हिन्दू और मुसलमानों में दहशत पैदा न की जाए

हिन्दू और मुसलमानों में दहशत पैदा न की जाए

पिछले कुछ दिनों से हिन्दू और मुसलमानों में दहशत फैलाई जा रही है। ऐसे माहौल में दिमागी सुकून चला जाता है और कभी-कभी नतीजा बहुत बुरा होता है। चालीस के दशक में मुहम्मद अली जिन्ना ने हिन्दुओं से कहा था तुम गाय को माता मानते हो हम उसे खाते हैं, तुम्हारे हीरो शिवाजी हैं और हमारे औरंगज़ेब, हमारा खान-पान और रहन-सहन तुमसे अलग है इसलिए हम हिन्दुओं की मॉज़ारिटी के साथ नहीं रह सकते। जिन्ना के बहकावे में देश के मुसलमान आ गए और भारत विभाजित हो गया।

आजम खां की गुहार समझ में नहीं आती। वह सरकार के ताकतवर मंत्री हैं फिर भी कहते हैं हिन्दू राष्ट्र बना तो हमारा क्या होगा। वह यूनाइटेड नेशंस से फरियाद करने वाले हैं। क्या यूनाइटेड नेशंस से उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी? ओवैसी और उनके भाई अगर कहें तो एक बार लोग सुन लेंगे क्योंकि वे सत्ता में नहीं हैं। परन्तु आजम खां की हुकूमत है फिर भी वह कठोर कदम उठाकर, दादरी की घटना नहीं रोक पाए तो दोष किसका है? आजम खां की पार्टी के संस्थापक डा.राम मनोहर लोहिया हर साल चित्रकूट में रामायण मेला का आयोजन कराते थे। आजम खां की जानकारी में होगा कि लोहिया ने कहा था ”हे भारत माता हमें शिव का मस्तिष्क दो, कृष्ण का हृदय दो तथा राम का कर्म और वचन दो”। अब कोई भी लोहिया को साम्प्रदायिक तो नहीं कहेगा। हिन्दू राष्ट्र में इससे अधिक क्या होगा। लोहिया के आदर्शों के अनुयायी हैं आजम खां, जिसमें शिव का नन्दी और कृष्ण की गउवें भी शामिल हैं।

दूसरी तरफ हिन्दू समाज के बहुत से लोग हिन्दुओं में दहशत फैला रहे हैं यह कह कर कि मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ रहीं है और एक दिन भारत इस्लामिक देश बन जाएगा। लेकिन हिन्दू धर्म तो कहता है ”वसुधैव कुटुम्बकम” तो फिर हाय-तौबा किस बात की। इस कुटुम्ब में मुसलमान भी शामिल हैं। और हिन्दू धर्म कहता है ”सर्वे भवन्तु सुखिन:” उसके नाम पर यदि ”हिन्दू राष्ट्र” बन भी जाए तो आजम खां सहित किसी को चिन्तित नहीं होना चाहिए। इस बहस की शुरुआत दादरी की दर्दनाक घटना से हुई जहां एक गाँव के मुस्लिम परिवार के घर में घुसकर कुछ हिन्दुओं ने अखलाक नाम के मुसलमान की हत्या कर दी। हिन्दुओं का आरोप है कि उनके घर में गोमांस रखा था। जिन लोगों ने अखलाक को घर में घुसकर मारा उनके कारण हिन्दू समाज कैसे दोषी हैं। सच कहूं तो मसला बीफ का नहीं है, हिन्दू और मुसलमानों को अलग-अलग गोलबन्द करने की बात है।

मुझे याद है जब लोकसभा में 1999 में वाजपेयी सरकार विश्वास मत जीतने का प्रयास कर रहीं थी लेकिन एक वोट से हार गई थी। उस बहस के दौरान पूर्व स्पीकर पीए संगमा ने कहा था, मैं सरकार को वोट इसलिए नहीं दूंगा कि मैं गोमांस खाता हूँ और यह सरकार गौवध पर पाबंदी लगाना चाहती है। किसी ने संगमा को अभद्र बात नहीं कही, बल्कि भाजपा के लोग उसके बाद भी संगमा का सहयोग लेते रहें, आज भी मधुर सम्बन्ध हैं। इसलिए मसला गौवध का है ही नहीं। फिर भी हिन्दुओं पर कटाक्ष करने से हिन्दुओं में आक्रामक लोग पैदा होते हैं। अस्सी के दशक में किसी ने कहा था भारत माता डाइन और गंगा मइया चुड़ैल है। इसके बाद आडवाणी की रथयात्रा में हिन्दुओं का सैलाब उमडऩे लगा। इसलिए आजम खां साहब, आप अपनी सरकारी मशीनरी का प्रयोग करके अखलाक के हत्यारों को कड़ी सजा दिलाइए, पूरे हिन्दू समाज को दोषी मान लेना वैसा ही होगा जैसे सारे मुसलमानों को आतंकवादी मानना।

आपसी झगड़े की जड़ में न तो बीफ है और न मुसलमान, इसकी जड़ में है भारत का बंटवारा। हिन्दू और मुसलमान कई शताब्दियों से एक-दूसरे को बर्दाश्त करते आए थे जब तक जिन्ना ने अलगाव की बात नहीं कही। जिन्ना और नेहरू ने हिन्दुस्तान को तक्सीम कर दिया और जिन्ना ने अपने हिस्से को इस्लामिक मुल्क बना दिया। नेहरू ने बंटवारा तो स्वीकार किया लेकिन अपने हिस्से को हिन्दू राष्ट्र नहीं बनाया। नाराजगी मुसलमानों से नहीं नेहरू से है। हिन्दू अब इतिहास को बदल नहीं सकते, खम्भा नोचते रहिए।

sbmisra@gaonconnection.com

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