंद्र की कालजयी रचना है।

टोबा टेक सिंह- सआदत हसन मंटो

 यह भारत के विभाजन के समय लाहौर के एक पागलख़ाने के पागलों पर आधारित है और समीक्षकों ने इस कथा को पिछले 50 वर्षों से सराहते हुए भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों पर एक “शक्तिशाली तंज़” बताया है। लाहौर के पागलख़ाने में बिशन सिंह नाम का एक सिख पागल था जो टोबा टेक सिंह नामक शहर का निवासी था। उसे पुलिस के दस्ते के साथ भारत रवाना कर दिया गया, लेकिन जब उसे पता चला कि टोबा टेक सिंह भारत में न जाकर बंटवारे में पाकिस्तान की तरफ़ पड़ गया है तो उसने जाने से इनकार कर दिया। कहानी के अंत में बिशन सिंह दोनों देशों के बीच की सरहद में कंटीली तारों के बीच लेटा, मरा या मरता हुआ दिखाया गया। कहानी का आखिरी जुमला है:

‘इधर ख़ारदार (कंटीली) तारों के पीछे हिन्दोस्तान था। उधर वैसे ही तारों के पीछे पाकिस्तान। दरम्यान में ज़मीन के उस टुकड़े पर जिस का कोई नाम नहीं था, टोबा टेक सिंह पड़ा था।’

हार की जीत – सुदर्शन

कहानी के चरित्र बाबा भारती और खड़ग सिंह की यह कहानी मनुष्य के भीतर छिपी अच्छाइयों के पुनरुद्धार की अद्भुत लोकगाथा सुनाती है। यह कहानी लेखक सुरदर्शन द्वारा लिखी गई है जिसे हिंदी की पाठ्यपुस्तक में पढ़ा जा चुका है। बाबा भारती जो सज्जन व्यक्ति हैं और वहीं दूसरी ओर खड़ग सिंह एक डाकू है। दोनों का कैसे आमना-सामना होता है और फिर आखिर में खड़ग सिंह के मन का दुष्ट व्यवहार जीतकर भी हार जाता है और बाबा भारती की सज्जनता हारकर भी जीत जाती है।

चीफ़ की दावत – भीष्म साहनी

लेखक भीष्म साहनी की कहानी चीफ की दावत आधुनिक बनने का प्रदर्शन करते शहरी मध्यवर्गीय परिवार के करियरिज़्म पर एक तीखी टिप्पणी की तरह है। इसी के साथ कहानी में पारिवारिक संबंधों के मार्मिक विघटन और बढ़ती संवेदनहीनता भी दिखाई गई है।

ये कहानियां तो सिर्फ उदाहरण हैं। अगर हम अपने हिंदी साहित्य को झांके तो ऐसी अनेक कहानियां हैं जो बेहतरीन लेखनी और सजीवता का मिश्रण हैं। इसमें प्रेमचंद्र की ‘सद्गति’, धर्मवीर भारती की ‘गुल की बन्नो’,  निर्मल वर्मा की ‘परिंदे’,  मधुसूदन आनंद की ‘करौंदे का पेड़’ और राजेंद्र यादव की ‘जहां लक्ष्मी कैद है’ जैसी ढेरों उदाहरण हैं।

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